{"_id":"6055161e8ebc3e8c9775c356","slug":"former-head-warden-of-budail-jail-convicted-23-to-be-punished-chandigarh-news-pkl4077166100","type":"story","status":"publish","title_hn":"बुडैल जेल का पूर्व वार्डन दोषी करार","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
बुडैल जेल का पूर्व वार्डन दोषी करार
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
चंडीगढ़। बुडै़ल जेल के पूर्व हेड वार्डन सरवन कुमार को सीबीआई जज सुशील कुमार गर्ग की अदालत ने शुक्रवार को दोषी करार दिया। हालांकि सजा 23 मार्च को सुनाई जाएगी। सरवन कुमार पर एक कैदी से पांच हजार रुपये की रिश्वत लेने का आरोप था। वीरवार को मामले में दोनों पक्ष ने अपनी अंतिम दलीलें पेश की थीं। अदालत ने भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 7, 13(1) (डी), 13 (2) के तहत सरवन कुमार को दोषी करार दिया है।
सीबीआई ने 14 जुलाई, 2014 को बुड़ैल जेल के हेड वार्डन सरवन कुमार को एक कैदी से पांच हजार रुपये की रिश्वत मांगने के आरोप में गिरफ्तार किया था। दरअसल, अपहरण मामले में सजा काट रहे कैदी संदीप कुमार ने अपनी ड्यूटी बदलवाने के लिए वार्डन सरवन से गुहार लगाई थी। इस पर सरवन ने संदीप की विजिटर रूम में ड्यूटी लगा दी थी। इसके बदले आरोपी ने अपने घर में वाटर प्यूरीफायर लगाने के लिए पांच हजार रुपये की रिश्वत मांगी। संदीप के साथ अन्य कैदी प्रेम सिंह बिष्ट भी जेल में बंद था। प्रेम सिंह बिष्ट ने अपने भाई प्रताप सिंह बिष्ट को बताया था कि जेल में वार्डन कैदी संदीप से पांच हजार रुपये की रिश्वत मांग रहा है। इसके बाद प्रताप सिंह बिष्ट ने मामले की सूचना सीबीआई को दे दी।
संदीप ने वार्डन सरवन को रिश्वत की रकम लेने के लिए प्रताप सिंह का मोबाइल नंबर दे दिया और कहा कि वह उसका भाई है और वही उसे पैसे देगा। संदीप के कहने पर सरवन ने प्रताप को फोन किया और स्कूल के पास मिलने के लिए बुलाया। जैसे ही सरवन वहां पहुंचा तो सीबीआई ने जाल बिछाकर दोषी सरवन को सेक्टर-45 के सरकारी स्कूल के सामने से रिश्वत लेते रंगेहाथ दबोच लिया।
विज्ञापन
विज्ञापन
सीबीआई ने 14 जुलाई, 2014 को बुड़ैल जेल के हेड वार्डन सरवन कुमार को एक कैदी से पांच हजार रुपये की रिश्वत मांगने के आरोप में गिरफ्तार किया था। दरअसल, अपहरण मामले में सजा काट रहे कैदी संदीप कुमार ने अपनी ड्यूटी बदलवाने के लिए वार्डन सरवन से गुहार लगाई थी। इस पर सरवन ने संदीप की विजिटर रूम में ड्यूटी लगा दी थी। इसके बदले आरोपी ने अपने घर में वाटर प्यूरीफायर लगाने के लिए पांच हजार रुपये की रिश्वत मांगी। संदीप के साथ अन्य कैदी प्रेम सिंह बिष्ट भी जेल में बंद था। प्रेम सिंह बिष्ट ने अपने भाई प्रताप सिंह बिष्ट को बताया था कि जेल में वार्डन कैदी संदीप से पांच हजार रुपये की रिश्वत मांग रहा है। इसके बाद प्रताप सिंह बिष्ट ने मामले की सूचना सीबीआई को दे दी।
विज्ञापन
संदीप ने वार्डन सरवन को रिश्वत की रकम लेने के लिए प्रताप सिंह का मोबाइल नंबर दे दिया और कहा कि वह उसका भाई है और वही उसे पैसे देगा। संदीप के कहने पर सरवन ने प्रताप को फोन किया और स्कूल के पास मिलने के लिए बुलाया। जैसे ही सरवन वहां पहुंचा तो सीबीआई ने जाल बिछाकर दोषी सरवन को सेक्टर-45 के सरकारी स्कूल के सामने से रिश्वत लेते रंगेहाथ दबोच लिया।
विज्ञापन