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Hindi News ›   Chandigarh ›   Glaucoma Awareness Walk on 9 March

ग्लूकोमा से जुड़ी जानकारियां चाहिएं तो आज आएं माउंट व्यू

Sun, 09 Mar 2014 08:29 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Sun, 09 Mar 2014 08:29 AM IST
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Glaucoma Awareness Walk on 9 March
शहरवासियों को जागरूक करने के लिए पीजीआई नौ से 15 मार्च तक 'ग्लूकोमा वीक' मना रहा है। नौ मार्च को रॉक गार्डन से लेकर सुखना लेक तक एक ग्लूकोमा वॉक होगा। यहां पर बीट इन्विजिबल ग्लूकोमा कैम्पेन लांच किया जाएगा।
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उसके बाद उसी दिन होटल माउंटव्यू में एक अवेयरनेस कैंप लगाया गया है। शनिवार को सेक्टर 17 के प्लाजा में एक स्ट्रीट प्ले का आयोजन भी होगा। इसमें ग्लूकोमा से पीड़ित लोगों का जीवन कैसा होता है, उसके बारे में विस्तार से बताया जाएगा।
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ग्लूकोमा के आधे से ज्यादा मरीज इलाज के दौरान ही दवा छोड़ देते हैं। इससे बीमारी को कंट्रोल करने के बजाए यह बढ़ जाती है।

पीजीआई के विशेषज्ञों का कहना है कि लोगों को इस बीमारी के बारे में पता नहीं चलता और जब डाक्टर उन्हें दवा डालने के बारे में बताता है तो वे इतने गंभीर नहीं होते।
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ग्लूकोमा की बीमारी का पता चलते ही इसकी दवा ताउम्र तक चलती है, लेकिन कई लोग बीच में ही दवा का इस्तेमाल करना छोड़ देते हैं। इसका असर उनकी बीमारी पर पड़ता है। ऐसे लोगों की संख्या बढ़ती जा रही है।

यदि लोगों को पता चल जाए कि वे ग्लूकोमा से पीड़ित हैं तो वे इसका रेगुलर इलाज करवाएं और बीच में दवा न छोड़े। लोगों को ग्लूकोमा के प्रति जागरूक करने के लिए पीजीआई की ओर से ग्लूकोमा वीक मनाया जा रहा है। इसमें विभिन्न प्रकार के कार्यक्रम आयोजित होंगे।

बच्चों में भी ग्लूकोमा के काफी केस
पीजीआई के डाक्टर सुष्मिता कौशिक ने बताया कि बच्चों में भी ग्लूकोमा के काफी केस आ रहे हैं। हर महीने दस नए बच्चे पीजीआई में रजिस्टर्ड हो रहे हैं। डा. कौशिक के मुताबिक बच्चों में ग्लूकोमा के दो कारण हैं।

पहला जेनेटिक व दूसरा चोट लगना। उन्होंने बताया कि सबसे ज्यादा चोट बच्चों को चश्मा टूटने से लगती है। यहां पर बच्चे कांच के ग्लास का ही चश्मा पहनते हैं, जबकि विदेशों में पूरी तरह से रोक है। उन्होंने बताया कि यहां पर माता पिता को जागरूक करना चाहिए कि वे अपने बच्चों को कांच के ग्लास का चश्मा न पहनाएं।


स्टेरायड से बढ़ रहे ग्लूकोमा के मरीज
डा. एसएस पांडव के मुताबिक ग्लूकोमा का एक प्रमुख कारण लंबे समय से स्टेराइड लेना है। उन्होंने बताया कि आंखों में जब भी कुछ प्राब्लम आती है तो अक्सर डाक्टर उन्हें स्टेराइड लेने की सलाह देते हैं।

इसके अलावा जब आर्थराइटिस की प्राब्लम आती है तब भी लोग स्टेराइड लेते हैं। इससे ग्लूकोमा के चांस बढ़ जाते हैं। लोगों को इसके प्रति जागरूक रहना चाहिए।
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