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ईवी व 5जी को मिलेगी रफ्तार: देश में ही बनेगा गैलियम नाइट्रेट सेमीकंडक्टर, डीआरडीओ और आईआईएससी ने शुरू किया काम

Wed, 23 Nov 2022 09:09 AM IST
निवेदिता वर्मा नवदीप मिश्रा, अमर उजाला, चंडीगढ़
नवदीप मिश्रा, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: निवेदिता वर्मा Updated Wed, 23 Nov 2022 09:09 AM IST
सार

बाजार में चार इंच के गैलियम नाइट्रेट सेमीकंडक्टर की कीमत 6 से 10 लाख रुपये तक है। जितनी हाई फ्रिक्वेंसी पर डिवाइस को काम करना है उतने ही सेमीकंडक्टर का उपयोग किया जाता है। 40 गीगा हर्ट्ज पावर की बैटरी के लिए भी इसी सेमीकंडक्टर का सहारा लेना पड़ता है।

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Gallium nitrate semiconductor will soon be manufactured in India
5G network - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

इलेक्ट्रिक वाहनों को तेजी से चार्ज करने और 5जी नेटवर्क के संचालन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाला गैलियम नाइट्रेट सेमीकंडक्टर जल्द देश में ही निर्मित होगा। देश को आत्मनिर्भर बनाने के लिए डीआरडीओ और बेंगलुरु स्थित इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस ने इस दिशा में काम शुरू कर दिया है। यह जानकारी डीआरडीओ के वैज्ञानिक डीएस रावल और एसके तोमर ने दी। दोनों वैज्ञानिक मंगलवार को पंजाब इंजीनियरिंग कॉलेज में आयोजित एक कार्यक्रम में पहुंचे थे।   
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कार्यक्रम में देशभर से पहुंचे वैज्ञानिकों ने बताया कि तकनीक तेजी से बदल रही है। ऐसे में सेमीकंडक्टर बनाने, उसकी जांच और उसकी विश्वसनीयता की जांच करने की तकनीक का ज्ञान होना बहुत जरूरी है। बताया कि सभी रडार, हाई पॉवर डिवाइस, सेटेलाइट में गैलियम नाइट्रेट सेमीकंडक्टर का उपयोग होता है। 5जी नेटवर्क के संचालन या इलेक्ट्रानिक व्हीकल को तेजी से चार्ज करने के लिए भी इसी सेमीकंडक्टर का प्रयोग किया जाता है। वर्तमान में इसे यूएसए और चीन से आयात किया जा रहा है लेकिन अब इसे देश में ही तैयार किया जाएगा। 
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कीमत 6 से 10 लाख, अगले तीन साल में आत्मनिर्भर बनने की तैयारी 
वैज्ञानिकों ने बताया कि बाजार में चार इंच के गैलियम नाइट्रेट सेमीकंडक्टर की कीमत 6 से 10 लाख रुपये तक है। जितनी हाई फ्रिक्वेंसी पर डिवाइस को काम करना है उतने ही सेमीकंडक्टर का उपयोग किया जाता है। 40 गीगा हर्ट्ज पावर की बैटरी के लिए भी इसी सेमीकंडक्टर का सहारा लेना पड़ता है। डीआरडीओ के साथ ही इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस ने बाहर से कुछ मशीनें मंगवाईं हैं जिन पर तेजी से काम हो रहा है। अगले लगभग तीन सालों में देश को इस क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने का लक्ष्य है।
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पेक में देशभर के संस्थानों से 38 विशेषज्ञ ले रहे हैं प्रशिक्षण 
पेक के एसोसिएट प्रोफेसर प्रो. अरुण कुमार सिंह ने कहा कि संस्थान में स्थापित सेमीकंडक्टर रिसर्च सेंटर को सैद्धांतिक व व्यावहारिक अनुभव के आधार पर डिजाइन किया गया है। यहां प्रशिक्षण के लिए देशभर के विभिन्न आईआईटी, एनआईआईडी, शोध संस्थानों से 70 से अधिक आवेदन आए थे। इनमें से 38 आवेदन स्वीकार किए गए हैं। इन लोगों को 7 दिनों में सेमीकंडक्टर बनाने, जांचने और उनकी गुणवत्ता को परखने का व्यवहारिक और प्रायोगिक ज्ञान दिया जाएगा।


क्या होती है सेमीकंडक्टर
सेमीकंडक्टर एक खास तरह की चिप होती है। इसमें विद्युत के सुचालक और कुचालक के गुण होते हैं। ये विद्युत के प्रवाह को नियंत्रित करती है। इसका निर्माण सिलिकॉन से होता है। कई हाईटेक उपकरणों में इस चिप को इंस्टॉल किया जाता है। सेमीकंडक्टर चिप के जरिए ही डाटा की प्रोसेसिंग होती है। इस कारण इसको इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस का दिमाग भी कहा जाता है।  
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