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Chandigarh News: छात्रवृत्ति मिलने से पहले नहीं भरनी होगी फीस, पीयू ने मानी विद्यार्थियों की मांग
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चंडीगढ़।
पीएमएस छात्रवृत्ति को लेकर धरने पर बैठे विद्यार्थियों की मांगें पीयू प्रशासन ने सोमवार को लिखित में मान ली हैं। इसी के साथ छात्र गौतम भोरिया ने भूख हड़ताल समाप्त की। आंबेडकर स्टूडेंट एसोसिएशन और अन्य छात्र संगठनों की मांग थी कि पंजाब के पीएमएस छात्रवृत्ति के विद्यार्थियों को पैसे मिलने से पहले फीस देने के लिए मजबूर न किया जाए।
सत्र 2023-24 तक पंजाब के एससी विद्यार्थी स्कॉलरशिप के पैसे मिलने के बाद ही फीस भरा करते थे लेकिन पिछले साल 19 अक्तूबर को हुई सिंडिकेट की बैठक में निर्णय लिया था कि क्योंकि स्कॉलरशिप के पैसे छात्रों के खाते में पड़ रहे हैं, वह समय रहते फीस अदा करें। सिंडिकेट के इस निर्णय को पीयू प्रशासन ने इस सत्र से लागू किया, जिसके तहत विभिन्न विभागों की ओर से विद्यार्थियों को छात्रवृत्ति मिलने से पहले ही समयसीमा के अंदर फीस जमा करने का दबाव बनाया जा रहा था। इस पर छात्र संगठन लगातार प्रदर्शन कर रहे थे और सोमवार को मांगें पूरी न होने पर वीसी का पुतला फूंकने की चेतावनी दी थी। विद्यार्थियों ने कुलपति कार्यालय के बाहर प्रदर्शन जरूर शुरु किया और एक छात्र को पीयू के गेट पर बैठक प्रदर्शन करते देखा गया।
पीयू प्रशासन ने एससी-एसटी सैल के को-ऑर्डिनेटर प्रो. जगतार सिंह, रजिस्ट्रार प्रो. वाईपी वर्मा, डीएसडब्ल्यू प्रो. अमित चौहान, डीएसडब्ल्यू वुमन प्रो. सिमृत काहलों समेत सात लोगों की बैठक बुलाई। बैठक में छात्रों की ओर से गौतम भोरिया और अमित बांगा शामिल रहे। पंजाब के एससी श्रेणी से आर्थिक रूप से कमजोर विद्यार्थियों की स्थिति को देखते हुए फीस पहले भरने के निर्णय को वापस लिया।
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बैठक में पीएमएस छात्रवृत्ति व्यवस्था को बेहतर करने, कैंपस में छात्रों को छात्रवृत्ति को लेकर जागरूक करने के लिए पोस्टर लगाने पर सहमति बनाई। विद्यार्थी को छात्रवृत्ति के पैसे मिलने के बाद लिखित में इसकी जानकारी विभाग को देनी होगी। समय रहते पैसे मिलने के बाद फीस भरनी होगी ताकि प्रशासन को भी वित्तीय नुकसान न हो। भूख हड़ताल पर बैठे गौतम भोरिया ने इसे विद्यार्थियों की जीत बताया।
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पीएमएस छात्रवृत्ति को लेकर धरने पर बैठे विद्यार्थियों की मांगें पीयू प्रशासन ने सोमवार को लिखित में मान ली हैं। इसी के साथ छात्र गौतम भोरिया ने भूख हड़ताल समाप्त की। आंबेडकर स्टूडेंट एसोसिएशन और अन्य छात्र संगठनों की मांग थी कि पंजाब के पीएमएस छात्रवृत्ति के विद्यार्थियों को पैसे मिलने से पहले फीस देने के लिए मजबूर न किया जाए।
सत्र 2023-24 तक पंजाब के एससी विद्यार्थी स्कॉलरशिप के पैसे मिलने के बाद ही फीस भरा करते थे लेकिन पिछले साल 19 अक्तूबर को हुई सिंडिकेट की बैठक में निर्णय लिया था कि क्योंकि स्कॉलरशिप के पैसे छात्रों के खाते में पड़ रहे हैं, वह समय रहते फीस अदा करें। सिंडिकेट के इस निर्णय को पीयू प्रशासन ने इस सत्र से लागू किया, जिसके तहत विभिन्न विभागों की ओर से विद्यार्थियों को छात्रवृत्ति मिलने से पहले ही समयसीमा के अंदर फीस जमा करने का दबाव बनाया जा रहा था। इस पर छात्र संगठन लगातार प्रदर्शन कर रहे थे और सोमवार को मांगें पूरी न होने पर वीसी का पुतला फूंकने की चेतावनी दी थी। विद्यार्थियों ने कुलपति कार्यालय के बाहर प्रदर्शन जरूर शुरु किया और एक छात्र को पीयू के गेट पर बैठक प्रदर्शन करते देखा गया।
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पीयू प्रशासन ने एससी-एसटी सैल के को-ऑर्डिनेटर प्रो. जगतार सिंह, रजिस्ट्रार प्रो. वाईपी वर्मा, डीएसडब्ल्यू प्रो. अमित चौहान, डीएसडब्ल्यू वुमन प्रो. सिमृत काहलों समेत सात लोगों की बैठक बुलाई। बैठक में छात्रों की ओर से गौतम भोरिया और अमित बांगा शामिल रहे। पंजाब के एससी श्रेणी से आर्थिक रूप से कमजोर विद्यार्थियों की स्थिति को देखते हुए फीस पहले भरने के निर्णय को वापस लिया।
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बैठक में पीएमएस छात्रवृत्ति व्यवस्था को बेहतर करने, कैंपस में छात्रों को छात्रवृत्ति को लेकर जागरूक करने के लिए पोस्टर लगाने पर सहमति बनाई। विद्यार्थी को छात्रवृत्ति के पैसे मिलने के बाद लिखित में इसकी जानकारी विभाग को देनी होगी। समय रहते पैसे मिलने के बाद फीस भरनी होगी ताकि प्रशासन को भी वित्तीय नुकसान न हो। भूख हड़ताल पर बैठे गौतम भोरिया ने इसे विद्यार्थियों की जीत बताया।