गुड न्यूज, पीजीआई में सस्ते में करवाएं रोबोटिक सर्जरी
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पीजीआई के यूरोलॉजी डिपार्टमेंट ने रोबोटिक सर्जरी के लिए फीस तय कर दी है। जनरल वार्ड में भर्ती होने वाले मरीजों से 20 हजार रुपये लिए जाएंगे, जबकि प्राइवेट वार्ड के मरीजों से 40 हजार रुपये। सर्जरी की फीस के अलावा करीब 10 से 15 हजार रुपये का अतिरिक्त सामान लगेगा।
कुल मिलाकर जनरल वार्ड में दाखिल होने वाले मरीज यदि रोबोटिक सर्जरी से अपना इलाज कराते हैं तो उन्हें 30-35 हजार रुपये का खर्च आएगा। पीजीआई के रोबोटिक केंद्र में अब तक 53 सर्जरी हो चुकी हैं। वहीं, प्राइवेट हॉस्पिटल में इसी सर्जरी पर एक से सवा लाख रुपये का खर्च आता है।
यूरोलॉजी के प्रोफेसर एसके सिंह ने बताया कि रोबोटिक का सबसे ज्यादा फायदा यह है कि मरीज को तीन से सात दिन के भीतर छुट्टी मिल जाती है। लेप्रोस्कोपिक व रूटीन सर्जरी में मरीज को ठीक होने में दो हफ्ते लग जाते हैं।
कई बार ज्यादा दिन तक रुकने से मरीज को इंफेक्शन हो जाता है। रोबोट की बाहें मानव हाथ की तुलना में ज्याद निपुण होती हैं। इसलिए ऊतकों (टिश्यू) को कम क्षति पहुंचती है। नतीजतन रक्त का बहुत कम नुकसान होता है। कम आघात पहुंचता है और मरीज जल्द सामान्य स्थिति में आ जाता है।
रोबोटिक सर्जरी इन मर्ज में सबसे ज्यादा उपयोगी
पारंपरिक होल सर्जरी की तुलना में रोबोटिक सर्जरी का फायदा यह भी है कि डॉक्टर को थ्री डाइमेंशनल व्यू दिखाई देता है। इसलिए इसमें एक गहराई भी दिखती है जो कि होल सर्जरी में दिखाई नहीं देती। रोबोट के रिमोट कंट्रोल से चलने वाले तीन हाथ हैं, जो 360 डिग्री पर घूम सकते हैं।
ऑपरेशन को और सटीक बनाता है
इससे डॉक्टर अपने हाथ की तुलना में ज्यादा सूक्ष्मता से ऑपरेशन कर सकते हैं। रोबोट में एक चौथा हाथ भी होता है, जिसमें 3 डी हाई डेफिनेशन कैमरा लगा होता है। ऑपरेशन करते समय डॉक्टर थ्री डी कैमरे से पूरी तस्वीर देख सकते हैं, जो ऑपरेशन को और सटीक बनाता है। रोबोट से वो हल्का कंपन भी दूर किया जा सकता है।
रोबोट का उपयोग खास तौर पर प्रोस्टेट या ट्यूमर हटाने के लिए या फिर गैस्ट्रोइंटेस्टिनल (जठरांत्रिय) या न्यूरोलॉजिकल (तंत्रिका) ऑपरेशन में इस्तेमाल किया जाता है। पीजीआई में डॉक्टर ही तय करते हैं कि किस मरीज का आपरेशन रोबोट से होना है, क्योंकि हर मरीज के आपरेशन में रोबोट का इस्तेमाल नहीं कर सकते।
एम्स में भी नहीं पीजीआई जैसा रोबोट
डॉ. एसके सिंह ने बताया कि एक ऑपरेशन में पीजीआई का करीब एक लाख रुपये खर्च आता है। डिपार्टमेंट ने पहले एक लाख रुपये का प्रस्ताव दिया था, लेकिन पीजीआई ने उसे 20 हजार रुपये कर दिया है। दावा किया गया है कि पीजीआई के पास जो रोबोट है, वह टीचिंग के साथ इलाज करता है। ऐसा दूसरा रोबोट फिलहाल नार्थ इंडिया में नहीं है। एम्स में भी इस तरह का रोबोट नहीं है।