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ड्राइविंग करते हुए हेलमेट न पहनना पड़े, इसके लिए लड़कियों ने किया ऐसा काम, देखते रह गए सब
नीरज कुमार, अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Sat, 11 Aug 2018 12:01 PM IST
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दस्तार बांधना
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सिख परिवारों ने हेलमेट पहनने से बचने के लिए दस्तार का सहारा लेना शुरू कर दिया है। दस्तार बांधने के लिए बाकायदा प्रशिक्षण लिया जा रहा है। बच्चे, युवा, कॉलेज गोइंग युवक-युवतियां और महिलाएं दस्तार बांधने (केसगी) के लिए गुरुद्वारा साहिब में पहुंच रहे हैं। हेलमेट जरूरी होने के आदेश के बाद महिलाओं और युवतियों ने सिर पर चुन्नी की बजाय दस्तार बांधना शुरू कर दिया है।
सेक्टर-34 स्थित गुरुद्वारा श्री गुरु तेग बहादुर साहिब में महिलाओं को दस्तार बांधना सिखाया जा रहा है। इसे बांधने में 20 से 30 मिनट लगता है। दस्तारबंदी दो से तीन दिन में सीखा जा सकता है। इसके बाद लगातार प्रैक्टिस कर इसमें निखार लाया जा सकता है। गुरदासपुर से प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी के लिए आई सतिंदर और अमनदीप कौर ने बताया कि दस्तार बांधना सीख लिया है। पहले वह दस्तार नहीं बांधती थीं। इससे परिवार भी खुश है। एक दो दिन परेशानी हुई, लेकिन फिर सब ठीक हो गया।
मां-बेटा सिखाते हैं पग बांधना
सेक्टर-33 निवासी हरजीत कौर और उनका आईटी प्रोफेशनल बेटा जबीज सिंह दस्तारबंदी सिखाते हैं। इस काम में उनके पति भी सहयोग करते हैं। हरजीत ने कहा कि महिलाएं गोल और वी शेप में दस्तार (केसगी) बांधती हैं। हमारे गुरुओं ने कहा है कि सिर ढक कर रखो। इसमें रूप नहीं स्वरूप नजर आता है। वे गुरुद्वारा साहिब में मुफ्त सेवा करती हैं।
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सबसे पहले दस्तार बांधने के लिए बेस बनाते हैं। इसमें करीब दो मीटर का कपड़ा होता है। इसके बाद चार से पांच मीटर तक का कपड़ा लगता है। मलमल का कपड़ा आरामदायक होता है। कंवलजीत कौर निवासी सेक्टर-46 ने कहा कि उन्होंने पहली बार 2012 में दस्तार बांधना सीखा था। अब महिलाओं को केसगी सिखाती हैं।
हेलमेट से भी बचाव होगा
हरजीत कौर कहती हैं कि केसगी से महिलाओं को हेलमेट नहीं पहनना पड़ेगा। बालों को कलर करने की भी जरूरत नहीं पड़ेगी, सिर ढंका रहता है और कंघे की भी संभाल हो जाती है। गृहिणी कुलदीप कौर ने कहा कि जब हेलमेट पहनने का आदेश जारी हुआ तो उन्होंने गुरुद्वारा साहिब में जाकर दस्तार बांधना सीख लिया।
गुरुद्वारा साहिब में महिलाओं और बच्चों को दस्तार बांधने का प्रशिक्षण दिया जाता है। जिसे भी दस्तार बांधना हो वह सीख सकता है। दस्तार भी गुरुद्वारा साहिब से मुफ्त में दिया जाता है। सिख धर्म में टोपी लगाने की मनाही है। दस्तार टोपी नहीं है। इसे बांधने और खोलने में एक-एक लड़ का सहारा लिया जाता है।
- साधु सिंह, प्रधान, गुरुद्वारा श्री गुरु तेग बहादुर साहिब, सेक्टर-34 चंडीगढ़
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सेक्टर-34 स्थित गुरुद्वारा श्री गुरु तेग बहादुर साहिब में महिलाओं को दस्तार बांधना सिखाया जा रहा है। इसे बांधने में 20 से 30 मिनट लगता है। दस्तारबंदी दो से तीन दिन में सीखा जा सकता है। इसके बाद लगातार प्रैक्टिस कर इसमें निखार लाया जा सकता है। गुरदासपुर से प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी के लिए आई सतिंदर और अमनदीप कौर ने बताया कि दस्तार बांधना सीख लिया है। पहले वह दस्तार नहीं बांधती थीं। इससे परिवार भी खुश है। एक दो दिन परेशानी हुई, लेकिन फिर सब ठीक हो गया।
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मां-बेटा सिखाते हैं पग बांधना
सेक्टर-33 निवासी हरजीत कौर और उनका आईटी प्रोफेशनल बेटा जबीज सिंह दस्तारबंदी सिखाते हैं। इस काम में उनके पति भी सहयोग करते हैं। हरजीत ने कहा कि महिलाएं गोल और वी शेप में दस्तार (केसगी) बांधती हैं। हमारे गुरुओं ने कहा है कि सिर ढक कर रखो। इसमें रूप नहीं स्वरूप नजर आता है। वे गुरुद्वारा साहिब में मुफ्त सेवा करती हैं।
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सबसे पहले दस्तार बांधने के लिए बेस बनाते हैं। इसमें करीब दो मीटर का कपड़ा होता है। इसके बाद चार से पांच मीटर तक का कपड़ा लगता है। मलमल का कपड़ा आरामदायक होता है। कंवलजीत कौर निवासी सेक्टर-46 ने कहा कि उन्होंने पहली बार 2012 में दस्तार बांधना सीखा था। अब महिलाओं को केसगी सिखाती हैं।
हेलमेट से भी बचाव होगा
हरजीत कौर कहती हैं कि केसगी से महिलाओं को हेलमेट नहीं पहनना पड़ेगा। बालों को कलर करने की भी जरूरत नहीं पड़ेगी, सिर ढंका रहता है और कंघे की भी संभाल हो जाती है। गृहिणी कुलदीप कौर ने कहा कि जब हेलमेट पहनने का आदेश जारी हुआ तो उन्होंने गुरुद्वारा साहिब में जाकर दस्तार बांधना सीख लिया।
गुरुद्वारा साहिब में महिलाओं और बच्चों को दस्तार बांधने का प्रशिक्षण दिया जाता है। जिसे भी दस्तार बांधना हो वह सीख सकता है। दस्तार भी गुरुद्वारा साहिब से मुफ्त में दिया जाता है। सिख धर्म में टोपी लगाने की मनाही है। दस्तार टोपी नहीं है। इसे बांधने और खोलने में एक-एक लड़ का सहारा लिया जाता है।
- साधु सिंह, प्रधान, गुरुद्वारा श्री गुरु तेग बहादुर साहिब, सेक्टर-34 चंडीगढ़