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Hindi News ›   Chandigarh ›   Former Minister Subash Batra withdraw case against Baba Ramdev

पूर्व कांग्रेसी मंत्री ने वापस ली बाबा रामदेव के खिलाफ याचिका, बोले- अब मेरी भावनाएं आहत नहीं

Tue, 28 Jan 2020 05:22 PM IST
ajay kumar विजेंद्र कौशिक, अमर उजाला, रोहतक (हरियाणा)
विजेंद्र कौशिक, अमर उजाला, रोहतक (हरियाणा) Published by: ajay kumar Updated Tue, 28 Jan 2020 05:22 PM IST
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Former Minister Subash Batra withdraw case against Baba Ramdev
रामदेव (फाइल फोटो) - फोटो : PTI

भजनलाल सरकार में गृहमंत्री रहे कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सुभाष बतरा ने सोमवार को बाबा रामदेव के खिलाफ भड़काऊ भाषण देने की याचिका वापस ले ली। बतरा ने अदालत में अर्जी दी कि उनका बाबा रामदेव से समझौता हो चुका है। अब वह आगे केस नहीं चलाना चाहते। एसीजेएम ईशा खत्री की कोर्ट ने पूर्व मंत्री की याचिका को स्वीकार कर लिया। 

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याचिकाकर्ता के वकील ओमप्रकाश चुघ ने बताया कि पूर्व मंत्री सुभाष बतरा ने मार्च 2017 में अदालत में याचिका दायर की थी कि फरवरी 2016 में प्रदेश में जाट आरक्षण आंदोलन के दौरान हिंसा हुई। हिंसा के बाद रोहतक की अनाज मंडी में कुछ संगठनों ने सद्भावना सम्मेलन किया, जिसमें बाबा रामदेव को आमंत्रित किया गया था। 

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आरोप लगाया कि सम्मेलन में लोगों को संबोधित करते हुए बाबा रामदेव ने भड़काऊ भाषण दिया, जिसमें सिर काटने की बात कही गई। इससे उनकी भावनाएं आहत हुईं, जब पुलिस को मामले की शिकायत दी तो पुलिस ने कार्रवाई नहीं की। कोर्ट ने मामले में पुलिस अधीक्षक से जांच रिपोर्ट मांगी। इसके बाद बाबा रामदेव को समन भेजकर जवाब मांगा। अदालत ने बाबा रामदेव के पेश न होने पर 27 जनवरी तक गैर जमानती वारंट जारी किए थे। सोमवार को मामले की सुनवाई से पहले शिकायतकर्ता बतरा ने अपनी अर्जी वापस ले ली। 

बतरा बोले- अब मेरी भावनाएं आहत नहीं हैं 
जिस समय अदालत में याचिका दाखिल की थी, उस समय बाबा रामदेव के भाषण से मेरी भावनाएं आहत हुईं थीं लेकिन अब नहीं हैं। इसलिए याचिका वापस ले ली है। - सुभाष बतरा, पूर्व मंत्री  

अभी केस में आरोप तय तक नहीं हुए थे: चुघ
अदालत की तरफ से बाबा रामदेव के खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी किए थे। हालांकि कोर्ट ने एसपी की रिपोर्ट के बाद आईपीसी की धारा 124ए हटा दी थी। केवल 153ए व 153 बी के तहत समन जारी किए थे। केस में आरोप तय नहीं हुए थे। उससे पहले ही याचिकाकर्ता ने अपनी शिकायत वापस ले ली। - ओपी चुघ, वकील शिकायतकर्ता पक्ष

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