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हरियाणा : तीन साल में जबरन धर्मांतरण के चार मुकदमे, दो फर्जी निकले, एक में आरोपी बरी, आरटीआई में खुलासा
Wed, 03 Mar 2021 10:27 PM IST
ajay kumar
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: ajay kumar
Updated Wed, 03 Mar 2021 10:27 PM IST
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प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : सोशल मीडिया
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हरियाणा सरकार बजट सत्र में भले ही जबरन धर्मांतरण के खिलाफ कड़ा कानून बनाने जा रही है लेकिन इस अपराध के मामले बहुत ही कम दर्ज होते हैं। आरटीआई से मिली सूचना अनुसार पिछले तीन वर्ष में प्रदेश के छह जिलों में सिर्फ चार मुकद्दमे ही दर्ज हुए। इनमें से दो केस पुलिस जांच में झूठे मिले। एक केस में आरोपी कोर्ट से बरी हो गया और चौथा केस न्यायालय में विचाराधीन है।
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जबरन धर्मांतरण को लेकर पुलिस का रवैया भी ढुलमुल रहता है। डीजीपी कार्यालय व राज्य महिला आयोग ने तो बीते साढ़े तीन महीने से आरटीआई का जवाब ही नहीं दिया। पानीपत के आरटीआई कार्यकर्ता पीपी कपूर ने बताया कि सरकार जिस अपराध के खिलाफ सख्त कानून बनाने जा रही है, उसकी जमीनी हकीकत अलग ही है।
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उन्होंने नवंबर 2020 में केंद्रीय महिला आयोग, राज्य महिला आयोग, डीजीपी हरियाणा व विभिन्न जिलों के पुलिस अधीक्षकों के पास आरटीआई लगाकर जबरन धर्मांतरण से जुड़ी जानकारी मांगी थी। केंद्रीय महिला आयोग ने 11 दिसंबर 2020 को दिए जवाब में बताया कि उनके पास इसकी कोई सूचना नहीं है। डीजीपी कार्यालय ने सूचना न देकर आरटीआई एडीजीपी (लॉ एंड ऑर्डर) व अपराध शाखा के पास भेज दी। अन्य जगह से मिली जानकारी के अनुसार केवल आज तक चार केस ही दर्ज हुए हैं।
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यहां-यहां दर्ज हुए मामले
- 12 दिसंबर 2020 को थाना पुन्हाना (मेवात) में मुस्लिम लड़के द्वारा हिंदू लड़की के अपहरण का मुकदमा पुलिस जांच में झूठा निकला। इसलिए इसे रद्द कर दिया गया।
- 18 मई 2018 को अंबाला पुलिस ने अपहरण का मुकदमा दर्ज किया। इसमें भी जबरन धर्मांतरण की आशंका थी। आरोपी कोर्ट से बरी हो गया।
- 16 अक्तूबर 2019 को दर्ज अपहरण का मुकदमा भी पुलिस जांच में झूठा पाया गया। इसमें भी जबरन धर्मांतरण की आशंका जताई गई थी।
- समालखा (पानीपत) पुलिस ने 19 जुलाई 2019 को अपहरण का मुकदमा दर्ज किया। यह अभी कोर्ट में विचाराधीन है।