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ग्लूकोमाः क्या, कैसे, क्यों और बचाव के उपाय

Mon, 24 Feb 2014 02:50 PM IST
आशीष वर्मा/अमर उजाला, चंडीगढ़
आशीष वर्मा/अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Mon, 24 Feb 2014 02:50 PM IST
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Glaucoma- Eye Problem
ग्लूकोमा को आम भाषा में काला मोतिया कहते हैं। आंख के अंदर अंगों के पोषण के लिए एक तरल पदार्थ उत्पन्न होता है। पोषक के बाद यह तरल पदार्थ आंख के महीन छिद्र (फिल्टर) से बाहर निकलते हैं। उम्र के साथ छिद्र तंग होने शुरू हो जाते हैं।
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इससे तरल पदार्थ के निकलने की प्रक्रिया थोड़ी बाधित होती है। इससे आंख का प्रेशर बढ़ने लगता है। आंख का बढ़ा प्रेशर ऑप्टिक नर्व (आंखों से दिमाग को सिग्नल भेजने वाली नर्व) को डैमेज करता है।
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आमतौर पर ऐसा आंखों पर ज्यादा जोर पड़ने से होता है। दरअसल, ऑप्टिक नर्व काफी सेंसिटिव हैं, इसलिए जरा भी ज्यादा प्रेशर पड़ने पर यह ब्लॉक हो जाती है। इससे दिखना बंद हो जाता है।
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दो तरह के होते हैं ग्लूकोमा

Glaucoma- Eye Problem
ओपेन एंगल ग्लूकोमा
यह धीरे-धीरे बढ़ता है और मरीजों को पता ही नहीं चलता।  जब आंख के बढ़े प्रेशर से ऑप्टिक नर्व खराब हो जाती है तो उसे ओपेन एंगल ग्लूकोमा कहते हैं। यह सबसे ज्यादा कॉमन है।

इसमें तरल पदार्थ को ड्रेन करने वाली कनैल ब्लॉक हो जाती है, जिससे आंख का प्रेशर बढ़ जाता है। इसके होने से आंख की नजर धीरे-धीरे कमजोर होती है। यदि इसका समय रहते पता चल जाए तो आंख की रोशनी बचाई जा सकती है। वरना इसका कोई इलाज नहीं है।
ओपेन एंगल ग्लूकोमा के लक्षण
1. हलका सिर में दर्द
2. आंख में भारीपन
3. नजदीक का चश्मा बार-बार बदलना
4. बल्ब बुझने के कुछ देर बाद भी नहीं दिखना

एंगल क्लोजर ग्लूकोमा

Glaucoma- Eye Problem
यह कम खतरनाक है और इसका इलाज उपलब्ध है। इसमें मरीज को अचानक अटैक पड़ता है और नजर कमजोर हो जाती है। इसमें बहुत तेज दर्द होता है और मरीज सीधे डाक्टर के पास पहुंचता है।
ये हैं लक्षण
1.भयंकर दर्द होता है।
2.आधे सिर में दर्द होता है।
3.उल्टी आने की आशंका रहती है।
4. अचानक से नंबर कम हो जाता है।
ये रिस्क फैक्टर हैं तो ग्लूकोमा हो सकता है
1. परिवार के किसी सदस्य को हुआ हो
2. यदि शुगर के मरीज हैं तो
3. माइनेस नंबर है और बार-बार कम हो रहा है
4. 40वर्ष के उम्र के पार हैं
5. अंधेरे में देर से नजर आना।
6. रोशनी में अलग-अलग रंग दिखना
7. अस्थ्मा व आथराइटिस जैसे रोगों में लंबे समय तक स्टेरायल ले रहे हों
8. कभी आंख का कोई जख्म हुआ हो या कोई सर्जरी हुई हो
9. यह बच्चों में भी हो सकता है।

आंखों की चली जाती है रोशनी

Glaucoma- Eye Problem
ग्लूकोमा के बारे में सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इसके चलते नजर का जो नुकसान हो गया, उसका कोई इलाज नहीं है। अगर पता न चले तो यह मर्ज धीरे धीरे बढ़ता रहता है और ज्यादा बढ़ जाने पर अंधेपन की भी नौबत आ सकती है। हां, अगर इसका पता वक्त रहते चल जाए तो आगे और नुकसान से बचने के लिए इलाज और देखभाल की जा सकती है।

40 के बाद रुटीन चेकअप कराएं

40 साल की उम्र के बाद ग्लूकोमा होने के चांस बढ़ जाते हैं। 40 की उम्र के बाद आंखों का रेग्युलर चेकअप कराते रहें। हो सकता है इस उम्र के लोगों को लगे कि उनकी नजर मोतियाबिंद की वजह से कमजोर हो रही है, लेकिन हो सकता है कि नजर की कमजोरी ग्लूकोमा की वजह से हो। ऐसे में सलाह यह है कि 40 की उम्र के बाद आंखों का रुटीन चेकअप कराते रहें।

