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बेअंत सिंह का हत्यारा बना अकाल तख्त का जत्थेदार

Sat, 14 Nov 2015 03:43 PM IST
पंकज शर्मा/अमर उजाला, अमृतसर
पंकज शर्मा/अमर उजाला, अमृतसर Updated Sat, 14 Nov 2015 03:43 PM IST
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former cm beant singh murderer Beant assassin chosen Akal Takht chief

पंजाब में हाल के दिनों में श्री गुरु ग्रंथ साहिब की बेअदबी समेत अन्य घटनाओं के विरोध में पंथक संगठनों की ओर से मंगलवार को बुलाए गए ‘सरबत खालसा’ में तीन तख्तों के जत्थेदारों को हटाने का एलान कर दिया गया।

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आमराय से पारित प्रस्ताव में श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार ज्ञानी गुरबचन सिंह, तख्त दमदमा साहिब के जत्थेदार गुरमुख सिंह और तख्त केसगढ़ साहिब के जत्थेदार ज्ञानी मल सिंह को उनके पदों से हटाने की घोषणा की गई।
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प्रस्ताव में पूर्व मुख्यमंत्री बेअंत सिंह के हत्यारे जगतार सिंह हवारा को श्री अकाल तख्त साहिब का जत्थेदार नियुक्त किया गया है। हवारा की गैरहाजिरी में पूर्व सांसद ध्यान सिंह मंड श्री अकाल तख्त साहिब के कार्यवाहक जत्थेदार के रूप में काम देखेंगे। इसी तरह दमदमा टकसाल अजनाला के मुखी अमरीक सिंह को तख्त केसगढ़ साहिब और बलजीत सिंह दादूवाल को तख्त दमदमा साहिब का जत्थेदार बनाने का एलान किया गया।
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केपीएस गिल और बराड़ तनखैया घोषित
सरबत खालसा के दौरान पेश किए 13 प्रस्तावों में पंजाब के पूर्व पुलिस प्रमुख केपीएस गिल और सेना के रिटायर्ड अधिकारी कुलदीप सिंह बराड़ को तनखैया घोषित करते हुए दोनों को 30 नवंबर को श्री अकाल तख्त साहिब पर पेश होने की हिदायत दी गई है।

साथ ही पंजाब के मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल से फख्र-ए-कौम और पंथ रत्न अवार्ड वापस लेने की घोषणा की गई। वहीं एसजीपीसी के अध्यक्ष अवतार सिंह मक्कड़ से भी शिरोमणि पंथ रत्न का अवार्ड वापस लेने की बात कही गई है।

13 अप्रैल 2016 को अगला सरबत खालसा बुलाने का फैसला

former cm beant singh murderer Beant assassin chosen Akal Takht chief

पंथक संकट को हल करने के लिए सिख संगठनों की ओर से बुलाई गई बैठक को सरबत खालसा कहा जाता है। इसमें लिए गए फैसले को मानने के लिए तख्त साहिब के जत्थेदार कौम को आदेश देते हैं।

सरबत खालसा श्री अकाल तख्त साहिब या किसी अन्य तख्त पर ही बुलाया जाता है। लेकिन एसजीपीसी से मंजूरी नहीं मिलने के बाद अमृतसर के चब्बा में इसका आयोजन किया गया।

एक अन्य प्रस्ताव के तहत केंद्र सरकार से मांग की गई है कि एसजीपीसी की मौजूदा कार्यकारिणी भंग करके इसके तुरंत नए चुनाव करवाए जाएं।

एक और प्रस्ताव पारित करके 26 जनवरी 1986 को बुलाए गए सरबत खालसा में पास सभी प्रस्तावों को लागू करने का फैसला भी किया गया। इसके अलावा 13 अप्रैल 2016 को अगला सरबत खालसा बुलाने का फैसला लिया गया है।

राजनीतिक दलों ने सरबत खालसा पर ये दी प्रतिक्रिया

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पूर्व सीएम कैप्टन अमरिंदर सिंह
लोकसभा में कांग्रेस के उपनेता और पंजाब के पूर्व सीएम कैप्टन अमरिंदर सिंह ने सिख समुदाय के मौजूदा हालातों के लिए मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल को जिम्मेदार ठहराया है। उन्होंने लोगों से अपील की है कि ऐसा कोई कदम न उठाएं, जिससे सिख संस्थानों की पवित्रता और सर्वोच्चता को चोट पहुंचे।

वह भी सिर्फ इसलिए कि उनका नियंत्रण बादल जैसे कुछ गलत लोगों के हाथों में है। कैप्टन ने कहा कि जत्थेदारों की नियुक्तियां करना एसजीपीसी का अधिकार है, लेकिन मौजूदा एसजीपीसी बादल के नियंत्रण में है। इसलिए नए सिरे से एसजीपीसी के चुनाव कराए जाने चाहिए।

शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के अध्यक्ष अवतार सिंह मक्कड़
शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के अध्यक्ष अवतार सिंह मक्कड़ ने कहा कि एसजीपीसी ही सिख कौम की सर्वोच्च संस्था है। इसलिए कुछ संगठनों की ओर से कुछ तख्तों के जत्थेदारों के नामों के एलान को एसजीपीसी मान्यता नहीं देती है। इस आयोजन को भी एसजीपीसी से मान्यता नहीं है।

मक्कड़ ने कहा कि कुछ राजनीतिक संगठनों की ओर से किया गया यह आयोजन सिख सिद्धांतों से रहित था। इनमें कोई भी ऐसी पंथक जत्थेबंदी या पंथक संगत शामिल नहीं थी, जो गुरु पंथ के सिद्धांतों को मानती हो। उन्होंने कहा कि जत्थेदारों को नियुक्त करने की एक विशेष विधि है। सिर्फ एक गांव में कार्यक्रम आयोजित करके किसी जत्थेदार की नियुक्ति नहीं की जा सकती।

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