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देश का पहला अनोखा मेमोरियल, जहां 1947 से अब तक शहीदों का पूरा इतिहास

Wed, 11 Oct 2017 09:03 AM IST
रघु आदित्य/अमर उजाला, चंडीगढ़
रघु आदित्य/अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Wed, 11 Oct 2017 09:03 AM IST
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first indian online memorial for biographyof all martyrs
online memorial
देश का पहला ऐसा अनोखा मेमोरियल तैयार किया गया है, जहां 1947 से लेकर अब तक के शहीदों का इतिहास मौजूद है। हर वो जानकारी, जो सरकार के पास भी नहीं है। मेमोरियल बनाने वालों ने ऐसा दावा किया है। दरअसल, शहीदों की यादों को संजोने के लिए एयरफोर्स से सेवानिवृत्त हुए तीन दोस्तों ने देश का पहला ऑनलाइन मेमोरियल बनाया है।
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‘ऑनर प्वाइंट’ नाम के इस मेमोरियल पर शहीदों का पूरा इतिहास एक क्लिक पर उपलब्ध होगा। एयरफोर्स में 20 से 25 साल सेवा देने के बाद सेवानिवृत्त हुए बंगलूरू के एमए अफराज, बिहार के राजेंद्र प्रसाद और एलके चौबे को जब पता चला कि इंग्लैंड और अमेरिका जैसे देशों में शहीदों के लिए ऑनलाइन मेमोरियल होता है, जहां से लोग शहीदों के बारे में जानकारी लेते हैं तो इन्होंने इसे बनाने की ठानी। तीनों मित्रों ने विशेषज्ञों की मदद लेते हुए सैन्य बलों से जुड़ी सैकड़ों किताबें खंगालने के बाद इसे तैयार किया।
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इसमें वर्ष 1947 से अब तक के ज्यादातर शहीद शामिल हैं। तीनों मित्र बिना एक पैसा किसी से लिए अब तक इस पोर्टल को तैयार करने में 30 लाख रुपये खर्च कर चुके हैं। इसी साल अप्रैल में लांच हुए इस ऑनलाइन मेमोरियल पर अब तक 12,458 शहीदों के बारे में संपूर्ण जानकारी जुटाई जा चुकी है। पोर्टल नियमित अपडेट किया जा रहा है। शहीदों की प्रेरणादायक कहानियां भी इस पोर्टल पर उपलब्ध हैं।
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45 हजार लोग पोर्टल को कर रहे फॉलो

first indian online memorial for biographyof all martyrs
online memorial - फोटो : फाइल फोटो
ऑनलाइन मेमोरियल तैयार करने के दौरान तीनों मित्रों ने जल-थल-वायु सेना की वेबसाइट से भी जानकारियां जुटाईं और सैकड़ों शहीदों के परिवारों से संपर्क किया। तकरीबन 45 हजार लोग इस पोर्टल को फॉलो कर रहे हैं। हजारों लोग यहां अपने रियल हीरोज को श्रद्धांजलि दे रहे हैं। शहीदों के परिवार भी इस पोर्टल से जुड़ रहे हैं। कुछ शहीदों की प्रोफाइल तो खुद उनके परिजन खुद मेंटेन कर रहे हैं।

‘शहीद को कुछ ही समय में लोग भूलने लगते हैं। यदि किसी जगह उनकी याद में स्मारक बनाया जाता है तो वहां लोगों को पूरी जानकारी नहीं मिल पाती। ऐसे में ऑनलाइन मेमोरियल बनाया गया है। इसके लिए बंगलूरू में कार्यालय खोला गया है जहां 11 तकनीकी विशेषज्ञ काम करते हैं।’
- एमए अफराज (सेवानिवृत्त विंग कमांडर, इंडियन एयरफोर्स)
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