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गरीब छात्रों के लिए अच्छी खबर, निजी स्कूलों में दाखिला का इंतजार खत्म, 14 अप्रैल को होगी परीक्षा

Thu, 11 Apr 2019 10:30 PM IST
ajay kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: ajay kumar Updated Thu, 11 Apr 2019 10:30 PM IST
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Good news for poor students in Haryana for admission in private schools
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : amar ujala

हरियाणा के निजी स्कूलों में गरीब बच्चों के दाखिले का इंतजार खत्म होने जा रहा है। स्कूल शिक्षा विभाग ने आर्थिक रूप से कमजोर बच्चों के दाखिले के लिए नियम-134ए के तहत मूल्यांकन परीक्षा का शेड्यूल जारी कर दिया है। 14 अप्रैल को प्रदेश के सभी ब्लॉकों में मूल्यांकन परीक्षा होगी। परीक्षा का समय सुबह दस बजे से दोपहर बारह बजे तक रहेगा।

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 स्कूल शिक्षा निदेशालय ने परीक्षा के मद्देनजर उचित प्रबंध करने के लिए सभी जिला व खंड मौलिक शिक्षा अधिकारियों को निर्देश जारी कर दिए हैं। दाखिला के लिए आवेदन करने वाले सभी छात्रों की परीक्षा खंड स्तर पर ही होगी। मूल्यांकन परीक्षा में 55 प्रतिशत अंक हासिल करने वाले छात्रों को ही निजी स्कूलों में दाखिला मिलेगा। 

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आर्थिक रूप से कमजोर तबके में अपने बच्चों को अच्छे निजी स्कूलों में दाखिला दिलाने के लिए इस बार पहले से ज्यादा उत्साह है। अभिभावकों ने स्कूल शिक्षा विभाग की ओर से मूल्यांकन परीक्षा में पूछे जाने वाले प्रश्नों के पैटर्न को भी समझा है और उसी अनुसार तैयारी कराई है। इसे देखते हुए शिक्षा निदेशालय का मानना है कि इस बार मुफ्त शिक्षा के लिए दाखिला लेने वाले गरीब छात्रों की संख्या बढ़ेगी।

 स्कूल शिक्षा विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव पीके दास का कहना है कि बीते वर्ष निजी स्कूलों में नियम-134 ए के तहत दूसरी से बारहवीं कक्षा तक 18 हजार बच्चों ने दाखिला लिया था। इस बर्ष यह संख्या 25 हजार तक पहुंचने की उम्मीद है, चूंकि पिछले वर्ष की तुलना अबकी बार आवेदन भी ज्यादा आए थे। 

निजी स्कूलों को बिल देने पर ही मिलेगी गरीब छात्रों की फीस की राशि

Good news for poor students in Haryana for admission in private schools
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : amar ujala

हरियाणा सरकार गरीब बच्चों की फीस की प्रतिपूर्ति निजी स्कूलों को बिल सौंपने पर ही करेगी। निजी स्कूलों को स्कूल शिक्षा विभाग ने चेता दिया है कि बिना बिल सौंपे एक भी रुपया प्रदान नहीं किया जाएगा।

स्कूल प्रबंधकों के पास अब भी समय है वे 30 अप्रैल तक उनके स्कूलों में शिक्षा ग्रहण कर चुके या कर रहे छात्रों का पूरा ब्योरा फीस राशि सहित शिक्षा निदेशालय में जमा कराएं, उन्हें राशि प्रदान कर दी जाएगी। 

शिक्षा का अधिकार अधिनियम की धारा-19 के अनुसार निजी स्कूलों को गरीब बच्चों को अन्य बच्चों की तरह सुविधाएं देनी होंगी। ऐसे बच्चों से कोई अन्य फीस स्कूल नहीं ले सकते हैं।

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इनकी फीस की प्रतिपूर्ति के लिए संबंधित स्कूल को अलग बैंक खाता खोलना अनिवार्य है। स्कूल को वर्ष में दो बार बिल बनाकर फीस की प्रतिपूर्ति के लिए विभाग को आवेदन करना होगा।

विभाग बैंक खाते में प्रतिपूर्ति करेगा। स्कूल शिक्षा विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव पीके दास का कहना है कि फीस प्रतिपूर्ति के लिए स्कूल को ये शपथ पत्र देना होगा कि कितने छात्रों ने परीक्षा ग्रहण की है, कितनों ने परीक्षा दी, किसी छात्र ने स्कूल तो नहीं छोड़ा। विभाग के फीस प्रतिपूर्ति के लिए बार-बार पत्र जारी करने के बावजूद निजी स्कूल बिल प्रस्तुत नहीं कर रहे हैं। 

10 अप्रैल तक किसी भी निजी स्कूल ने फीस प्रतिपूर्ति के लिए अपना दावा नहीं किया है। ऐसे में विभाग उन्हें कैसे राशि प्रदान कर सकता है। निजी स्कूल छात्रों को दाखिले से नहीं रोक सकते हैं। वे बिल दें, विभाग समयबद्ध तरीके से प्रतिपूर्ति करेगा। 

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