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खुलासाः पूर्व पीएम मनमोहन सिंह से की थी सिख लाइब्रेरी का खजाना लौटाने की मांग, एक ट्रंक आया था

Tue, 11 Jun 2019 01:41 PM IST
खुशबू गोयल अशोक नीर, अमर उजाला, अमृतसर(पंजाब)
अशोक नीर, अमर उजाला, अमृतसर(पंजाब) Published by: खुशबू गोयल Updated Tue, 11 Jun 2019 01:41 PM IST
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Former pm manmohan singh role in sikh library things recovery from indian army
डॉ. मनमोहन सिंह - फोटो : अमर उजाला
पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह के साथ हुई बैठक में ऑपरेशन ब्लू स्टार के दौरान भारतीय सेना द्वारा ‘सिख रेफेरेंस लाइब्रेरी में रखे खजाने को लौटने की मांग रखी गई थी। डॉ. मनमोहन सिंह ने उस समय के सीबीआई के अधिकारियों को निर्देश दिए थे कि वह इस बात की जांच करें कि सिख रेफरेंस लाइब्रेरी का खजाना कहां है।
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कुछ महीनों के बाद सीबीआई ने एसजीपीसी को एक ट्रंक लौटाया था। यह ट्रंक सीबीआई को एक मॉल खाने में रखा हुआ मिला था। इसको जब खोला गया तो उसमें एक पिस्तौल व अन्य सामान मिला था। इसकी जानकारी एसजीपीसी के पूर्व सचिव दलमेघ सिंह ने अमर उजाला से बातचीत करते हुए दी। उन्होंने कहा कि बैठक में अमृतसर नगर निगम के तत्कालीन कमिश्नर केएस कंग भी शामिल थे।
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अमर उजाला से बातचीत में केएस कंग ने कहा कि अमृतसर में बनने वाली पहली ऐलिवेटेड रोड को लेकर पंजाब सरकार के तत्कालीन चीफ सेक्रेटरी जय दीप सिंह, कुछ अन्य अधिकारियों की बैठक उस समय के ग्रह मंत्रालय के चीफ सेक्रेटरी के साथ हुई थी। इसमें एसजीपीसी के दलमेघ सिंह व अन्य अधिकारी भी मौजूद थे।
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बैठक के एजेंडे में सिख रेफेरेंस लाइब्रेरी के बहुमूल्य खजाने की मांग भी शामिल थी। तब ग्रह मंत्रालय के अधिकारियों ने कहा था पूरा मामला भारतीय सेना को सौंप दिया गया है। हो सकता है कि इस बैठक के बाद एसजीपीसी का शिष्टमंडल डॉ. मनमोहन सिंह से मिला हो, वह प्रधानमंत्री के साथ हुई बैठक में शामिल नहीं थे।

श्री गुरु नानक देव जी की संस्कृत भाषा में लिखी नायब जन्म साखी भी थी

एसजीपीसी की पूर्व महासचिव किरण जोत कौर ने अमर उजाला को बताया कि बीबी जागीर कौर के कार्यकाल के दौरान जालंधर सर्किट हाउस में उस समय के रक्षा मंत्री जॉर्ज फर्नांडीज को सिख रेफरेंस लाइब्रेरी के सामान कि एक सूची सौंपी गई थी। इसके आधार पर उनसे सिखों का बहुमूल्य खजाना लौटाने की मांग की गई थी।

भारतीय सेना ने कुछ सामान लौटाया था, जिसमें वह रजिस्टर भी था, जिसमें सिख रेफरेंस लाइब्रेरी में रखे सामान का ब्योरा था। उस रजिस्टर से इस बात की जानकारी मिली थी कि बहुमूल्य खजाने में संस्कृत भाषा में लिखी नायब श्री गुरु नानक देव जी की जन्म साखी भी थी। गुरु साहिबान की इस जन्म साखी को पढ़ने के लिए देश-विदेश से लोग सिख रेफरेंस लाइब्रेरी में आते थे।

उन्होंने कहा कि अब जो चर्चा है, ऐसा सुनने को कभी मिला नहीं था।

 
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