फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Chandigarh ›   formar cm bhupinder singh hooda raised questions on dhingra commission

ढींगरा आयोग को लेकर हुड्डा हुए आक्रामक, BJP सरकार पर सवालों की बौछार

Mon, 24 Apr 2017 12:02 PM IST
विवेक शर्मा/अमर उजाला, चंडीगढ़
विवेक शर्मा/अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Mon, 24 Apr 2017 12:02 PM IST
विज्ञापन
formar cm bhupinder singh hooda raised questions on dhingra commission
भूपेंद्र सिंह हुड्डा और मनोहर लाल खट्टर - फोटो : फाइल फोटो
ढींगरा आयोग के गठन को चुनौती देने वाली याचिका पर सौंपे गए हलफनामे पर पूर्व मुख्यमंत्री हुड्डा ने आक्रामक तेवर दिखाए और सरकार को घरा। हुड्डा ने हरियाणा सरकार कार्मिक विभाग के सचिव नितिन कुमार यादव द्वारा सौंपे गए हलफनामे पर अपनी लिखित प्रतिक्रिया हाईकोर्ट में सौंपते हुए कहा कि यादव ने आयोग के गठन की 14 मई बताई है और इसी दिन कैबिनेट से अप्रूव होने की बात कही है जबकि आयोग का गठन 13 मई को हुआ था।
विज्ञापन


ऐसे में हुड्डा ने सरकार के हलफनामे को झूठा और तथ्य विहीन करार दिया है। इससे पहले यादव ने हरियाणा सरकार की ओर से सीएम द्वारा आयोग केगठन के निर्णय का बचाव किया था। उन्होंने कहा था कि ऐसा नहीं है कि कैबिनेट के सामने बिना कोई मैटीरियल रखे आयोग के गठन को केवल नोटिफिकेशन के माध्यम से मंजूरी दी गई थी। मुख्यमंत्री ने 13 मई 2015 को सीएलयू मामले की जांच के लिए आयोग के  गठन का फैसला लिया था।
विज्ञापन


इन आदेशों की प्रति और आयोग के गठन के लिए मैटीरियल दोनों यादव के कार्यालय में 14 मई को प्राप्त हुए। इन सभी को काउंसिल ऑफ मिनिस्टर्स के सामने पेश किया गया और कैबिनेट ने विचार करने के बाद इसे मंजूरी दे दी। इस पर हुड्डा ने अपनी लिखित प्रतिक्रिया में कहा कि यादव के हलफनामे से साफ है कि यह मंजूरी 14 मई को दी गई थी जबकि आयोग का गठन 13 मई को किया गया था। ऐसे में बिना कैबिनेट के सामने कोई मैटीरियल रखे आयोग का गठन किया गया है, याची की यह दलील सही है।
विज्ञापन
विज्ञापन

मैटीरियल अलग होने पर हुड्डा ने हैरानी जताई

formar cm bhupinder singh hooda raised questions on dhingra commission
भूपेंद्र सिंह हुड्डा
वहीं हुड्डा ने अपने हलफनामे में कहा कि यादव ने कैबिनेट के सामने रखे गए मैटीरियल को 8 खंडों में विभाजित होने की बात कही थी जबकि ऐसा कोई मैटीरियल था ही नहीं। यदि ऐसा कोई मैटीरियल होता तो उस समय उसकी नोटिंग होती और उस पर नंबरिंग होती।

वहीं यादव के मैटीरियल वाले पक्ष पर हुड्डा ने कहा कि कभी भी दस्तावेज अलग लिफाफे में नहीं रखे जाते हैं, फिर क्यों इसमें अलग कोई एनवलप इन दस्तावेजों के लिए रखा गया। आयोग गठन के आदेश, नोटिफिकेशन और अन्य दस्तावेज अलग और जांच आयोग गठन पर विचार के लिए मैटीरियल अलग होने पर हुड्डा ने हैरानी जताई।

यह है मामला
पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर ढींगरा आयोग के गठन को चुनौती दी थी। हुड्डा ने कहा था कि कमीशन ऑफ इंक्वायरी एक्ट के तहत इस आयोग का गठन नहीं हुआ है ऐसे में इसे खारिज किया जाए। इसके लिए कैबिनेट की मंजूरी का प्रावधान है,

लेकिन महज मुख्यमंत्री ने एक नोट लिखकर यह फैसला ले लिया जो उनके अधिकार क्षेत्र में ही नहीं आता है। महज अखबारों में छपी ख़बरों के आधार पर ये आयोग गठित किया गया जो गलत है। हाईकोर्ट इस मामले में स्पष्ट कर चुका है कि अगले आदेशों तक इस आयोग की रिपोर्ट को सार्वजनिक नहीं किया जाएगा।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed