फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Chandigarh ›   Fungus are Infecting Trees in Chandigarh

चंडीगढ़ में हरियाली पर संकट: पेड़ों का गला घोंट रहा फंगस, समय पर इलाज न मिला तो और दम तोड़ेंगे

Mon, 03 Jan 2022 03:21 PM IST
निवेदिता वर्मा सुशील कुमार, अमर उजाला, चंडीगढ़
सुशील कुमार, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: निवेदिता वर्मा Updated Mon, 03 Jan 2022 03:21 PM IST
सार

चंडीगढ़ व आसपास के पेड़ों पर पंजाब यूनिवर्सिटी के प्रो. पराशर 30 साल से काम कर रहे हैं। शोध के मुताबिक, मध्य मार्ग, सुखना लेक, रोज गार्डन के आसपास के क्षेत्र, सेक्टर-17, ट्रांसपोर्ट इलाका आदि क्षेत्रों में तमाम पेड़ सूख चुके हैं। 

विज्ञापन
Fungus are Infecting Trees in Chandigarh
चंडीगढ़ में पेड़ों में लगा फंगस। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

चंडीगढ़ की हरियाली पर संकट के बादल छा गए हैं। यहां लगे तमाम पेड़ सूख गए हैं और कई सूखने की कगार पर हैं। हैरानी की बात यह है कि हवा से हवा में ही फंगस रोग तेजी से फैल रहा है जो तीन से चार साल में ही पेड़ का गला घोंट देता है। यह खुलासा पीयू के वनस्पति विज्ञान विभाग के वरिष्ठ प्रो. आईबी पराशर ने अपनी शोध में किया है। 

विज्ञापन


उन्होंने अपनी पुस्तक ‘वुड रूटिंग नॉन गिल्ड एग्रीकोमाइसिट्स ऑफ हिमालयाज’ में भी इस रोग का जिक्र किया है, जिसको पेड़ों के लिए घातक माना है। चंडीगढ़ व आसपास के पेड़ों पर प्रो. पराशर 30 साल से काम कर रहे हैं। शोध के मुताबिक, मध्य मार्ग, सुखना लेक, रोज गार्डन के आसपास के क्षेत्र, सेक्टर-17, ट्रांसपोर्ट इलाका आदि क्षेत्रों में तमाम पेड़ सूख चुके हैं। 

विज्ञापन

तने के निचले हिस्से में लगता है फंगस 

80 फीसदी पेड़ों के सूखने का कारण केवल गैनोडर्मा (फंगस) रोग है। यह जड़ व तने के मिलने वाले स्थान पर लगता है। यह जड़ों के जरिए दूसरे पेड़ों तक जमीन में ही फैल जाता है। फंगस तने के निचले हिस्से में लगता है। ऊपरी हिस्से पर पाउडर की शक्ल में कण होते हैं जो हवा के साथ उड़कर दूसरे पेड़ तक पहुंचते हैं और दूसरे पेड़ के पास नमी पाकर उसके तने पर लग जाते हैं। धीरे-धीरे वह पेड़ को खाने लगते हैं। तने व जड़ के मध्य लगा फंगस पानी को ऊपरी सतह पर जाने से रोकता है। इससे पेड़ पूरी तरह भोजन नहीं बना पाता और सूखने लगता है। तीन से चार साल में पूरा पेड़ सूख जाता है।

विज्ञापन
विज्ञापन

नीला थोथा लगाकर इलाज संभव

इसका एक इलाज यही है कि जहां भी फंगस दिखें उसे पूरी तरह तोड़कर साफ करें और उस जगह पर नीला थोथा लगा दें। इससे काफी हद तक प्रभाव पड़ेगा। रोग पर काबू पाया जा सकेगा। सवाल यह है कि उस मर्ज को देखे कौन? इसके लिए विशेषज्ञों की निगरानी कमेटी बनानी चाहिए जो ऐसे पेड़ों को देखे और उसका इलाज करे। इसके अलावा दीमक भी पेड़ों में लग रही है। उससे भी पेड़ों को नुकसान पहुंच रहा है। उन्होंने कहा है कि पर्यावरण विभाग इस पर जल्द से जल्द ध्यान दे।

काफी समय से पेड़ों पर शोध चल रहा है। मध्य मार्ग, सुखना लेक, सेक्टर-17 आदि क्षेत्रों में 80 फीसदी पेड़ फंगस के कारण सूखे हैं। ऐसे में इलाज जरूरी है अन्यथा हरियाली को बड़ा नुकसान हो सकता है। - प्रो. आईबी पराशर, वनस्पति विज्ञान विभाग, पीयू 

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed