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Chandigarh News: पंजाब की चार अहम रेल परियोजनाओं पर लगी ब्रेक

Sun, 04 Jan 2026 08:53 PM IST
Chandigarh Bureau चंडीगढ़ ब्यूरो
Updated Sun, 04 Jan 2026 08:53 PM IST
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Four important rail projects in Punjab have been put on hold.
-मंत्रालय की रिपोर्ट: 422 हेक्टेयर भूमि अधिग्रहण बनी बाधा
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-बॉर्डर एरिया के लिए बेहद अहम दो परियोजनाएं भी शामिल
-फिरोजपुर-पट्टी, अलल-हिमताना, रामा मंडी-तलवंडी साबो परियोजना पर नहीं शुरू हो पाया काम
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राजिंद्र शर्मा
चंडीगढ़। पंजाब में चार प्रमुख रेल परियोजनाएं जमीन अधिग्रहण की चुनौतियों के चलते लंबित हैं। रेल मंत्रालय की रिपोर्ट के अनुसार इन परियोजनाओं में 422 हेक्टेयर भूमि अधिग्रहण अभी तक नहीं हो पाया है, जिससे काम आगे नहीं बढ़ पा रहा है। इनमें से दो परियोजनाएं बॉर्डर एरिया के लिए बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती हैं क्योंकि इनसे व्यापारिक गतिविधियों के साथ सेना की आवाजाही में भी तेजी आएगी।
फिरोजपुर-पट्टी, अलल-हिमताना, रामा मंडी-तलवंडी साबो और कादियां-ब्यास नई लाइन परियोजनाएं लंबे समय से अटकी हुई हैं। कादियां-ब्यास लाइन को हाल ही में केंद्र सरकार ने डीफ्रीज किया है लेकिन जमीन अधिग्रहण और अन्य बाधाओं के कारण काम शुरू नहीं हो पाया। यह परियोजना ब्रिटिश काल में मंजूरी प्राप्त थी।
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रेल मंत्रालय की रिपोर्ट के अनुसार धूरी जंक्शन को बाइपास करने वाली अलल-हिमताना 13 किलोमीटर लंबी लाइन के लिए अभी 20 हेक्टेयर भूमि अधिगृहीत करनी बाकी है। यह परियोजना इसलिए अहम है क्योंकि इससे ट्रेन को व्यस्त धूरी जंक्शन से गुजरने की आवश्यकता नहीं होगी और समय की बचत होगी।
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अंतरराष्ट्रीय बॉर्डर के नजदीक स्थित फिरोजपुर-पत्ती 26 किलोमीटर लंबी नई रेल परियोजना सबसे महत्वपूर्ण मानी जा रही है। पंजाब सरकार ने इस परियोजना के लिए फ्री ऑफ कॉस्ट भूमि देने का आश्वासन दिया था। फिरोजपुर और तरनतारन में इस परियोजना के लिए 166 हेक्टेयर भूमि अधिग्रहण होना है। 300 करोड़ रुपये की इस परियोजना के लिए मार्च 2023 में मुआवजा राशि जारी करने का नोटिस जारी किया गया, लेकिन काम अभी तक नहीं शुरू हो पाया। इस परियोजना से क्षेत्रीय व्यापार में तेजी और सीमा पर सेना की आवाजाही में मदद मिलेगी, जिससे केंद्र सरकार भी इसमें रुचि ले रही है।
तख्त श्री दमदमा साहिब को जोड़ने वाली 29 किलोमीटर लंबी नई रेल लाइन की लागत 154 करोड़ रुपये आंकी गई है। इस परियोजना के लिए 85 हेक्टेयर भूमि अधिग्रहण आवश्यक है। सांसद हरसिमरत कौर बादल और केंद्रीय रेल राज्य मंत्री रवनीत बिट्टू ने किसानों से अपील की है कि वे इस परियोजना के लिए जमीन दें।
कादियां-ब्यास नई लाइन
कादियां-ब्यास लाइन के लिए 151 हेक्टेयर भूमि अधिग्रहण करना बाकी है। केंद्र सरकार द्वारा डीफ्रीज किए जाने से काम शुरू होने की उम्मीद जगी है, लेकिन भूमि अधिग्रहण और अन्य अनुमोदन प्रक्रिया लंबी और जटिल साबित हो सकती है।

भूमि अधिग्रहण पर निर्भर परियोजनाएं
रेल मंत्रालय की रिपोर्ट में स्पष्ट किया गया है कि सभी परियोजनाओं पर तेजी से काम किया जा रहा है, लेकिन यह राज्य सरकार के सहयोग और भूमि अधिग्रहण पर निर्भर है। इसके अलावा कानून-व्यवस्था, वन विभाग से स्वीकृति और अतिक्रमण मुक्त भूमि होना भी आवश्यक है। केंद्र ने पंजाब में 714 किलोमीटर लंबी नौ परियोजनाओं को मंजूरी दी है, जिनकी कुल लागत 21,926 करोड़ रुपये है। इनमें चार नई लाइन और पांच डबल लाइन परियोजनाएं शामिल हैं।
भूमि अधिग्रहण में देरी की वजह
-कुल 422 हेक्टेयर भूमि अधिग्रहण लंबित
-कानून-व्यवस्था और वन विभाग की स्वीकृति आवश्यक
-अतिक्रमण मुक्त भूमि न होना
-केंद्र और राज्य सरकार के बीच समन्वय आवश्यक
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