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Chandigarh News: 13 हजार घरों तक पहुंचेगी गैस की पाइपलाइन, प्रशासन ने अदाणी गैस के साथ किया समझौता
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चंडीगढ़। अब एलपीजी सिलिंडर की तुलना में पाइप्ड नेचुरल गैस (पीएनजी) की मांग काफी बढ़ गई है। यह गैस सिलिंडर की तुलना में काफी सस्ती और सुरक्षित है। यही वजह है कि यूटी प्रशासन ने शहर के 13 हजार सरकारी घरों तक पीएनजी पहुंचाने का फैसला लिया है। इसके तहत रसोई गैस के लिए सिलिंडर मंगवाने की आवश्यकता नहीं होगी, बल्कि घर के मुहाने तक ही यह पाइप लाइन होगी, जिससे घरों में गैस उपलब्ध हो सकेगा।प्रशासन ने सरकारी घरों में पीएनजी की आपूर्ति के लिए इंडियन ऑयल अदाणी गैस प्राइवेट लिमिटेड (आईओसी-अदाणी) के साथ समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए हैं। प्रशासन के एक अधिकारी ने बताया कि शहर में सरकारी करीब 13 हजार सरकारी मकान हैं। इन घरों में चरणबद्ध तरीके से कंपनी पीएनजी की आपूर्ति के लिए पाइप लाइन बिछाएगी। कंपनी के पहले चरण में सात से आठ हजार घरों को कवर करने की संभावना है। पहले चरण में सेक्टर-7, 11, 22 और 23 के घरों को शॉर्टलिस्ट किया गया है। प्रशासन नेटवर्क इंस्टॉलेशन के लिए प्रति मकान एक निश्चित सिक्योरिटी राशि कंपनी के पास जमा कराएगा, जबकि जिस व्यक्ति को मकान आवंटित किया जाएगा, उसे मासिक शुल्क देना होगा। पीएनजी का फायदा यह होता है कि इसकी सप्लाई निर्बाध होती है। बारिश, धूप, हवा इनका कुकिंग गैस की सप्लाई पर कोई फर्क नहीं पड़ता। ये पाइप के जरिए सातों दिन 24 घंटे घर में आती रहती है। बता दें कि शहर के धनास स्थित अन्य इलाकों के स्मॉल फ्लैट में वर्ष 2018-19 से ही पाइपलाइन से गैस की सप्लाई हो रही है।
हर दो महीने में आएगा बिल
सभी पीएनजी कनेक्शनों के साथ एक गैस मीटर लगाया जाएगा। बिजली के बिल की तरह ही हर दो महीने में लोगों को बिल आएगा। पीएनजी बिलिंग के तहत मीटर रीडर कंज्यूमर के घर से हर 2 महीने में एक बार रीडिंग लेगा। इसके अलावा सेल्फ बिलिंग की भी सुविधा उपलब्ध होती है। गैस का बिल एससीएम (स्टैंडर्ड क्यूबिक मीटर) के आधार पर तैयार किया जाता है। एससीएम से बिल की अमाउंट का निर्धारण होता है। एससीएम की दरें हर दो महीने में बदलती रहती हैं। एससीएम के डिजिट मीटर में दिखाई देते हैं। इन नंबरों के आधार पर बिल की गणना होती है।
विकल्प होगा, लगवाना या न लगवाना आवंटी की मर्जी
निवासियों को इंस्टॉलेशन के लिए लगभग 100 रुपये और उपयोग शुल्क का भुगतान करना होगा। निवासियों के लिए कनेक्शन लगवाना अनिवार्य नहीं होगा लेकिन यह विकल्प सभी घरों में उपलब्ध होगा। बता दें कि पीएनजी का प्रयोग डोमेस्टिक, इंडस्ट्री और कॉमर्शियल कारणों के लिए किया जाता है। सीएनजी की तुलना में पीएनजी अधिक सुरक्षित है। इससे घरों में गैस लीकेज होने पर भी आग लगने आशंका कम रहती है और गैस खत्म होने की चिंता भी नहीं करनी पड़ती। जैसे बिजली का मीटर लगा होता है वैसे ही पीएनजी का भी मीटर लगता है, इसलिए धोखाधड़ी की आशंका भी बहुत कम है।
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हर दो महीने में आएगा बिल
सभी पीएनजी कनेक्शनों के साथ एक गैस मीटर लगाया जाएगा। बिजली के बिल की तरह ही हर दो महीने में लोगों को बिल आएगा। पीएनजी बिलिंग के तहत मीटर रीडर कंज्यूमर के घर से हर 2 महीने में एक बार रीडिंग लेगा। इसके अलावा सेल्फ बिलिंग की भी सुविधा उपलब्ध होती है। गैस का बिल एससीएम (स्टैंडर्ड क्यूबिक मीटर) के आधार पर तैयार किया जाता है। एससीएम से बिल की अमाउंट का निर्धारण होता है। एससीएम की दरें हर दो महीने में बदलती रहती हैं। एससीएम के डिजिट मीटर में दिखाई देते हैं। इन नंबरों के आधार पर बिल की गणना होती है।
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विकल्प होगा, लगवाना या न लगवाना आवंटी की मर्जी
निवासियों को इंस्टॉलेशन के लिए लगभग 100 रुपये और उपयोग शुल्क का भुगतान करना होगा। निवासियों के लिए कनेक्शन लगवाना अनिवार्य नहीं होगा लेकिन यह विकल्प सभी घरों में उपलब्ध होगा। बता दें कि पीएनजी का प्रयोग डोमेस्टिक, इंडस्ट्री और कॉमर्शियल कारणों के लिए किया जाता है। सीएनजी की तुलना में पीएनजी अधिक सुरक्षित है। इससे घरों में गैस लीकेज होने पर भी आग लगने आशंका कम रहती है और गैस खत्म होने की चिंता भी नहीं करनी पड़ती। जैसे बिजली का मीटर लगा होता है वैसे ही पीएनजी का भी मीटर लगता है, इसलिए धोखाधड़ी की आशंका भी बहुत कम है।
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