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Diabetic foot: डायबिटीक फुट से बचना है तो दोपहर को खाना खाने के बाद ही खरीदें जूते

Tue, 15 Nov 2022 01:37 AM IST
ajay kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: ajay kumar Updated Tue, 15 Nov 2022 01:37 AM IST
सार

देश में मधुमेह ग्रस्त 25 से 30 प्रतिशत मरीजों के पैर में परेशानी होती है जबकि जागरूकता के आधार पर उनमें से 90 प्रतिशत मरीजों के पैर को कटने से बचाया जा सकता है। डॉ. जिंदल ने बताया कि सरकारी आंकड़ों के अनुसार प्रति वर्ष डायबिटिक फुट के कारण देश में डेढ़ लाख पैर काटने पड़ रहे हैं।

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Follow these measures to avoid the problem of diabetic foot
डायबिटिक फुट। - फोटो : istock

विस्तार

अगर आप मधुमेह के मरीज हैं और इस बात का डर सता रहा है कि कहीं डायबिटिक फुट के शिकार न हो जाएं तो कुछ महत्वपूर्ण बातों को ध्यान में रखना होगा। इनमें सबसे जरूरी है कि सुबह और रात के समय कभी अपने लिए जूता न खरीदें। दोपहर को खाना खाने के बाद ही जूता खरीदने जाएं क्योंकि उस वक्त पैर सामान्य स्थित में होते हैं जबकि सुबह सामान्य से पतले और रात को पैर सामान्य से मोटे हो जाते हैं। ऐसी स्थिति में खरीदा गया जूता पैर में घाव का कारण बनता है और यह डायबिटिक फुट का सबसे बड़ा जिम्मेदार कारक है। 

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यह जानकारी वैस्कुलर सोसाइटी फॉर लिम्ब सेल्विज के अध्यक्ष डॉ. रावुल जिंदल ने विश्व मधुमेह दिवस के अवसर पर सोमवार को प्रेस क्लब में दी। उन्होंने बताया कि कई बार पैर का एक छोटा सा घाव मधुमेह के मरीज को 24 घंटे के अंदर आईसीयू में पहुंचा देता है इसलिए इसे लेकर सचेत रहने की जरूरत है क्योंकि देश में मधुमेह ग्रस्त 25 से 30 प्रतिशत मरीजों के पैर में परेशानी होती है जबकि जागरूकता के आधार पर उनमें से 90 प्रतिशत मरीजों के पैर को कटने से बचाया जा सकता है। डॉ. जिंदल ने बताया कि सरकारी आंकड़ों के अनुसार प्रति वर्ष डायबिटिक फुट के कारण देश में डेढ़ लाख पैर काटने पड़ रहे हैं जबकि इसके मरीजों की संख्या तीन लाख से ज्यादा है। 
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पैरों को कटने से बचाना है तो इसका रखें ध्यान 

  • खाना कम खाएं और व्यायाम ज्यादा करें 
  • धूम्रपान, शराब का सेवन न करें 
  • ब्लड प्रेशर को नियंत्रित रखें 
  • सोने से पहले पैरों के तलवों को चेक करें क्योंकि बीमारी के कारण न्यूरोपैथी से पैरों में स्पर्श की क्षमता कम हो जाती है। अगर पैर में कुछ चुभा हो तो उसे तत्काल निकाल लें 
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  • नाखून को हमेशा सीधे काटें, घुमावदार काटने पर किनारे पर घाव बनने का खतरा रहता है 
  • चमड़े के जूते की जगह स्पोर्ट्स शूज पहनें 
  • कॉटन के मोजे ही पहनें 


आंखों की सुरक्षा का भी रखें ध्यान 
विश्व मधुमेह दिवस के मौके पर चिराग संस्था की ओर से सेक्टर-35 स्थित आईएमए कांप्लेक्स में एक जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। इसमें प्रो. जगतराम (पीजीआई के पूर्व निदेशक ), डॉ. एमआर डोगरा (नेत्र विभाग के पूर्व प्रमुख) और डॉ. एसपीएस ग्रेवाल (सीईओ, जीईआई) मौजूद रहे। इस दौरान डॉक्टरों ने मधुमेह के मरीजों के लिए नियमित और विस्तृत फंडस जांच को महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने बताया कि जब किसी व्यक्ति में पहली बार मधुमेह होने का पता चलता है तो पहले फंडस जांच की जानी चाहिए।



विशेषज्ञों ने बताया कि 25 वर्षों तक मधुमेह के बाद व्यावहारिक रूप से सभी को मधुमेह संबंधी रेटिनोपैथी होने की आशंका होती है। मधुमेह संबंधी रेटिनोपैथी विशेष रूप से टाइप 2 मधुमेह में यूएसए में अंधेपन का प्रमुख कारण है और भारत में भी ऐसा ही हो रहा है। प्रो. जगतराम ने बताया कि डायबिटिक रेटिनोपैथी के रोगियों को मल्टीफोकल इंट्रोक्युलर लेंस से बचना चाहिए। वहीं डॉक्टर मोतियाबिंद सर्जरी के बाद दृष्टि में संभावित कमी के बारे में रोगी को हमेशा सूचित करें। डायबिटिक रेटिनोपैथी की देरी से पहचान और प्रस्तुति सभी प्रकार के उपचार के बावजूद स्थायी दृष्टि हानि या अंधेपन का कारण बनती है।

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