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24 घंटे इमरजेंसी के दावे का सच: GMCH-32 में इलाज के नाम पर दवा की पर्ची, डॉक्टर बोले-सुबह ओपीडी में दिखाना

Thu, 16 Jan 2025 12:20 PM IST
निवेदिता वर्मा संदीप खत्री/करुण शर्मा, चंडीगढ़
संदीप खत्री/करुण शर्मा, चंडीगढ़ Published by: निवेदिता वर्मा Updated Thu, 16 Jan 2025 12:20 PM IST
सार

अमर उजाला संवाददाता मरीज बनकर रात लगभग 12 बजे जीएमसीएच-32 पहुंचा और पर्ची बनवाने से लेकर परामर्श और इलाज तक की सारी प्रक्रिया देखी। डॉक्टर से मिलने पर पूरी बात भी नहीं सुनी और दवा की पर्ची लिखकर थमा दी।

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GMCH 32 Emergency amar ujala investigation
जीएमसीएच 32 की इमरजेंसी में रेडियोलॉजी डिपार्टमेंट के बाहर लेटे लुधियाना से आए 74 वर्षीय प्रीतपाल - फोटो : करुण शर्मा

विस्तार

चंडीगढ़ के गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल (जीएमसीएच) सेक्टर-32 के इमरजेंसी में मरीजों को इलाज के लिए भटकना पड़ रहा है। सबसे ज्यादा परेशानी गंभीर मरीजों के इलाज के लिए पहुंचे परिजनों को झेलनी पड़ती है। 
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इमरजेंसी के मरीजों को इलाज के नाम पर केवल एक कागज पर दवा लिखकर पर्ची थमाई जा रही है। इमरजेंसी में तैनात डॉक्टर मरीजों को सुबह ओपीडी में दिखाने की सलाह देते हैं। 
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मरीज बनकर पहुंचा अमर उजाला संवाददाता

इसकी हकीकत जानने के लिए अमर उजाला संवाददाता मरीज बनकर रात लगभग 12 बजे जीएमसीएच-32 पहुंचा और पर्ची बनवाने से लेकर परामर्श और इलाज तक की सारी प्रक्रिया देखी। डॉक्टर से मिलने पर पूरी बात भी नहीं सुनी और दवा की पर्ची लिखकर थमा दी। उसके बार-बार कहने के बावजूद इमरजेंसी मेडिकल ऑफिसर ने कोई बात नहीं सुनी। कहा-कल सुबह आना। इसके बाद संवाददाता ने अस्पताल के कई वार्डों और परिसर का दौरा किया और कुछ मरीजों से बात की।

मरीज परेशान-आपात स्थिति में कहां जाएं

हैरान करने वाली बात है कि देर रात दूर-दराज से इलाज के लिए जीएमसीएच-32 पहुंचने वाले मरीजों को इमरजेंसी में इलाज नहीं मिल पा रहा है। मरीजों का कहना है कि अगर 24 घंटे इमरजेंसी में ऐसी ही सुविधा देनी है तो वे आपात स्थिति में कहां जाएं। यूं तो 24 घंटे इमरजेंसी सेवा का दावा किया जाता है, लेकिन इसके पीछे की हकीकत बेहद खतरनाक है।

रात के समय गंभीर रूप से बीमार या हादसे में घायल मरीजों की जरूरी जांच भी नहीं हो पाती। अल्ट्रासाउंड तो दूर एक्स-रे तक नहीं हो पाते। वहीं, गंभीर नहीं होने के बावजूद भी पीजीआई भेज दिया जाता है। इमरजेंसी में पहुंचे एक मरीज ने कहा कि सरकारी व्यवस्था से तो अब विश्वास उठने लगा है। अगर चंडीगढ़ जैसे शहर में स्वास्थ्य सुविधाएं इतनी बदहाल हैं तो अन्य जगहों की बात क्या की जाए। बता दें कि शहर के मेडिकल कॉलेज में ट्राइसिटी ही नहीं आसपास के राज्यों के गंभीर मरीज इमरजेंसी में पहुंचते हैं।

12 घंटे बीते नहीं चढ़ाया प्लास्टर

श्री आनंदपुर साहिब से इमरजेंसी में आए नीतीश ने कहा कि उनके भाई संजय कुमार का बाइक पर एक्सीडेंट हो गया था। दोपहर करीब 12 बजे उसे लेकर सेक्टर 32 अस्पताल पहुंचे और अब रात 12 बज गए, इलाज के लिए भटक रहा हूं। अभी तक भाई को प्लास्टर भी नहीं लगाया गया।
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एक ही बेड पर दो-दो प्रसूताएं

ग्राउंड फ्लोर पर बने वेटिंग रूम में 10 डिग्री की ठंड में लोग कंबल ओढ़कर सो रहे थे। कुछ लोग इलाज करवाने के लिए इधर-उधर घूम रहे थे। वेटिंग रूम में बैठे खरड़ निवासी मनदीप सिंह ने बताया कि 12 जनवरी को उनकी पत्नी की डिलीवरी हुई थी। पत्नी गायनी वार्ड में भर्ती है। एक ही बेड पर दो महिलाओं को लेटना पड़ रहा है। बच्चे भी उनके साथ बेड पर हैं। उनकी पत्नी को कई परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। अस्पताल को कम से कम प्रसूताओं को बेड अलग-अलग देना चाहिए। उसकी पत्नी को खरड़ अस्पताल से सेक्टर 32 रेफर किया गया।

बदसलूकी का लगाया आरोप

लुधियाना के गांव रामपुर से आए रवि सिंह का कहना है कि वह दादा प्रितपाल सिंह का इलाज करवाने आए हैं। उनके दादा को बड़ा फोड़ा हो गया है। वहां से इलाज के लिए चंडीगढ़ रेफर किया गया। इमरजेंसी में 20 नंबर कमरे में भेजा गया। वहां तैनात डॉक्टर दर्द वाली जगह पर छूकर कहा कुछ तो नहीं है। थोड़ी सी तकलीफ हुई नहीं कि पहुंच गए जीएमसीएच-32 इलाज करवाने। इसके साथ काफी डांट फटकार लगाई और बदसलूकी भी की। उन्होंने एक पुरुष डॉक्टर से इसकी शिकायत भी की। डॉक्टर ने कहा कि लंबी ड्यूटी के तनाव में बोल दिया होगा। आप इलाज करवाओ। डॉक्टर ने दादा का अल्ट्रासाउंड करवाने के लिए इमरजेंसी सेक्शन में भेजा लेकिन वहां पर्ची पर सुबह 9 बजे का समय डालकर इंतजार करने के लिए कह दिया गया।

इमरजेंसी में आने वाले मरीजों को इलाज की सुविधा उपलब्ध करवाई जा रही है। इमरजेंसी में मरीजों का पंजीकरण के बजाय इलाज पर फोकस होता है। अगर मरीजों को कोई समस्या आ रही है तो उसमें सुधार करेंगे। - एके अत्री, जीएमसीएच-32 के प्रिंसिपल निदेशक
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