खुद से जांचें अपनी आंख

Glaucoma- Eye Problem
इस उदाहरण से समझे। अपनी आंख से किसी एक चीज को देखे। मान लिजिए पार्क में एक बच्चा बैठा है। बच्चे के एक तरफ हाथी का खिलौना है और दूसरी तरफ शेर का खिलौना है। हाथी और शेर के साथ एक-एक कुर्सी है। कुर्सी के साथ पेड़ पौधे। यदि आप की आंख ठीक है तो आपको बच्चा भी दिखेगा, हाथी-शेर भी दिखेंगे और पेड़-पौधे। यदि ग्लूकोमा के आप करीब हैं तो आपको बच्चे के साथ हाथी और शेर दिखेंगे। कुर्सियां नहीं। यदि ज्यादा करीब हैं तो सिर्फ आपको बच्चा दिखेगा। हाथी और शेर नहीं। विशेषज्ञों के मुताबिक ग्लूकोमा में फील्ड आफ विजन यानी नजर का दायरा सिकुड़ता है। जब ग्लूकोमा हो जाएगा तो आपको बच्चा भी नहीं दिखेगा।

आपके लिए विशेष जानकारी

अक्सर 40 की उम्र में लोगों की पास की नजर कमजोर पड़ने लगती है। आम तौर पर लोग पास की चश्मे की दुकान में जाते हैं और अपनी आंखे टेस्ट करवाते हैं। दुकानदार सिर्फ आंख टेस्ट कर बढ़िया चश्मा दे देता है। उससे लोगों को अच्छा दिखता है और वे चलते बनते हैं, लेकिन जब भी इस उम्र में चश्मा बनवाएं तो अच्छे डाक्टर से आंखों का पूरा चेकअप करवाएं।

ग्लूकोमा से बचने के उपाय

Glaucoma- Eye Problem
1. घर में अगर किसी को ग्लूकोमा है तो बच्चे को होने की ज्यादा संभावना होती है क्योंकि यह एक आनुवांशिक बीमारी है। ऐसे में बच्चे की आंखों की जांच करवा लीजिए।
2. आंखों की एलर्जी, अस्थमा, चर्म रोग या किसी अन्य रोग के लिए स्टेरॉइड दवाओं का प्रयोग करने से आंखों में दिक्कत आ जाती है। ऐसी दवाईयों के सेवन से बचे।
3.आंखों में दर्द हो या आंखें लाल हो जाएं तो स्पेशलिस्ट डॉक्टर से सलाह लेकर ही दवा का प्रयोग करें।
4.खेलने के दौरान (टेनिस या क्रिकेट बॉल से) अगर आंखों में चोट लग जाए तो इसका इलाज कराएं।
5.आंखों में कभी किसी प्रकार की कोई सर्जरी हुई हो या कोई घाव हो गया हो तो उसकी जांच समय-समय पर करवाते रहें, क्योंकि सर्जरी से ग्लूकोमा होने का खतरा बढ़ जाता है।
6.हर दो साल में आंखों की नियमित जांच करवाते रहिए। चेकअप करवाने से आंखों की रोशनी का पता लगाया जा सकता है।
7.अगर आपके चश्मे का नंबर बदल रहा है तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क कीजिए।
8.जब आप सीधे देख रहें हों तो आंखों के किनारे से न दिखाई दे रहा हो तब आंखों की जांच करवाएं।
9. आंखों में दर्द हो, सिर और पेट में दर्द हो तो इसको नजरअंदाज मत कीजिए, तुरंत चिकित्सक से संपर्क कीजिए।
10. आंखों को पोषण देने वाले तत्वों  जैसे बादाम, दूध, संतरे का जूस, खरबूजे, अंडा, सोयाबीन का दूध, मूंगफली आदि का ज्यादा मात्रा में सेवन कीजिए।

ये भी सावधानी बरतें

Glaucoma- Eye Problem
ग्लूकोमा से बचने के लिए आपको कुछ सावधानियां बरतने की जरूरत होती है। जैसे कि आंखों में कोई भी ड्रॉप डालने से पहले अपने हाथों में अच्छी तरह धो लें। दवाई को ठंडी और ड्राई जगह पर रखें। एक बार में एक ही ड्रॉप डालें और दो दवाइयों के बीच में आधा घंटे का गैप जरूर करें। अगर आप अपने आई स्पेशलिस्ट से लगातार मिलते रहते हैं और समय से दवाइयां लेते हैं , तो आप अपने ग्लूकोमा को समय से कंट्रोल करके एक नॉर्मल लाइफ जी सकते हैं।

जीएमसीएच 32 में ग्लूकोमा के लिए विशेष क्लीनिक

जीएमसीएच 32 के अस्पताल में ग्लूकोमा के लिए विशेष इलाज उपलब्ध है। यहां पर इसके लिए विशेष क्लीनिक भी चलाए जाते हैं। यह क्लीनिक सोमवार और वीरवार को बी ब्लाक के चौथी मंजिल के कमरा नंबर सात में चलते हैं। ग्लूकोमा के हास्पिटल में हर महीने 250 मरीज आते हैं। ग्लूकोमा के इलाज यहां पर दो विधि से किया जाता है। पहला पैरीमीट्रिक व दूसरा ओसिटी मशीन से होता है। इसके इलाज में हास्पिटल में मात्र 100 रुपये खरचा आता है।

