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बेमिसालः 4 दिन में 4 युवाओं ने किए अंगदान और 9 को मिली नई जिंदगी
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Tue, 21 Feb 2017 09:24 PM IST
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विश्व अंगदान दिवस
- फोटो : फाइल फोटो
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चार युवाओं ने अंगदान करके ऐसी मिसाल पेश की कि आप गर्व महसूस करेंगे। इनके कारण 9 लोगों को जिंदगी मिल चुकी है और चार अन्य की जिंदगी रोशन होगी। पीजीआई चंडीगढ़ की अंगदान की मुहिम रंग लाने लगी है। चार दिन में चार आर्गन डोनेशन किए गए। इससे नौ लोगों को नई जिंदगी मिली, जबकि कोर्निया को संभालकर रख लिया गया है। इससे चार लोगों को रोशनी मिल सकती है।
तीन ट्रांसप्लांट पीजीआई में किए गए, जबकि एक ट्रांसप्लांट सफदरगंज हॉस्पिटल में। पीजीआई की ओर से बताया गया है कि ट्रांसप्लांट व अन्य टीमें लगातार काम कर रही थी, इसलिए चौथा ट्रांसप्लांट पीजीआई में संभव में था। पीजीआई के रीजनल आर्गन एंड टिश्यू ट्रांसप्लांट आर्गेनाइजेशन (रोटो) ने नेशनल आर्गन एंड टिश्यू ट्रांसप्लांट आर्गेनाइजेशन (नोटो) से संपर्क किया।
नोटो ने सफदरगंज हास्पिटल को इसकी सूचना दी। सफदरगंज अस्पताल की टीम चार मरीजों के सैंपल लेकर पीजीआई पहुंची। क्रास मैचिंग कराई गई। बाद में पेशेंट की किडनी लेकर दिल्ली रवाना हो गए। पीजीआई के मुताबिक दिल्ली में दो लोगों में किडनी ट्रांसप्लांट कर दी गई है।
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आर्गन डोनेट करने वाली फैमिली सोसाइटी के रियल हीरो हैं। मुश्किल समय में इतने बड़े फैसले लेना आसान नहीं होता। पीजीआई की न्यूरो सर्जन, ट्रांसप्लांट सर्जन, जूनियर रेजिडेंट, एनेस्थीसिस्ट, ट्रांसप्लांट कोर्डिनेटर की भी तारीफ करनी होगी, जिन्होंने बिना रुके आर्गन डोनेशन और ट्रांसप्लांट को सफल बनाया।
- डा. विपिन कौशल, नोडल आफिसर रोटो पीजीआई
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तीन ट्रांसप्लांट पीजीआई में किए गए, जबकि एक ट्रांसप्लांट सफदरगंज हॉस्पिटल में। पीजीआई की ओर से बताया गया है कि ट्रांसप्लांट व अन्य टीमें लगातार काम कर रही थी, इसलिए चौथा ट्रांसप्लांट पीजीआई में संभव में था। पीजीआई के रीजनल आर्गन एंड टिश्यू ट्रांसप्लांट आर्गेनाइजेशन (रोटो) ने नेशनल आर्गन एंड टिश्यू ट्रांसप्लांट आर्गेनाइजेशन (नोटो) से संपर्क किया।
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नोटो ने सफदरगंज हास्पिटल को इसकी सूचना दी। सफदरगंज अस्पताल की टीम चार मरीजों के सैंपल लेकर पीजीआई पहुंची। क्रास मैचिंग कराई गई। बाद में पेशेंट की किडनी लेकर दिल्ली रवाना हो गए। पीजीआई के मुताबिक दिल्ली में दो लोगों में किडनी ट्रांसप्लांट कर दी गई है।
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आर्गन डोनेट करने वाली फैमिली सोसाइटी के रियल हीरो हैं। मुश्किल समय में इतने बड़े फैसले लेना आसान नहीं होता। पीजीआई की न्यूरो सर्जन, ट्रांसप्लांट सर्जन, जूनियर रेजिडेंट, एनेस्थीसिस्ट, ट्रांसप्लांट कोर्डिनेटर की भी तारीफ करनी होगी, जिन्होंने बिना रुके आर्गन डोनेशन और ट्रांसप्लांट को सफल बनाया।
- डा. विपिन कौशल, नोडल आफिसर रोटो पीजीआई
इन चार के अंगदान हुए
विश्व अंगदान दिवस
- फोटो : फाइल फोटो
यूपी की शिवानी
पीजीआई के मुताबिक जिन चार लोगों के आर्गन डोनेशन हुए हैं, उनमें एक 20 वर्षीय युवती भी शामिल है। यूपी के सहारनपुर की रहने वाली शिवानी अपने पति के साथ बाइक पर पैरेंट्स से मिलने जा रही थी, तभी वह गिर गई। इससे उसके सिर पर गंभीर चोटें आईं। पहले उसे लोकल हास्पिटल में एडमिट कराया गया। बाद में उसे पीजीआई रेफर कर दिया गया। यहां पर ब्रेन डेड घोषित करने के बाद उसकी दोनों किडनी, लीवर और कोर्निया को सुरक्षित निकाल लिया गया। किडनी और लीवर ट्रांसप्लांट कर दिया गया, जबकि कोर्निया को सुरक्षित रखा गया।
