फिक्र न करें, आधार बगैर भी मिलेगी सब्सिडी
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आपको घरेलू गैस के लिए डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर स्कीम के लिए आधार कार्ड की आवश्यकता नहीं है। यह काम बैंक का खाता ही कर देगा।
डीबीटीएल के अंतर्गत जितने उपभोक्ता इस स्कीम में शामिल हो रहे हैं, उनको सभी घरेलू एलपीजी सिलेंडर (छूट-प्राप्त एवं गैर छूट-प्राप्त दोनों) बाजार कीमत पर मिलेंगे। प्रत्येक घरेलू सिलेंडर पर सब्सिडी की राशि उनके बैंक खाते में स्थानांतरित कर दी जाएगी। चंडीगढ़ में इस स्कीम की शुरुआत 1 जनवरी 2015 से हो रही है।
आईओसी के एक अधिकारी के अनुसार अब तक इस स्कीम के लिए सिटी में साठ फीसदी उपभोक्ता रजिस्टर हो चुके हैं जबकि पचास फीसदी उपभोक्ता बैंक के साथ रजिस्टर हैं।
इस स्कीम के लिए जिस उपभोक्ता ने 1 जनवरी 2015 से पहले खुद को रजिस्टर नहीं करवाया उनको स्कीम लागू होने के बाद तीन महीने तक (31 मार्च 2015 तक) सब्सिडी वाले सिलेंडर मिलते रहेंगे। जबकि जिन लोगों ने अपने आधार नंबर या बैंक खाते लिंक कर दिए हैं, वह बाजार मूल्य पर एलपीजी सिलिंडर खरीदेंगे तो सब्सिडी उनके बैंक खाते में स्थानांतरित कर दी जाएगी।
1 अप्रैल 2015 से सभी उपभोक्ताओं के लिए सिलिंडर सिर्फ बाजार मूल्य पर उपलब्ध होंगे। इसके बाद जिन लोगों ने आधार नंबर या बैंक खाते को लिंक नहीं कराया है उनकी सब्सिडी राशि ‘पार्क’ कर दी जाएगी। यह तभी स्थानांतरित होगी जब वह 30 जून 2015 तक अपने आधार/बैंक खाते को लिंक करा देंगे।
एलपीजी उपभोक्ताओं को 3 माह ग्रेस पीरियड
डीबीटीएल की लॉन्च की तारीख से तीन माह ग्रेस पीरियड सभी एलपीजी उपभोक्ताओं को दिया जाएगा। जो लोग इस स्कीम में शामिल नहीं हुए उन्हें इस अवधि के दौरान छूट-प्राप्त सिलिंडर मिलते रहेंगे।
ग्रेस पीरियड समाप्त होने के बाद ऐसे ग्राहकों को तीन महीने का अतिरिक्त ‘पार्किंग पीरियड’ दिया जाएगा। इस अवधि में स्कीम में शामिल होने पर छूट की राशि उनके खातों में स्थानांतरित कर दी जाएगी। जिन उपभोक्ताओं के पास आधार कार्ड हैं वे अपने वितरक एवं बैंक के पास जा कर अपने आधार नंबर को लिंक करा सकते हैं। बैंक खाता भी एलपीजी वितरक के पास लिंक कराया जा सकता है।
उपभोक्ताओं की मदद के लिए तेल विपणन कंपनियों (ओएमसी) को ‘पहल फीडिंग केन्द्र’ स्थापित करने का प्रस्ताव भी है। चंडीगढ़ में एक घरेलू गैस सप्लाई करने वाली कंपनी के प्रतिनिधि के अनुसार अब तक ऐसा कोई आदेश मंत्रालय से नहीं है।