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Chandigarh: अब बिना कीमो-रेडिएशन के हो सकेगा गॉल ब्लडर कैंसर का इलाज, इस तकनीक से मिटेगी परेशानी

Thu, 13 Apr 2023 03:57 PM IST
निवेदिता वर्मा वीणा तिवारी, अमर उजाला, चंडीगढ़
वीणा तिवारी, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: निवेदिता वर्मा Updated Thu, 13 Apr 2023 03:57 PM IST
सार

पित्ताशय की थैली में हुई कैंसर कोशिकाओं की असामान्य वृद्धि को पित्त का कैंसर या पित्ताशय का कैंसर कहा जाता है। पित्त का कैंसर काफी दुर्लभ है, क्योंकि इसकी पहचान कर पाना काफी मुश्किल होता है। जब पित्ताशय की थैली के कैंसर का पता उसके शुरुआती चरणों में लगाया जाता है, तो इलाज की संभावना बहुत अच्छी होती है।

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Gallbladder cancer can be cured even without chemo and radiation therapy, PGI Research
cancer - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

अब बिना कीमो और रेडिएशन थेरेपी के भी गॉल ब्लैडर के कैंसर का इलाज हो सकेगा। पीजीआई के विशेषज्ञों ने हाई वोल्टेज करंट देकर इस मर्ज के इलाज की नई तकनीक ढूंढ ली है। इस तकनीक से मौजूदा समय में इस कैंसर से पीड़ित 11 मरीजों पर सफल परीक्षण किया जा चुका है। पीजीआई के रेडियोडायग्नोसिस विभाग के प्रोफेसर नवीन कालरा इस तकनीक के प्रमुख अन्वेषणकर्ता हैं।

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उन्होंने बताया कि इस तकनीक में अपरिवर्तनीय विद्युतीकरण प्रक्रिया ( इरिवर्सिबल इलेक्ट्रोपोरेशन ) से मरीज के पित्त की थैली में हुए ट्यूमर में सुई डालकर 3000 वोल्ट का करंट पास किया जाता है। इससे ट्यूमर सेल के मेंब्रेन ध्वस्त हो जाते हैं और शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता उन संक्रमित सेल को खत्म करने लगती है। इस तकनीक से कैंसर के इलाज में मरीज के अन्य स्वस्थ सेल पर कोई दुष्प्रभाव नहीं पड़ रहा। इस प्रक्रिया के दौरान मरीज को माइक्रो सेकंड के लिए करंट दिया जाता है। उस दौरान उसकी ईसीजी लगातार चलती रहती है ताकि उस करंट से हृदय पर आने वाले दुष्प्रभाव की जानकारी मिलती रहे।

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केंद्र सरकार की विशेष योजना पर चल रहा शोध
प्रो. नवीन ने बताया कि दो साल के प्रोजेक्ट में ऐसे 30 मरीजों पर इस तकनीक का प्रयोग किया जा रहा है। इलाज निशुल्क होगा। इनमें से 15 मरीज पंजीकृत किए जा चुके हैं और ग्यारह पर तकनीक सफल साबित हो चुकी है। इसमें सरकार की तरफ से आर्थिक सहयोग प्राप्त हो रहा है।

प्रो. नवीन ने बताया कि इस मर्ज से ग्रस्त मरीज पीजीआई के रेडियोडायग्नोसिस विभाग के कमरा नंबर-31 में संचालित आईआर क्लीनिक में सोमवार से शनिवार के बीच कभी भी आकर परामर्श ले सकते हैं। अगर उनमें इस तकनीक के प्रयोग की संभावना नजर आई तो उन्हें इस योजना के अंतर्गत शामिल कर निशुल्क इलाज किया जाएगा। मौजूदा समय में पीजीआई के सर्जरी विभाग से ऐसे मरीजों को आईआर क्लीनिक में रेफर किया जा रहा है।

इसलिए गंभीर है ये कैंसर
पित्ताशय की थैली में हुई कैंसर कोशिकाओं की असामान्य वृद्धि को पित्त का कैंसर या पित्ताशय का कैंसर कहा जाता है। पित्त का कैंसर काफी दुर्लभ है, क्योंकि इसकी पहचान कर पाना काफी मुश्किल होता है। जब पित्ताशय की थैली के कैंसर का पता उसके शुरुआती चरणों में लगाया जाता है, तो इलाज की संभावना बहुत अच्छी होती है। लेकिन अधिकांश पित्ताशय की थैली के कैंसर का पता देर से चलता है, जब तक कैंसर की पहचान की जाती है, तब तक स्थिति काफी खराब हो चुकी होती है।

लक्षणों पर करें गौर
  • पीलिया
  • पेट में ऊपर दर्द।
  • बुखार
  • मतली और उल्टी
  • सूजन
  • पेट की गांठें और कमजोरी
ये कारण हो सकते हैं जिम्मेदार
  • पित्त नलिकाओं में असामान्यताएं
  • क्रोनिक गॉलब्लैडर इंफ्लामेशन
  • पोर्सिलेन गॉलब्लैडर
  • रबर और कपड़ा उद्योगों के संपर्क में अधिक आना
  • नाइट्रोसमिन के संपर्क में
  • मोटापा
  • ज्यादा उम्र
  • धूम्रपान और शराब का सेवन
  • अनुवांशिकता के कारण भी कैंसर हो सकता है
  • टाइफाइड, साल्मोनेला बैक्टीरिया की वजह से भी इस कैंसर की संभावना
इन्हें खतरा ज्यादा
  • महिलाओं को पुरुषों के मुकाबले अधिक खतरा
  • अग्न्याशय और पित्त वाहिका की असामान्यताएं
  • शुगर मरीजों को
  • संक्रमण फैलना
  • शराब का सेवन करना
  • पित्त की पथरी और सूजन
  • प्राइमरी स्केलेरोसिंग कोलिन्जाइटिस
कैसे करें बचाव
  • नियमित रूप से एक्सरसाइज करना
  • वजन का संतुलित रखना
  • डॉक्टर से नियमित चेकअप कराना
  • फल और सब्जियों का सेवन करना
  • अधिक पानी पीना
  • स्वस्थ आहार खाना
  • धूम्रपान से दूर रहना

कैंसर के मरीजों की डाइग्नोसिस और इलाज की प्रक्रिया को और ज्यादा कारगर और आसान बनाने के लिए विभाग के विशेषज्ञ अलग-अलग प्रोजेक्ट पर काम कर रहे हैं। इसका बेहतर परिणाम जल्द ही सामने होगा। - प्रो. एमएस संधु, पीजीआई रेडियोडाइग्नोसिस विभाग के प्रमुख

 
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