{"_id":"68fa4765e3b40830600acbd2","slug":"fir-cannot-be-considered-a-ground-for-withholding-annual-increment-chandigarh-news-c-16-1-pkl1098-851731-2025-10-23","type":"story","status":"publish","title_hn":"Chandigarh News: एफआईआर को वार्षिक वेतन वृद्धि रोकने का आधार नहीं माना जा सकता","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Chandigarh News: एफआईआर को वार्षिक वेतन वृद्धि रोकने का आधार नहीं माना जा सकता
विज्ञापन
-कर्मचारी पर केवल एफआईआर दर्ज होना नहीं माना जा सकता कदाचार
-वेतन वृद्धि पिछली अवधि के दौरान विधिवत प्रदान की गई सेवाओं की स्वीकृति
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने कहा है कि किसी कर्मचारी के विरुद्ध केवल प्राथमिकी दर्ज करना कदाचार नहीं माना जाता और इसलिए यह वार्षिक वेतन वृद्धि रोकने का वैध आधार नहीं हो सकता।
हाईकोर्ट ने कहा कि किसी कर्मचारी की ओर से अर्जित वेतन वृद्धि पिछली अवधि के दौरान विधिवत प्रदान की गई सेवाओं की स्वीकृति है। यह एक निहित अधिकार है जो कार्य निष्पादन के दौरान अर्जित होता है और भविष्य के आचरण के किसी भी मूल्यांकन से अलग है। प्रक्रियात्मक सुरक्षा उपायों को ध्यान में रखते हुए केवल प्राथमिकी दर्ज करना कदाचार या दोष के बराबर नहीं है। यह केवल भविष्य की जांच का एक संकेतक है जिसका परिणाम अनिश्चित रहता है। इस अस्थायी आधार पर वेतन वृद्धि रोकना निष्पक्षता के सिद्धांत का उल्लंघन करता है क्योंकि यह किसी व्यक्ति को बिना किसी निर्णायक निर्णय के दंडित करता है। केवल औपचारिक अनुशासनात्मक प्रक्रिया के बाद लगाया गया दंड ही वेतन वृद्धि रोकने का उचित आधार प्रदान करता है।
इससे यह सुनिश्चित होता है कि अनुशासनात्मक प्राधिकार की पवित्रता को बनाए रखते हुए कर्मचारियों को मनमाने ढंग से वंचित न किया जाए। प्रीतपाल सिंह ने टाइप टेस्ट सफलतापूर्वक उत्तीर्ण करने की तिथि से वार्षिक वेतन वृद्धि का लाभ प्रदान करने और साथ ही एफआईआर लंबित रहने के कारण परिवीक्षा अवधि की कथित रूप से स्वीकृति न मिलने के चलते 9 प्रतिशत प्रति वर्ष की दर से ब्याज देने की मांग की थी।
विज्ञापन
टेस्ट उत्तीर्ण करने की तिथि से वार्षिक वेतन वृद्धि दी जाए
याचिकाकर्ता के वकील ने तर्क दिया कि याचिकाकर्ता को उसके पिता के निधन के कारण अनुकंपा के आधार पर 20 सितंबर-2001 को पंजाब राज्य नागरिक आपूर्ति निगम लिमिटेड में क्लर्क के रूप में नियुक्त किया गया था और वह 15 अक्तूबर-2001 को सेवा में शामिल हुआ था। नियुक्ति पत्र में शामिल शर्तों में से एक टाइप टेस्ट पास करने से संबंधित है। हाईकोर्ट ने निर्देश दिया गया कि याचिकाकर्ता की ओर से टाइप टेस्ट उत्तीर्ण करने की तिथि से वार्षिक वेतन वृद्धि प्रदान की जाए और परिवीक्षा अवधि पूरी होने पर उसे स्थायी किया जाए और उसकी पदोन्नति और एसीपी योजना के मामले पर भी कानून के अनुसार विचार किया जाए।
विज्ञापन
-वेतन वृद्धि पिछली अवधि के दौरान विधिवत प्रदान की गई सेवाओं की स्वीकृति
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने कहा है कि किसी कर्मचारी के विरुद्ध केवल प्राथमिकी दर्ज करना कदाचार नहीं माना जाता और इसलिए यह वार्षिक वेतन वृद्धि रोकने का वैध आधार नहीं हो सकता।
हाईकोर्ट ने कहा कि किसी कर्मचारी की ओर से अर्जित वेतन वृद्धि पिछली अवधि के दौरान विधिवत प्रदान की गई सेवाओं की स्वीकृति है। यह एक निहित अधिकार है जो कार्य निष्पादन के दौरान अर्जित होता है और भविष्य के आचरण के किसी भी मूल्यांकन से अलग है। प्रक्रियात्मक सुरक्षा उपायों को ध्यान में रखते हुए केवल प्राथमिकी दर्ज करना कदाचार या दोष के बराबर नहीं है। यह केवल भविष्य की जांच का एक संकेतक है जिसका परिणाम अनिश्चित रहता है। इस अस्थायी आधार पर वेतन वृद्धि रोकना निष्पक्षता के सिद्धांत का उल्लंघन करता है क्योंकि यह किसी व्यक्ति को बिना किसी निर्णायक निर्णय के दंडित करता है। केवल औपचारिक अनुशासनात्मक प्रक्रिया के बाद लगाया गया दंड ही वेतन वृद्धि रोकने का उचित आधार प्रदान करता है।
विज्ञापन
इससे यह सुनिश्चित होता है कि अनुशासनात्मक प्राधिकार की पवित्रता को बनाए रखते हुए कर्मचारियों को मनमाने ढंग से वंचित न किया जाए। प्रीतपाल सिंह ने टाइप टेस्ट सफलतापूर्वक उत्तीर्ण करने की तिथि से वार्षिक वेतन वृद्धि का लाभ प्रदान करने और साथ ही एफआईआर लंबित रहने के कारण परिवीक्षा अवधि की कथित रूप से स्वीकृति न मिलने के चलते 9 प्रतिशत प्रति वर्ष की दर से ब्याज देने की मांग की थी।
विज्ञापन
टेस्ट उत्तीर्ण करने की तिथि से वार्षिक वेतन वृद्धि दी जाए
याचिकाकर्ता के वकील ने तर्क दिया कि याचिकाकर्ता को उसके पिता के निधन के कारण अनुकंपा के आधार पर 20 सितंबर-2001 को पंजाब राज्य नागरिक आपूर्ति निगम लिमिटेड में क्लर्क के रूप में नियुक्त किया गया था और वह 15 अक्तूबर-2001 को सेवा में शामिल हुआ था। नियुक्ति पत्र में शामिल शर्तों में से एक टाइप टेस्ट पास करने से संबंधित है। हाईकोर्ट ने निर्देश दिया गया कि याचिकाकर्ता की ओर से टाइप टेस्ट उत्तीर्ण करने की तिथि से वार्षिक वेतन वृद्धि प्रदान की जाए और परिवीक्षा अवधि पूरी होने पर उसे स्थायी किया जाए और उसकी पदोन्नति और एसीपी योजना के मामले पर भी कानून के अनुसार विचार किया जाए।