फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Chandigarh ›   First transplanted tree of Chandigargh completed five years

गजब: पांच साल पहले आंधी में उखड़ गया था पेड़, इस शख्स ने दोबारा भर दी जान

Sun, 13 Sep 2020 02:54 PM IST
ajay kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: ajay kumar Updated Sun, 13 Sep 2020 02:54 PM IST
विज्ञापन
First transplanted tree of Chandigargh completed five years
पांच साल का हुआ चंडीगढ़ का पहला प्रत्यारोपित पेड़। - फोटो : अमर उजाला

चंडीगढ़ के पहले प्रत्यारोपित पिल्खन के पेड़ ने अपने नए जीवन के पांच साल पूरे कर लिए हैं। पेड़ में अब नई शाखाएं आ चुकी हैं, जो धीरे-धीरे बढ़ रही हैं। इन पांच सालों में इस पेड़ की काफी देखभाल हुई है। समय-समय पर पानी और दीमक से बचाने के लिए दवा डाली गई। पांच साल पहले सितंबर के महीने में तेज आंधी व बारिश के बाद सेक्टर आठ मध्य मार्ग में लगा पिल्खन का पेड़ जड़ से उखड़ गया था। उसके बाद उसे सेक्टर-26 स्थित चौक पर प्रत्यारोपित (ट्रांसप्लांट) कर दिया गया था।

विज्ञापन


इस पेड़ को प्रत्यारोपित करने वाले राहुल महाजन ने बताया कि आज से पांच साल पहले इस पेड़ की उम्र करीब 60 से 65 साल रही होगी। उम्मीद है कि अगले पांच सालों में यह पेड़ और बढ़ेगा। हालांकि सब कुछ देखभाल पर निर्भर करता है। उन्होंने बताया कि पेड़ के प्रत्यारोपण के एक साल बाद तक काफी मेहनत करनी पड़ती है।
विज्ञापन


आज इस पेड़ को देखकर काफी खुशी होती है और उम्मीद बंधती है कि विकास के नाम पर जो पेड़ उखाड़ दिए जाते हैं, उन्हें प्रत्यारोपित कर नई जिंदगी दी जा सकती है। हालांकि राहुल महाजन ने भी पहली बार इतने बड़े पेड़ को प्रत्यारोपित किया था। उन्होंने बताया कि भारत सरकार भी अब पेड़ों के प्रत्यारोपण पर नई पॉलिसी बनाने जा रही है। इस संबंध में देहरादून का वन अनुसंधान संस्थान नीति भी बना रहा है।
विज्ञापन
विज्ञापन


इस पेड़ के बाद शहर में शुरू हुई मुहिम
जब यह पेड़ प्रत्यारोपित किया गया तो उस समय किसी को उम्मीद नहीं थी कि इसे नया जीवन मिलेगा। जब यह पेड़ बढ़ने लगा तो इससे हौसला बढ़ा और शहर में पेड़ों को प्रत्यारोपित करने की मुहिम शुरू हो गई। राहुल महाजन ने इन पांच सालों में चंडीगढ़ में 150 से ज्यादा पेड़ों को प्रत्यारोपित किया।

इनमें से करीब 80 फीसदी पेड़ों को नया जीवन मिला है। चंडीगढ़ के अलावा भी उन्होंने पंजाब के कई शहरों में पेड़ों के प्रत्यारोपण को अंजाम दिया है। पीजीआई में 20 पेड़ों को भी प्रत्यारोपित किया जाना है। इस मुहिम के बाद नगर निगम, चंडीगढ़ प्रशासन ने भी पेड़ों को प्रत्यारोपित करना शुरू कर दिया है।


85 फीसदी पेड़ रहते हैं जीवित
पेड़ों के प्रत्यारोपण में गुजरात वन विभाग काफी सक्रिय रहा है। वह पिछले एक दशक से पेड़ों का प्रत्यारोपण कर रहे हैं। उनके मुताबिक प्रत्यारोपण के बाद 85 फीसदी पेड़ जीवित रहते हैं। पेड़ कटने के बाद उसकी जगह नए पौधे को पेड़ बनने में काफी समय लगता है। ऐसी स्थिति में प्रत्यारोपण एक अच्छा विकल्प हो सकता है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed