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अमित शाह की पहली 'परीक्षा' को मैदान तैयार

Thu, 10 Jul 2014 05:26 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Thu, 10 Jul 2014 05:26 PM IST
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first litmus test of Amit Shah will be in Haryana

भाजपा के नव निर्वाचित राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह की अब पहली अग्नि परीक्षा हरियाणा में होगी। प्रदेश विधानसभा के चुनाव निकट हैं और भाजपा के सामने मुश्किल यह है कि उसके पास अभी तक ऐसा ‘चेहरा’ नहीं है, जिसके नेतृत्व में सूबे में चुनावी महाभारत लड़ा जा सके।

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हालांकि 14 वीं लोकसभा के महासमर में 10 में से सात सीटें पाने वाली हरियाणा भाजपा विधानसभा चुनाव को लेकर अति आत्मविश्वास में दिख रही है। पार्टी को सत्ता सिंहासन बहुत करीब दिखाई देने लगा है। लेकिन लोकसभा चुनाव में उत्तर प्रदेश से अप्रत्याशित चुनाव नतीजे दिलाने के सूत्रधार रहे अमित शाह के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह है कि यहां हालात ‘एक अनार सौ बीमार’ वाली है।
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शाह को उस ‘बीमार’ को चुनना है, जिसे वे ‘अनार’ दे सकें। क्योंकि चुनावी जंग में मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा के नेतृत्व में कांग्रेस तथा ओम प्रकाश चौटाला के नेतृत्व में इंडियन नेशनल लोकदल चुनावी ताल ठोकते दिखेंगे। ऐसे में शाह पर मुख्यमंत्री उम्मीदवार पेश करने का दबाव बढ़ना तय है।

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पहली चुनौती ‘चेहरा’ तलाशने की

first litmus test of Amit Shah will be in Haryana

दिल्ली विधानसभा चुनाव में डा.हर्षवर्धन को अंतिम समय में मुख्यमंत्री उम्मीदवार घोषित करने का खामियाजा भाजपा को भुगतना पड़ा। इसलिए शाह के लिए हरियाणा में पहली चुनौती ‘चेहरा’ तलाशने की है।

वैसे भाजपा में कोशिश होती रही है कि यह चहेरा जाट समुदाय से हो। मुजफ्फरनगर कांड के बाद उत्तर प्रदेश के बाहर भी जाट समुदाय भाजपा के साथ जुड़ा है। हालांकि गैर जाट सुमदाय शुरू से भाजपा का साथ देता रहा है।

यही कारण है कि कुछ साल पहले हरियाणा जनहित कांग्रेस से गठबंधन करते समय भाजपा हाईकमान ने कहा था कि जब भी प्रदेश में चुनाव होंगे, सीएम उम्मीदवार कुलदीप बिश्नोई होंगे। हालांकि तब से राजनीतिक समीकरण बदल गए हैं और भाजपा के एक बड़ा वर्ग अब चुनाव में एकला चलो की वकालत कर रहा है।

हरियाणा में 'कमल' खिलने की उम्मीद

first litmus test of Amit Shah will be in Haryana

हरियाणा में भाजपा अब तक बंसीलाल अथवा देवीलाल और ओमप्रकाश चौटाला के साथ ही सत्ता का सुख लेती रही है। लेकिन 14वीं लोकसभा के नतीजों के बाद अब भाजपा को हरियाणा में कमल खिलने की उम्मीद है।

बहरहाल, लोकसभा चुनाव में तो शाह को मालूम था कि बीमार कौन है और अनार किसे देना है, लेकिन हरियाणा में ऐसा नहीं है। पार्टी को अब अगले दो-तीन माह के भीतर चुनाव मैदान में उतरना है। हरियाणा समेत महाराष्ट्र व दिल्ली से लेकर झारखंड, बिहार आदि प्रदेशों में शाह को अब ‘कमल’ खिलाने में जुटना है।

इनमें सबसे पहले हरियाणा व महाराष्ट्र् ही चुनाव होने हैं। भाजपा को उम्मीद है कि उत्तर प्रदेश की तरह हरियाणा में भी जाट समुदाय उसे लोकसभा की तरह इस बार भी समर्थन देगा। पार्टी के हरियाणा प्रभारी डा.जगदीश मुखी कहते हैं कि शाह की संगठनात्मक अनुभव का लाभ हरियाणा में जरूर मिलेगा।

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