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Chandigarh News: पांच साल तक बच्चे को दीजिए संपूर्ण आहार, दिमाग का होगा समुचित विकास
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चंडीगढ़। जन्म से पांच साल के बीच बच्चे के दिमाग का संपूर्ण विकास होता है। इस दौरान बच्चे को संपूर्ण पोषक आहार दीजिए क्योंकि पोषण आहार की कमी से दिमाग का विकास अवरुद्ध हो जाता है। ऐसे बच्चों में आईक्यू लेवल का कम होना, मेमोरी लॉस के साथ युवावस्था में पार्किंसन और अल्जाइमर जैसी समस्या होने का खतरा बढ़ जाता है। यह बातें पीजीआई के न्यूरोलॉजिस्ट डॉ. कार्तिक विनय महेश ने शनिवार को राष्ट्रीय पोषण माह पर आयोजित सम्मेलन में दी। उन्होंने बताया कि पांच साल के बाद बच्चों को दिए जाने वाले पोषक तत्वों का दिमाग के विकास में ज्यादा योगदान नहीं होता। वहीं गर्भावस्था के दौरान महिलाओं को आयोडीन और बी 12 लेना चाहिए क्योंकि बी 12 का सीधा संबंध दिमाग के विकास से है। यह बात शोध में भी साबित हो चुकी है। वहीं, जो महिलाएं मिर्गी की दवा ले रही हों, उन्हें गर्भावस्था के दौरान डॉक्टर की सलाह से बचाव के उपाय के साथ संतुलित आहार पर ध्यान देना चाहिए अन्यथा उनके बच्चे में न्यूरल ट्यूब डिफेक्ट की समस्या हो सकती है।
ऑर्टिफिशियल स्वीटनर एस्पार्टेम कैंसर का कारण
राष्ट्रीय पोषण माह पर आयोजित सम्मेलन में हेमेटो-ऑन्कोलॉजी यूनिट प्रमुख प्रो. पंकज मल्होत्रा ने बताया कि ऑर्टिफिशियल स्वीटनर एस्पार्टेम कैंसर का कारण बन सकते हैं, इसलिए इसका उपयोग न करें। उन्होंने बताया कि एस्पार्टेम सबसे व्यापक रूप से उपयोग किए जाने वाले स्वीटनर्स में से एक है। इसका उपयोग लो कैलोरी वाले फूड्स और ड्रिंक्स में किया जाता है लेकिन इसमें रेगुलर शुगर की तरह ही कैलोरी होती है। एस्पार्टेम का उपयोग डायटरी सोडा, शुगर-फ्री डेजर्ट, शुगर-फ्री च्युइंग गम और अन्य फूड्स में किया जाता है जिसे आमतौर पर शुगर-फ्री या शून्य शुगर के रूप में लेबल किया जाता है। एस्पार्टेम रेगुलर शुगर की तुलना में 200 गुना अधिक मीठा होता है।
गट ब्रेन एक्सेस भी बचाता है बीमारी से
कार्यक्रम में शामिल चीफ डायटीशियन डॉ. नैंसी साहनी ने बताया कि जिस रफ्तार से युवाओं में दिमाग संबंधी विकार तेजी से बढ़ रहे हैं, उससे बचाव के लिए आहार पर फोकस होना जरूरी है इसलिए पोषण माह के अंतर्गत पोषण और मस्तिष्क स्वास्थ्य पर ध्यान देने की जरूरत है। डॉ. नैंसी ने बताया कि गट ब्रेन एक्सेस भी हमें बीमारियों से बचाती है। इसकी भूमिका आंत के कार्यों की निगरानी और एकीकरण करना है। इसके साथ मस्तिष्क के भावनात्मक और संज्ञानात्मक केंद्रों को शरीर के अन्य महत्वपूर्ण तंत्रों से जोड़ना है। इसे इस उदाहरण से समझा जा सकता है कि जब इंटरव्यू देना होता है तो तनाव के कारण किसी को डायरिया हो जाता है तो किसी को पेट दर्द। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि दिमाग का गट से सीधा जुड़ाव है। गट में बहुत सारे माइक्रोब्स हाेते हैं, जो पोषण मिलने से सही काम करते हैं।
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इस कार्यक्रम में निदेशक प्रो. विवेक लाल मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद थे। इसके अलावा चिकित्सा अधीक्षक प्रो. विपिन कौशल, प्रो. मनीष मोदी समेत आहार विज्ञान विभाग के विशेषज्ञ, न्यूरोलॉजिस्ट व आहार विज्ञान के छात्र-छात्राएं मौजूद रहीं।
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ऑर्टिफिशियल स्वीटनर एस्पार्टेम कैंसर का कारण
राष्ट्रीय पोषण माह पर आयोजित सम्मेलन में हेमेटो-ऑन्कोलॉजी यूनिट प्रमुख प्रो. पंकज मल्होत्रा ने बताया कि ऑर्टिफिशियल स्वीटनर एस्पार्टेम कैंसर का कारण बन सकते हैं, इसलिए इसका उपयोग न करें। उन्होंने बताया कि एस्पार्टेम सबसे व्यापक रूप से उपयोग किए जाने वाले स्वीटनर्स में से एक है। इसका उपयोग लो कैलोरी वाले फूड्स और ड्रिंक्स में किया जाता है लेकिन इसमें रेगुलर शुगर की तरह ही कैलोरी होती है। एस्पार्टेम का उपयोग डायटरी सोडा, शुगर-फ्री डेजर्ट, शुगर-फ्री च्युइंग गम और अन्य फूड्स में किया जाता है जिसे आमतौर पर शुगर-फ्री या शून्य शुगर के रूप में लेबल किया जाता है। एस्पार्टेम रेगुलर शुगर की तुलना में 200 गुना अधिक मीठा होता है।
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गट ब्रेन एक्सेस भी बचाता है बीमारी से
कार्यक्रम में शामिल चीफ डायटीशियन डॉ. नैंसी साहनी ने बताया कि जिस रफ्तार से युवाओं में दिमाग संबंधी विकार तेजी से बढ़ रहे हैं, उससे बचाव के लिए आहार पर फोकस होना जरूरी है इसलिए पोषण माह के अंतर्गत पोषण और मस्तिष्क स्वास्थ्य पर ध्यान देने की जरूरत है। डॉ. नैंसी ने बताया कि गट ब्रेन एक्सेस भी हमें बीमारियों से बचाती है। इसकी भूमिका आंत के कार्यों की निगरानी और एकीकरण करना है। इसके साथ मस्तिष्क के भावनात्मक और संज्ञानात्मक केंद्रों को शरीर के अन्य महत्वपूर्ण तंत्रों से जोड़ना है। इसे इस उदाहरण से समझा जा सकता है कि जब इंटरव्यू देना होता है तो तनाव के कारण किसी को डायरिया हो जाता है तो किसी को पेट दर्द। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि दिमाग का गट से सीधा जुड़ाव है। गट में बहुत सारे माइक्रोब्स हाेते हैं, जो पोषण मिलने से सही काम करते हैं।
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इस कार्यक्रम में निदेशक प्रो. विवेक लाल मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद थे। इसके अलावा चिकित्सा अधीक्षक प्रो. विपिन कौशल, प्रो. मनीष मोदी समेत आहार विज्ञान विभाग के विशेषज्ञ, न्यूरोलॉजिस्ट व आहार विज्ञान के छात्र-छात्राएं मौजूद रहीं।