ग्लूकोमा से जुड़े कुछ तथ्य

Glaucoma- Eye Problem
- दुनिया भर में 10 में से 1 आदमी ग्लूकोमा से पीड़ित है। दुनिया भर में करीब साढ़े छह करोड़ लोगों को ग्लूकोमा है।
- भारत में एक करोड़ से ज्यादा लोगों को ग्लूकोमा है। इनमें से करीब 10 लाख लोग अंधेपन का शिकार हो चुके हैं।
- भारत में अंधेपन के 100 में से 12 केस ग्लूकोमा की वजह से हैं।

पीजीआई में क्या है इलाज

Glaucoma- Eye Problem
पीजीआई में विशेष तौर पर एक आईकेयर सेंटर बनाया गया है, जो भारत में आई के क्षेत्र में विशेष जगह रखता है। यहां पर हर महीने 1200 मरीज हरियाणा, पंजाब, जम्मू कश्मीर, हिमाचल, चंडीगढ़, उत्तराखंड, पश्चिमी यूपी और राजस्थान से आते हैं। यहां पर पहले ओपीडी में रजिस्ट्रेशन करवाना होता है और उसके बाद ग्लूकोमा के क्लीनिक में भेजे जाते हैं। छह दिन ग्लूकोमा के लिए स्पेशल क्लीनिक चलते हैं। अब तक 25 हजार मरीज रजिस्टर्ड हो चुके हैं।

पीजीआई में इन चरणों में इलाज

1. दवाइयों से आंखों का प्रेशर कम करते हैं।
2. फिर लेजर से इलाज किया जाता है।
3. यदि फिर भी दिक्कत आती है तो सर्जरी करते हैं।
(पीजीआई व जीएमसीएच 32 में ग्लूकोमा के इलाज का खर्चा बहुत ही कम है।)

मरीजों व चिकित्सकों के लिए बनाया ग्रुप

Glaucoma- Eye Problem
पीजीआई के प्रोफेसर डाक्टर एसएस पांडव ने ग्लूकोमा के प्रति जागरूकता फैलाने के लिए एक ग्लूकोमा सपोर्ट ग्रुप बनाया है। इसमें डाक्टर, मरीज व उनके रिश्तेदार शामिल हैं, जो समय-समय पर लोगों को जागरूक करते रहते हैं।

पीजीआई के डाक्टर इस ग्रुप को समय-समय पर अपडेट करता रहता है। नार्थ रीजन के एक डाक्टरों का भी ग्रुप बनाया गया है। इसमें पंजाब, हिमाचल, हरियाणा, उत्तराखंड के डाक्टरों को समय-समय पर ग्लूकोमा के बारे में अपडेट किया जाता है।

ग्रुप ने एक हेल्पलाइन नंबर भी बनाया हुआ है। 09780662545 नंबर पर कॉल कर ग्लूकोमा संबंधी जानकारी ले सकते हैं। हालांकि यह नंबर मुख्य रूप से ग्लूकोमा के मरीज के लिए बनाया गया है।

काला मोतिया (ग्लूकोमा) व सफेद मोतिया (मोतियाबिंद)में अंतर

Glaucoma- Eye Problem
दोनों में काफी अंतर है। काला मोतिया (ग्लूकोमा) में यदि रोशनी चली जाए तो वह फिर वापस नहीं आ सकती। इसका कोई भी इलाज उपलब्ध नहीं है, जबकि सफेद मोतिया (मोतियाबिंद) में रोशनी वापस आ सकती है। इसका आसान सा इलाज मौजूद है। यह मर्ज उम्र बढ़ने के साथ होता है। 60 वर्ष के बाद अक्सर लोगों में होता है।

जीएमसीएच 16 क्या है इलाज

जीएमसीएच 16 में ग्लूकोमा के लिए हफ्ते में एक बार स्पेशल क्लीनिक आयोजित किया जाता है। यह क्लीनिक बुधवार को सुबह 12 बजे से दो बजे तक चलता है।

क्या कहते हैं डॉक्टर

Glaucoma- Eye Problem
ग्लूकोमा को आप साइलेंट किलर भी कह सकते हैं। यह मर्ज छुपकर वार करता है। इसकी सबसे बड़ी विडंबना यही है कि इसके बारे में मरीजों को पता नहीं चलता। यदि थोड़ा चौकस रहे तो वक्त रहते मर्ज को न सिर्फ पकड़ा जा सकता बल्कि बढ़ने से रोका जा सकता है।
डाक्टर एसएस पांडव, प्रोफेसर व ग्लूकोमा विशेषज्ञ पीजीआई (एईसी)

ग्लूकोमा बहुत ही गंभीर बीमारी है। जागरूकता की कमी के कारण यह लोगों को बहुत तेजी से शिकार बना रहा है। इस बारे में बहुत ज्यादा अवेयरनेस की जरूरत है। मैं तो यही कहूंगा कि इसका जितनी जल्दी इलाज, उसका उतना जल्दी निदान है।
सुनंदन सूद, एचओडी आई विभाग, जीएमसीएच 32
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