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ठगने का नया ट्रेंड...वेबसाइट पर कंपनियों के फर्जी कस्टमर केयर नंबर डालकर उड़ा रहे हैं रुपये

Sat, 10 Aug 2019 11:12 AM IST
पंचकुला ब्‍यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: पंचकुला ब्‍यूरो Updated Sat, 10 Aug 2019 11:12 AM IST
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Fraud via fake customer care number on fake gas company
फाइल फोटो
शातिर ठग अब नए-नए तरीकों से लोगों के बैंक खातों से रुपये ऐंठने में लगे हुए हैं। शातिरों ने ठगी करने का नया ट्रेंड अपना लिया है। ठग अब वेबसाइट पर हाई प्रोफाइल कंपनियों के कस्टमर केयर का नंबर अपलोड कर जरूरतमंद लोगों के बैंक खातों से रुपये उड़ा रहे हैं, जिसकी शिकायत दिन-प्रतिदिन साइबर सेल में लगातार बढ़ती जा रही है। हाल ही इस तरह के साइबर में कुल 27 मामले सामने आ चुके हैं, जिसमें शातिर कोई न कोई लुभावना लालच देकर लाखों रुपये ठग रहे हैं।
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अगर बात करें इस वर्ष ठगी के मामले की तो अब तक 2677 मामले सामने चुके हैं। यह पिछले वर्ष के मुकाबले काफी ज्यादा है। विशेषज्ञों का मानना है कि साइबर अपराध की बढ़ती वजह शहर में करीब 16 लाख की आबादी में 95 प्रतिशत लोगों के पास स्मार्ट मोबाइल फोन होना है।
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इससे गिरोह के लिए अपराध करना आसान हो जाता है। शातिर पैसे कमाने के लिए नए-नए लालच देते हैं और ठगी कर लेते हैं। बता दें कि साइबर सेल में मौजूदा समय में करीब 50 पुलिसकर्मी तैनात हैं, इनमें एक इंस्पेक्टर, चार सब इंस्पेक्टर, तीन एएसआई, 15 हेड कांस्टेबल और 30 के करीब कांस्टेबल है। इतने बड़े पैमाने पर आ रही शिकायतों को सुलझाने के लिए यह बेहद कम पुलिसकर्मी हैं।
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ऐसे होती है ठगी

शातिर शहर के किसी भी हाई प्रोफाइल कंपनी का एक फर्जी अकाउंट बनाकर वेबसाइट पर अपलोड कर देते हैं। इस अकाउंट में कस्टमर केयर का नंबर सहित अन्य कई फर्जी जानकारियां होती हैं। जरूरतमंद लोग वेबसाइट से कस्टमर केयर नंबर लेकर उन्हें फोन करते हैं। इसके बाद शातिर ग्राहक के मोबाइल पर एक 20 रुपये का फार्म भेजकर कहते हैं कि यह भरना होगा। इसके बाद ही आगे का प्रोसेस शुरू होगा। जैसे ही फार्म में बैंक डिटेल व अन्य जानकारियां भरने के बाद सबमिट किया जाता है। उसी दौरान ग्राहक के बैंक खाते से रकम निकलनी शुरू हो जाती है।

गैस एजेंसी के नाम पर कई धोखाधड़ी
पीयू पीएचडी की छात्रा रंजन पाण्डेय बताती है कि उन्हें पीजी खाली करना था। बीते 23 जुलाई को उन्होंने गैस एजेंसी में सिलिंडर वापस करने के लिए प्रवीण गैस एजेंसी का गूगल से मोबाइल नंबर निकालकर संपर्क किया। फोन पर व्यक्ति ने कहा कि उसके मोबाइल पर एक लिंक आएगा, इसे फारवर्ड करने के बाद उसके पास एक फार्म आएगा। 20 रुपये का फार्म भरने के बाद इसे सबमिट करने पड़ेगा। जैसे फार्म को सबमिट किया तो खाते से एक लाख रुपये उड़ गए। वहीं, उक्त गैस एजेंसी ने सेक्टर-16 निवासी एक डॉक्टर को गैस सब्सिडी का लालच देकर उनके बैंक खाते से हजारों रुपये निकाल लिए।

पुलिस ने डिलीट करवाया नंबर
लगातार शिकायतें मिलने पर साइबर पुलिस हरकत में आई। लगातार हो रही ठगी के बाद पुलिस ने प्रवीण गैस एजेंसी के नाम पर चल रही वेबसाइट को खंगाला। प्राथमिक जांच में सामने आया कि मोबाइल नंबर झारखंड का है। इसके बाद पुलिस ने नंबर को गूगल से डिलीट करवाया ताकि कोई और ठगी का शिकार न हो सके। जबकि ऐसे ही नंबर गूगल पर न जाने कितने हैं, जिनसे शातिर लोगों को ठगी का शिकार बना रहे हैं।

लगातार ऐसे मामले सामने आ रहे हैं। इसके लिए पुलिस टीम पूरी तरह से जांच में जुटी हुई है, जबकि कई मोबाइल नंबर को गूूगल से डिलीट करवाया गया। जो भी मामला अभी अनसुलझा है, उसे जल्द से जल्द सुलझाने की कोशिश है।
- रश्मि यादव, डीएसपी साइबर क्राइम, चंडीगढ़
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