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Chandigarh News: करोड़ों के बैंकिंग घोटाले में एचपीजीसीएल के पूर्व वित्त निदेशक को जमानत

Sun, 14 Jun 2026 02:22 AM IST
Chandigarh Bureau चंडीगढ़ ब्यूरो
Updated Sun, 14 Jun 2026 02:22 AM IST
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Former Finance Director of HPGCL granted bail in multi-crore banking scam.
चंडीगढ़। हरियाणा और चंडीगढ़ से जुड़े करोड़ों रुपये के बैंकिंग घोटाले में आरोपी हरियाणा पावर जेनरेशन कॉरपोरेशन लिमिटेड (एचपीजीसीएल) के तत्कालीन वित्त निदेशक अमित देवान को पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिली है। अदालत ने उनकी नियमित जमानत मंजूर करते हुए कहा कि आर्थिक अपराध निस्संदेह गंभीर होते हैं लेकिन केवल आरोपों के आधार पर किसी व्यक्ति को अनिश्चितकाल तक जेल में नहीं रखा जा सकता। हाईकोर्ट ने कहा कि जांच का बड़ा हिस्सा पूरा हो चुका है और आरोपी के खिलाफ कथित अवैध धन का कोई प्रत्यक्ष मनी ट्रेल सामने नहीं आई है।
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जस्टिस संदीप मोदगिल की पीठ ने 12 जून को पारित आदेश में अमित देवान की दोनों जमानत याचिकाएं स्वीकार करते हुए उन्हें संबंधित दोनों मामलों में नियमित जमानत पर रिहा करने के निर्देश दिए। मामला हरियाणा और चंडीगढ़ की सरकारी संस्थाओं के खातों से जुड़े कथित बैंकिंग घोटाले का है। पहला मामला एचपीजीसीएल तथा अन्य सरकारी संस्थाओं के खातों से जुड़ा है जिसमें आईडीएफसी फर्स्ट बैंक और एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक के माध्यम से सार्वजनिक धन के दुरुपयोग का आरोप लगाया गया। दूसरा मामला चंडीगढ़ की सीआरईएसटी (सीआरईएसटी) संस्था के खातों में कथित अनियमित लेन-देन से संबंधित है। बाद में दोनों मामलों की जांच सीबीआई को सौंप दी गई। सीबीआई ने अमित देवान को 18 मार्च 2026 को गिरफ्तार किया था। तब से वह न्यायिक हिरासत में थे। देवान की ओर से पेश हुए सीनियर एडवोकेट सलिल देव सिंह बाली ने दलील दी कि उन्हें मूल एफआईआर में नामजद तक नहीं किया गया था और जांच के शुरुआती चरण में उनके खिलाफ कोई विशिष्ट आरोप भी नहीं था। उन्होंने कहा कि खातों के संचालन या सरकारी धन निवेश का अंतिम अधिकार उनके पास नहीं था और सभी प्रस्ताव उच्च अधिकारियों तथा प्रबंध निदेशक की मंजूरी से गुजरते थे।
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सीबीआई और शिकायतकर्ता बैंक ने दावा किया कि अमित देवान कथित साजिश का महत्वपूर्ण हिस्सा थे और उन्होंने सरकारी धन को निजी बैंक खातों में स्थानांतरित कराने में सक्रिय भूमिका निभाई। सीबीआई ने दिवंगत कर्मचारी बलवंत सिंह के कथित सुसाइड नोट का भी हवाला देते हुए कहा कि उसमें देवान की भूमिका का उल्लेख किया गया है। हाईकोर्ट ने कहा कि व्यापक जांच और लंबी हिरासत के बावजूद अमित देवान के खिलाफ कथित घोटाले से जुड़े धन का कोई प्रत्यक्ष मनी ट्रेल नहीं मिला है। रिकॉर्ड से स्पष्ट है कि ऐसे प्रस्तावों को प्रबंध निदेशक की मंजूरी भी आवश्यक थी लेकिन प्रबंध निदेशक को आरोपी नहीं बनाया गया। पीठ ने कहा कि मुकदमे के निष्कर्ष तक किसी व्यक्ति को लंबे समय तक जेल में रखना उसके संवैधानिक अधिकारों, विशेषकर अनुच्छेद-21 के तहत प्राप्त व्यक्तिगत स्वतंत्रता के अधिकार, के विपरीत होगा।
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