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पीयू में फर्जी मेडिकल सर्टिफिकेट पर छात्रों का खेल
सुमित सिंह श्यौराण/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Tue, 22 Dec 2015 03:14 PM IST
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पंजाब यूनिवर्सिटी (पीयू) में स्टूडेंट्स लेक्चर पूरे करने के लिए बड़े स्तर पर गलत सर्टिफिकेट दे रहे हैं। सेमेस्टर परीक्षाओं से ठीक पहले 700 से अधिक स्टूडेंट ने अटेंडेंस पूरी करने के मेडिकल सर्टिफिकेट जमा कराए हैं। सर्टिफिकेट फर्जी निकलने का मामला उस समय उजागर हुआ
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जब पीयू के ही यूनिवर्सिटी इंस्टीट्यूट ऑफ लीगलस स्टडी (यूआईएलएस) के 400 से अधिक स्टूडेंट के मेडिकल सर्टिफिकेट पीयू हेल्थ सेंटर पर जांच के लिए भेजे गए। जांच में इन सर्टिफिकेट में अधिकतर पर सवालिया निशान लगा दिया गया। अधिकतर सर्टिफिकेट चंडीगढ़ और मोहाली के चुनिंदा क्लीनिक से जारी किए गए हैं।
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एक ही समय में प्राइवेट डॉक्टरों ने पीयू के 40 से 50 स्टूडेंट का मेडिकल सर्टिफिकेट जारी कर दिया। मामले का खुलासा होने पर पीयू प्रशासन ने मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया (एमसीआई) और पंजाब स्टेट मेडिकल काउंसिल को फर्जी तरीके से मेडिकल सर्टिफिकेट जारी करने वाले डॉक्टरों का लाइसेंस रद्द करने और उनके खिलाफ कार्रवाई की सिफारिश कर दी है।
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इन विभागों में मेडिकल सर्टिफिकेट का अधिक फर्जीवाड़ा
पीयू के कई विभागों के स्टूडेंट्स ने चुनिंदा क्लीनिक से जारी सर्टिफिकेट विभागों में जमा कराए हैं। इनमें सबसे आगे यूनिवर्सिटी इंस्टीट्यूट ऑफ लीगल स्टडी (यूआईएलएस) के स्टूडेंट हैं। जानकारी के अनुसार विभाग के 400 से अधिक स्टूडेंट ने पिछले दो महीने के मेडिकल सर्टिफिकेट दिए हैं। अन्य विभागों में यूबीएस (50) यूआईईटी (100 से अधिक) पीयू इवनिंग विभाग 150 से 200, इकोनॉमिक्स में 25 से 30 मेडिकल सर्टिफिकेट जमा हुए हैं।
पीयू में है अटेंडेंस पूरी करने का नियम
पीयू कैलेंडर के तहत स्टूडेंट्स को अधिकतम 15 दिन की छुट्टी के लिए जारी हुए मेडिकल सर्टिफिकेट का लाभ मिल सकता है। स्टूडेंट्स के लिए एक हफ्ते में आवेदन करना अनिवार्य है। लेकिन पीयू स्टूडेंट्स ने एक से डेढ़ महीने पुराने मेडिकल सर्टिफिकेट जमा कराए हैं। डीयूआई ने कार्रवाई के नाम पर लीपापोती करते हुए फिलहाल सभी पर 500 रुपये जुर्माना लगाने के आदेश दिए हैं।
छात्र नेताओं और अधिकारियों की सिफारिश
20 नवंबर को यूआईएलएस विभाग से एक साथ 44 स्टूडेंट का मेडिकल सर्टिफिकेट हेल्थ सेंटर में मंजूरी के लिए भेजा गया। चिट्ठी में डीएसडब्ल्यू ने मामले में तुरंत कार्रवाई के लिए लिखा है। डीयूआई ने स्टूडेंट के कैरियर की दुहाई देते हुए मामले में कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। लेकिन पीयू कुलपति ने अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए हैं कि भविष्य में इस तरह के चलन को बंद किया जाए।
स्टूडेंट्स को मेडिकल बेनिफिट देने के लिए छात्र नेताओं और पीयू अधिकारियों का भारी दबाव है। हेल्थ सेंटर के कर्मचारी और डॉक्टर मरीजों को छोड़ मेडिकल सर्टिफिकेट की जांच में जुटे हैं। सूत्रों के अनुसार कई स्टूडेंट्स तो परीक्षा से दो घंटे पहले तक भी मेडिकल सर्टिफिकेट अप्रूवल के लिए हेल्थ सेंटर के चक्कर काटते रहते हैं।
कई नर्सिंग होम पर गिरेगी गाज
गलत तरीके से मेडिकल सर्टिफिकेट जारी करने के मामले में पीयू प्रशासन ने सख्ती दिखानी शुरू कर दी है। सभी मेडिकल सर्टिफिकेट की जांच के बाद मनीमाजरा, धनास, मोहाली, चंडीगढ़ के सेक्टर-15 के कई मेडिकल सेंटर रडार पर हैं। इनके खिलाफ मेडिकल काउंसिल में शिकायत भेजी गई है। स्टूडेंट्स ने सबसे अधिक जो मेडिकल सर्टिफिकेट जमा कराए हैं। उनके नाम रवि क्लीनिक डड्डूमाजरा, धीर क्लीनिक सेक्टर-44, कोचर नर्सिंग होम मोहाली और मनीमाजरा स्थित आरके गुप्ता नर्सिंग होम है।
डॉ. देवेंद्र धवन, चीफ मेडिकल ऑफिसर पंजाब यूनिवर्सिटी हेल्थ सेंटर ने बताया कि अधिकतर स्टूडेंट के मेडिकल सर्टिफिकेट जांच में फर्जी पाए गए हैं। 50 से 70 स्टूडेंट का मेडिकल सर्टिफिकेट एक ही डॉक्टर ने जारी किया है। बुखार होने पर भी 20 दिन तक का मेडिकल सर्टिफिकेट जारी कर दिया गया है। मामले में पीयू उच्च अधिकारियों को चिट्ठी लिखी गई है। मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया और पंजाब स्टेट काउंसिल को भी चिट्ठी लिखी गई है। जरूरत पड़ी तो ऐसे डॉक्टरों के खिलाफ लीगल एक्शन भी लिया जाएगा।
प्रो. एके भंडारी, डीयूआई पंजाब यूनिवर्सिटी ने बताया िककि मेडिकल सर्टिफिकेट को लेकर नियमों को रिव्यू किया जाएगा। जिन डॉक्टरों के खिलाफ हेल्थ सेंटर से शिकायत आई है उनकी जांच भी कराई जाएगी। सभी विभागों को जल्द सर्कुलर जारी किया जाएगा।