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नशीले पदार्थों, दवाओं और हथियारों की तस्करी रोकने को अटारी बॉर्डर पर लगना था स्कैनर, पर रुक गया काम

Thu, 13 Jun 2019 11:19 AM IST
खुशबू गोयल अशोक नीर/अमर उजाला, अमृतसर(पंजाब)
अशोक नीर/अमर उजाला, अमृतसर(पंजाब) Published by: खुशबू गोयल Updated Thu, 13 Jun 2019 11:19 AM IST
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Full Body Truck Scanner Installation Work on ICP Attari Border Stopped due to Technical Problems
अटारी बॉर्डर के रास्ते व्यापार - फोटो : फाइल फोटो
पाकिस्तान-अफगानिस्तान से आने वाले ट्रकों में छिपाकर लाए जाने वाले नशीले पदार्थों, भारत में प्रतिबंधित दवाओं और हथियारों की तस्करी पर अंकुश लगाने का काम रुक गया है। दरअसल, अटारी सीमा पर स्थित देश की पहली इंटीग्रेटेड चेक पोस्ट (आईसीपी) में लगाएजा रहे फुल-बॉडी ट्रक स्कैनर (एफबीटीएस) का काम तकनीकी खामियों के चलते पूरा नहीं हो सका है।
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पाकिस्तान सीमा से कुछ ही मीटर की दूरी पर इस एफबीटीएस की स्थापना का कार्य 15 मार्च 2018 को शुरू हुआ था। 23 करोड़ की लागत के इस प्रोजेक्ट का काम अक्तूबर 2018 में पूरा करने की अवधि निर्धारित की गई थी। बाद में इस प्रोजेक्ट को पूरा करने की तारीख दिसंबर 2018 निर्धारित कर दी गई।
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जब इस तारीख को भी काम पूरा नहीं हुआ तो लैंड पोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया (एलपीआई) ने अप्रैल 2019 को काम पूरा करने की घोषणा कर दी। लेकिन अभी तक भी एफबीटीएस का काम पूरा नहीं हो पाया है।
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आईसीपी की स्थापना के बाद से एफबीटीएस की स्थापना की मांग होने लगी थी। तत्कालीन गृह मंत्रियों पी चिदंबरम, सुशील शिंदे और राजनाथ सिंह ने आईसीपी का दौरा कर यहां पर स्कैनर स्थापित करने का आश्वासन दिया था। इसके बाद तत्कालीन गृह राज्य मंत्री किरण रिजिजू ने मार्च 2017 में अटारी में स्कैनर स्थापित करने की घोषणा की थी।

स्कैनर की स्थापना के बाद पाकिस्तान-अफगानिस्तान की तरफ से आने वाले ट्रकों में छिपा कर लाए जाने वाले नशीले पदार्थों, भारत में प्रतिबंधित दवाओं और हथियारों की तस्करी पर अंकुश लगने की उम्मीद है। अभी पाकिस्तान से आने वाले माल से भरे ट्रकों की जांच स्निफर डॉग्स की मदद से मैन्युअल ढंग से की जाती है। इस जांच में समय और एनर्जी का नुकसान होता है।

आईसीपी में एफबीटीएस लगाने की मांग ने तब जोर पकड़ा था, जब कुछ वर्ष पहले पाकिस्तान से आने वाले सीमेंट के ट्रकों की जांच के दौरान नशीले पदार्थों की बड़ी खेप पकड़ी गई थी। इसके बाद व्यापारियों को जांच के घेरे में लाया गया था।

स्कैनर की स्थापना के दौरान एक तकनीकी खामी का पता चला था। स्कैनर अमेरिका से आयात किया गया है, इसलिए तकनीकी समस्या को ठीक करने के लिए अमेरिका से उसी कंपनी के इंजीनियर को बुलाया गया। इंजीनियर थॉमस टोनी ने दो दिन तक इस तकनीकी खामी को पूरा करने की कोशिश की, लेकिन सफलता नहीं मिली। इसके बाद इंजीनियर लौट गया।

उम्मीद है कि वह कुछ दिनों बाद आकर इस कमी को पूरा कर देगा। खामी ठीक होने के बाद मुंबई स्थित परमाणु ऊर्जा नियामक बोर्ड (एआरईबी) की टीम आईसीपी में आकर स्कैनर का परीक्षण करेगी। स्कैनर उच्च विकिरण का उत्सर्जन करता है। एआरईबी की स्वीकृति के बाद स्कैनर चालू हो जाएगा। उम्मीद है कि इस महीने के अंत में इसे चालू कर दिया जाएगा।
- सुखदेव सिंह, प्रबंधक, एलपीएआई
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