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गौड़ीय मठ मंदिर में गोवर्धन महोत्सव
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चंडीगढ़। सेक्टर-20 स्थित श्री चैतन्य गौड़ीय मठ में सोमवार को श्री गोवर्धन पूजा का आयोजन हुआ। इस मौके पर अन्नकूट के भंडारा का भी आयोजन हुआ। कोविड-19 के कारण बाहरी भक्तों को मठ में प्रवेश नहीं दिया गया। केवल मठ में रहने वाले संन्यासी और भक्त ही इस कार्यक्रम में शामिल हुए। भगवान की भव्य आरती हुई और उसके बाद अन्नकूट का भंडारा हुआ। भगवान को छप्पन भोग अर्पित किया। मठ के प्रवक्ता जय प्रकाश गुप्त ने बताया कि सुबह मंगला आरती के बाद संकीर्तन और प्रवचन हुआ।
मठ के प्रबंधक वामन महाराज ने भक्तों को गोवर्धन पूजा का महत्व बताया। उन्होंने कहा कि आज ही के दिन भगवान श्रीकृष्ण जी ने गोवर्धन धारण लीला की थी। जब इंद्रदेव ने कहा कि सब लोग मेरी पूजा करें तो ब्रजवासियों ने उनकी पूजा करने से मना करके भगवान श्री कृष्ण में आस्था व्यक्त की थी। इससे इंद्र ने क्रोधित होकर पूरे ब्रज को बारिश द्वारा जल से डुबोने का प्रयास किया लेकिन भगवान श्री कृष्ण ने अपनी छोटी उंगली पर पूरे गोवर्धन पर्वत को उठाकर सभी ब्रजवासियों को उसके नीचे शरण दी थी। उसके बाद प्रत्येक वर्ष गोवर्धन महोत्सव पूरे विश्व में भगवान श्रीकृष्ण जी के यशगान के लिए मनाया जाता है। इस दौरान गाय की विशेष रूप से विधिपूर्वक पूजा-अर्चना की गई। भक्तों ने श्री गोवर्धन के सम्मुख नृत्य संकीर्तन करके आनंद प्राप्त किया।
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मठ के प्रबंधक वामन महाराज ने भक्तों को गोवर्धन पूजा का महत्व बताया। उन्होंने कहा कि आज ही के दिन भगवान श्रीकृष्ण जी ने गोवर्धन धारण लीला की थी। जब इंद्रदेव ने कहा कि सब लोग मेरी पूजा करें तो ब्रजवासियों ने उनकी पूजा करने से मना करके भगवान श्री कृष्ण में आस्था व्यक्त की थी। इससे इंद्र ने क्रोधित होकर पूरे ब्रज को बारिश द्वारा जल से डुबोने का प्रयास किया लेकिन भगवान श्री कृष्ण ने अपनी छोटी उंगली पर पूरे गोवर्धन पर्वत को उठाकर सभी ब्रजवासियों को उसके नीचे शरण दी थी। उसके बाद प्रत्येक वर्ष गोवर्धन महोत्सव पूरे विश्व में भगवान श्रीकृष्ण जी के यशगान के लिए मनाया जाता है। इस दौरान गाय की विशेष रूप से विधिपूर्वक पूजा-अर्चना की गई। भक्तों ने श्री गोवर्धन के सम्मुख नृत्य संकीर्तन करके आनंद प्राप्त किया।
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