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5 महिलाएं करेंगी आत्मदाह, अफसरशाही में हड़कंप, वजह चौंकाने वाली
ब्यूरो/अमर उजाला, लुधियाना
Updated Thu, 15 Sep 2016 07:18 PM IST
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Protest at CM House
- फोटो : अमर उजाला
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पांच महिलाओं ने सीएम हाउस के सामने आत्मदाह करने का ऐलान किया है। यह खबर फैलते ही प्रशासन अधिकारियों में हड़कंप मच गया। मामला पंजाब के लुधियाना का है। सिख दंगा पीड़ित वेलफेयर सोसाइटी ने एलान किया है कि यदि सरकार ने शुक्रवार तक अफसरशाही की लगाम न खींची तो 17 सितंबर को मरणव्रत पर बैठीं पांचों महिलाएं सीएम प्रकाश सिंह बादल की कोठी के सामने आत्मदाह कर लेंगी।
वीरवार को मिनी सचिवालय में आयोजित कांफ्रेंस में प्रधान सुरजीत सिंह ने कहा कि अफसरशाही दंगा पीड़ितों के मामले में टालमटोल कर रही है। सोसाइटी की महिला विंग की प्रधान गुरदीप कौर के नेतृत्व में गुरमेल कौर, भूपिंदर कौर, सुरजीत कौर और गुरदेव कौर चार दिन से डीसी आफिस के बाहर मरणव्रत पर बैठी हुई हैं। बीबी गुरदीप कौर ने कहा कि एक विशाल काफिले के रूप में पंजाब भर के दंगा पीड़ित परिवार चंडीगढ़ के लिए रवाना होंगे। वह अपने साथ कफन और मिट्टी के तेल की कैनियां भी लेकर जाएंगी।
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वीरवार को मिनी सचिवालय में आयोजित कांफ्रेंस में प्रधान सुरजीत सिंह ने कहा कि अफसरशाही दंगा पीड़ितों के मामले में टालमटोल कर रही है। सोसाइटी की महिला विंग की प्रधान गुरदीप कौर के नेतृत्व में गुरमेल कौर, भूपिंदर कौर, सुरजीत कौर और गुरदेव कौर चार दिन से डीसी आफिस के बाहर मरणव्रत पर बैठी हुई हैं। बीबी गुरदीप कौर ने कहा कि एक विशाल काफिले के रूप में पंजाब भर के दंगा पीड़ित परिवार चंडीगढ़ के लिए रवाना होंगे। वह अपने साथ कफन और मिट्टी के तेल की कैनियां भी लेकर जाएंगी।
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सिख दंगा पीड़ित करेंगे आत्मदाह
CM Badal
- फोटो : फाइल फोटो
मरणव्रम पर बैठी महिलाओं का कहना है कि मुख्यमंत्री इतने बेबस हो गए है कि उनके कंट्रोल में न तो राज्य की अफसरशाही हैं और न ही वे मानी हुई मांगों को लागू करवाने के समर्थ हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि रास्ते में सरकार की शह पर पुलिस ने उनको रोकने का प्रयास किया तो वह वहीं पर आत्मदाह कर लेंगी।
उन्होंने कहा कि वे चार दिन से मरणव्रत पर बैठी हुई हैं, लेकिन न तो सरकार और न ही जिला प्रशासन ने उनका हालचाल पूछा। प्रधान सुरजीत सिंह ने कहा कि चार बार 1984 के दंगों के मुद्दे पर मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल ने सरकार बनाई। उन्होंने रोष जताया कि जब भी पंजाब या अन्य राज्यों में चुनाव का बिगुल बजता है, उस वक्त 84 के दंगों को कैश करने से अकाली नहीं चूकते। सत्ता में आते ही उनके साथ सौतेला व्यवहार होता है। अनदेखी से समूह दंगा पीड़ित परिवारों में रोष बढ़ता जा रहा है।
इस अवसर पर गुरदेव सिंह, जगीर सिंह, हरनेक सिंह दीवाना, कश्मीर सिंह, बिक्कर सिंह, तेजिंदर सिंह, मनजीत सिंह चावला, सतनाम सिंह सत्ता, अमरजीत सिंह राजपाल और मनमोहन सिंह पप्पू समेत कई लोग मौजूद रहे।
उन्होंने कहा कि वे चार दिन से मरणव्रत पर बैठी हुई हैं, लेकिन न तो सरकार और न ही जिला प्रशासन ने उनका हालचाल पूछा। प्रधान सुरजीत सिंह ने कहा कि चार बार 1984 के दंगों के मुद्दे पर मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल ने सरकार बनाई। उन्होंने रोष जताया कि जब भी पंजाब या अन्य राज्यों में चुनाव का बिगुल बजता है, उस वक्त 84 के दंगों को कैश करने से अकाली नहीं चूकते। सत्ता में आते ही उनके साथ सौतेला व्यवहार होता है। अनदेखी से समूह दंगा पीड़ित परिवारों में रोष बढ़ता जा रहा है।
इस अवसर पर गुरदेव सिंह, जगीर सिंह, हरनेक सिंह दीवाना, कश्मीर सिंह, बिक्कर सिंह, तेजिंदर सिंह, मनजीत सिंह चावला, सतनाम सिंह सत्ता, अमरजीत सिंह राजपाल और मनमोहन सिंह पप्पू समेत कई लोग मौजूद रहे।