{"_id":"610629362547043d6b74bfc6","slug":"friendship-day-friends-helped-sachin-family-during-corona-crisis","type":"story","status":"publish","title_hn":"Friendship Day: कोविड में गुरुग्राम में फंस गए थे सचिन... दोस्तों ने चंडीगढ़ में उठाया परिवार के देखभाल का जिम्मा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Friendship Day: कोविड में गुरुग्राम में फंस गए थे सचिन... दोस्तों ने चंडीगढ़ में उठाया परिवार के देखभाल का जिम्मा
Sun, 01 Aug 2021 11:23 AM IST
ajay kumar
रिशुराज सिंह, अमर उजाला, चंडीगढ़
रिशुराज सिंह, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: ajay kumar
Updated Sun, 01 Aug 2021 11:23 AM IST
सार
सचिन ने बताया कि विक्रम, इंदरपाल, मोनू और अनिल बचपन के दोस्त हैं, जबकि रोहित, मोनू, राहुल व अन्य को कई सालों से जानते हैं। सभी से रोजाना बात नहीं होती लेकिन जब भी चंडीगढ़ आते हैं तो सभी मिलने पहुंच जाते हैं।
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अपने दोस्त विक्रम और इंदरपाल के साथ सचिन। (बीच में)
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
धनास के रहने वाले सचिन गुरुग्राम में एक मल्टीनेशनल कंपनी में काम करते हैं। उनका कहना है वह चंडीगढ़ से दूर सिर्फ इस वजह से रह पा रहे हैं, क्योंकि उनके दोस्त चंडीगढ़ में हैं। सचिन ने बताया कि कोरोना के समय वह गुरुग्राम में फंस गए थे तो चंडीगढ़ में दोस्तों ने परिवार की देखभाल की। दवाइयों से लेकर घर में राशन तक दोस्तों ने पहुंचाया। सचिन ने कहा कि वह बहुत खुशकिस्मत हैं कि उनके एक-दो नहीं, बल्कि कई ऐसे दोस्त हैं जो हर समय मदद के लिए तैयार रहते हैं।
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कुछ महीने पहले दादी का देहांत हो गया लेकिन कोविड के शुरुआती दौर में उनकी दवाइयां चल रही थीं। उस समय भी दोस्तों ने मदद की। पिता को लीवर की बीमारी है। लॉकडाउन में दवाइयां नहीं मिल पा रही थीं। उन्होंने दोस्तों से संपर्क किया और फिर उनकी बदौलत एक महीने तक दवाई खत्म होने से पहले घर पहुंच जाती थीं। पिता को लीवर पेन हुआ तो दोस्त ही अस्पताल लेकर गए।
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सचिन ने बताया कि विक्रम, इंदरपाल, मोनू और अनिल बचपन के दोस्त हैं, जबकि रोहित, मोनू, राहुल व अन्य को कई सालों से जानते हैं। सभी से रोजाना बात नहीं होती लेकिन जब भी चंडीगढ़ आते हैं तो सभी मिलने पहुंच जाते हैं। उन्होंने बताया कि सिर्फ एक-दो नहीं बल्कि सैकड़ों ऐसे किस्से हैं, जिनमें उनके दोस्त ही काम आए और परिवार की मदद की।
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दोस्त को नहीं जाने दिया मलेशिया यहीं मिलकर शुरू किया काम
सचिन ने बताया कि सोनू उनके बचपन का दोस्त है। कुछ साल पहले उसकी मलेशिया में नौकरी लग गई थी और वह मलेशिया के लिए निकलने वाला था। सचिन नहीं चाहते थे कि उनका दोस्त उनसे दूर जाए, इसलिए उन्होंने सोनू से कहा कि जितना वेतन मलेशिया में मिलेगा। अगर उतना ही चंडीगढ़ में ही दिला दें तो क्या वह मलेशिया की नौकरी छोड़ेंगे। मोनू ने अपने दोस्त पर विश्वास किया और मलेशिया की नौकरी छोड़ चंडीगढ़ में ही रहने का फैसला लिया। इसके बाद दोनों ने मिलकर हार्डवेयर इंस्टॉलेशन की कंपनी शुरू की। आज दोनों एक ही निजी कंपनी में काम करते हैं।