हिमाचल का देविंदर
हिमाचल के बिलासपुर का रहने वाला 21 वर्षीय देविंदर अपनी बाइक पर जा रहा था, तभी उसका बस से एक्सीडेंट हो गया। इससे उसके सिर पर गंभीर चोट आई। 30 जनवरी को उसे पीजीआई लाया गया। उसे बचाने की काफी कोशिश की गई, लेकिन डॉक्टरों को कामयाबी नहीं मिली। देविंदर के परिजनों ने किडनी देने की स्वीकृति दे दी। परिजनों ने बताया कि देविंदर अप्रैल में देश से बाहर पढ़ाई के लिए जाने वाला था, लेकिन उससे पहले वह हम लोगों को छोड़कर चला गया।
हरियाणा का सौरभ
हरियाणा के नारायणगढ़ का रहने वाले 18 वर्षीय सौरभ का भी बस से एक्सीडेंट हो गया था। उसे पीजीआई लाया गया। इलाज चल रहा था, लेकिन उसकी रिकवरी नहीं हो पा रही थी। चार फरवरी को पीजीआई ने उसे ब्रेन डेड घोषित कर दिया। सौरभ अपने घर का इकलौता रोजी-रोटी कमाने वाला था। जब ट्रांसप्लांट की बारी आई तो सौरभ की मां ने हामी भर दी। सौरभ की दोनों किडनी और कोर्निया सुरक्षित निकाल ली गई। किडनी ट्रांसप्लांट भी कर दी गई है।
चंडीगढ़ का सुधीर
चंडीगढ़ के डड्डूमाजरा में रहने वाले सुधीर कुमार को अज्ञात वाहन ने टक्कर मार दी थी। जब उन्हें पीजीआई लाया गया तो उन्हें बचाने की काफी कोशिश की गई, लेकिन सफलता नहीं मिली। बाद में उसे ब्रेन डेड घोषित कर दिया गया। परिजनों ने कहा कि वे भी अपने सुधीर के अंग देना चाहते हैं, लेकिन पीजीआई की ट्रांसप्लांट की टीम खाली नहीं थी। पीजीआई रोटो ने इस बारे में नोटो को बताया। नोटो ने तुरंत दिल्ली के सफदरगंज को तैयारी करने को कहा और एक टीम पीजीआई भेज दी। पीजीआई ने सुधीर की किडनियां सफदरगंज को सौंप दी और ट्रांसप्लांट भी कर दिया गया है।
पीजीआई के मुताबिक जिन चार लोगों के आर्गन डोनेशन हुए हैं, उनमें एक 20 वर्षीय युवती भी शामिल है। यूपी के सहारनपुर की रहने वाली शिवानी अपने पति के साथ बाइक पर पैरेंट्स से मिलने जा रही थी, तभी वह गिर गई। इससे उसके सिर पर गंभीर चोटें आईं। पहले उसे लोकल हास्पिटल में एडमिट कराया गया। बाद में उसे पीजीआई रेफर कर दिया गया। यहां पर ब्रेन डेड घोषित करने के बाद उसकी दोनों किडनी, लीवर और कोर्निया को सुरक्षित निकाल लिया गया। किडनी और लीवर ट्रांसप्लांट कर दिया गया, जबकि कोर्निया को सुरक्षित रखा गया।
हिमाचल का देविंदर
हिमाचल के बिलासपुर का रहने वाला 21 वर्षीय देविंदर अपनी बाइक पर जा रहा था, तभी उसका बस से एक्सीडेंट हो गया। इससे उसके सिर पर गंभीर चोट आई। 30 जनवरी को उसे पीजीआई लाया गया। उसे बचाने की काफी कोशिश की गई, लेकिन डॉक्टरों को कामयाबी नहीं मिली। देविंदर के परिजनों ने किडनी देने की स्वीकृति दे दी। परिजनों ने बताया कि देविंदर अप्रैल में देश से बाहर पढ़ाई के लिए जाने वाला था, लेकिन उससे पहले वह हम लोगों को छोड़कर चला गया।
हरियाणा का सौरभ
हरियाणा के नारायणगढ़ का रहने वाले 18 वर्षीय सौरभ का भी बस से एक्सीडेंट हो गया था। उसे पीजीआई लाया गया। इलाज चल रहा था, लेकिन उसकी रिकवरी नहीं हो पा रही थी। चार फरवरी को पीजीआई ने उसे ब्रेन डेड घोषित कर दिया। सौरभ अपने घर का इकलौता रोजी-रोटी कमाने वाला था। जब ट्रांसप्लांट की बारी आई तो सौरभ की मां ने हामी भर दी। सौरभ की दोनों किडनी और कोर्निया सुरक्षित निकाल ली गई। किडनी ट्रांसप्लांट भी कर दी गई है।
चंडीगढ़ का सुधीर
चंडीगढ़ के डड्डूमाजरा में रहने वाले सुधीर कुमार को अज्ञात वाहन ने टक्कर मार दी थी। जब उन्हें पीजीआई लाया गया तो उन्हें बचाने की काफी कोशिश की गई, लेकिन सफलता नहीं मिली। बाद में उसे ब्रेन डेड घोषित कर दिया गया। परिजनों ने कहा कि वे भी अपने सुधीर के अंग देना चाहते हैं, लेकिन पीजीआई की ट्रांसप्लांट की टीम खाली नहीं थी। पीजीआई रोटो ने इस बारे में नोटो को बताया। नोटो ने तुरंत दिल्ली के सफदरगंज को तैयारी करने को कहा और एक टीम पीजीआई भेज दी। पीजीआई ने सुधीर की किडनियां सफदरगंज को सौंप दी और ट्रांसप्लांट भी कर दिया गया है।