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चंडीगढ़ में सजा गया 'कलाग्राम', नेशनल क्राफ्ट मेले में छुट्टी के दिन उमड़े लोग, किया एन्जॉय
Mon, 18 Nov 2019 01:54 PM IST
पंचकुला ब्यूरो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: पंचकुला ब्यूरो
Updated Mon, 18 Nov 2019 01:54 PM IST
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कलाग्राम में क्राफ्ट मेला
- फोटो : अमर उजाला
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बॉलीवुड गायक कैलाश खेर के गीत.. देशभर से आए कलाकारों का लोक संगीत और खरीदारी के लिए मौजूद देशभर से आया क्राफ्ट। यह है चंडीगढ़ नेशनल क्राफ्ट मेला। इस मेले को देखने के लिए चंडीगढ़ के कलाग्राम में रविवार को छुट्टी के दिन जबदस्त भीड़ उमड़ी। इस मेला का आयोजन नॉर्थ जोन कल्चरल सेंटर पटियाला और चंडीगढ़ प्रशासन द्वारा किया जा रहा है। इस आयोजन में अमर उजाला मीडिया पार्टनर है।
इस साल उत्तर क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र (संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार) ने ट्राइसिटी प्रेमियों के उत्साह को देखते हुए 200 क्राफ्ट स्टॉल लगाए हैं। जातीय पोशाक, आभूषण और जूट के अलावा, नगालैंड से सूखे फूल, उत्तर प्रदेश के पीतल के बर्तन और कालीन, राजस्थान से टेराकोटा आइटम और कर्नाटक से लकड़ी की कलाकृतियां आगंतुक का ध्यान खींच रही हैं। पश्मीना और कश्मीर से शॉल बेचने वाले स्टॉल काफी लोकप्रिय हैं।
कोलकाता के स्टॉल नंबर 166 पर प्राकृतिक घास और कपास से बनी चटाइयां शहर की बात करती हैं। आप प्राकृतिक फाइबर से बने पर्दे भी खरीद सकते हैं। राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता आलोक कुमार ने बताया कि एक चटाई की बुनाई में एक दिन का समय लगता है। इस मेले में वह 50 से 2,000 रुपये तक चटाइयां लाए हैं। उनके पास 60,000 से अधिक मूल्य की भी चटाइयां हैं। इसमेें एक पतली चटाई भी है।
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इसमें पर्यावरणविद, कलाकार डॉ. आशा अर्पित ने लोगों को प्रेरित करने के लिए एक फोटो प्रदर्शनी स्किल इंडिया क्राफ्ट रखी है। कलाकार जागरूकता लाना चाहती हैं ताकि लोग शिल्प और हथकरघा उत्पादों को बनाने में लगने वाली मेहनत और लागत को पहचान सकें। वह कहती हैं कि खरीदारों को मोलभाव करने से बचना चाहिए।
ललित कला अकादमी ने जयपुर से विनय शर्मा के कार्यों को एक मंडप में लगाया है। शर्मा एक लाइव शो ‘रिदमिक पास्ट’ भी दिखाते हैं जो कि अतीत की चीजों पर जोर देता है। इस स्थल पर कागज से बनी मूर्तियां हैं जो लगभग 200 वर्ष पुरानी हैं। इस आयोजन में कश्मीर से लेकर तमिलनाडु और राजस्थान से लेकर मणिपुर तक के लोक नर्तक हैं। इस मौके पर दो नुक्कड़ नाटक पेश किए गए।
रंगीला पान भी है यहां
सहारनपुर, उत्तर प्रदेश से रंगीला पान प्वाइंट द्वारा परोसा गया पान एकदम खास है। यह पान चॉकलेट, आम, अमरूद, स्ट्रॉबेरी और अनानास के साथ कई प्रकार के स्वाद में है। रिहान ने कहा कि वह 32 प्रकार के माउथ फ्रेशनर्स के साथ 72 प्रकार के पान बनाते हैं।
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इस साल उत्तर क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र (संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार) ने ट्राइसिटी प्रेमियों के उत्साह को देखते हुए 200 क्राफ्ट स्टॉल लगाए हैं। जातीय पोशाक, आभूषण और जूट के अलावा, नगालैंड से सूखे फूल, उत्तर प्रदेश के पीतल के बर्तन और कालीन, राजस्थान से टेराकोटा आइटम और कर्नाटक से लकड़ी की कलाकृतियां आगंतुक का ध्यान खींच रही हैं। पश्मीना और कश्मीर से शॉल बेचने वाले स्टॉल काफी लोकप्रिय हैं।
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कोलकाता के स्टॉल नंबर 166 पर प्राकृतिक घास और कपास से बनी चटाइयां शहर की बात करती हैं। आप प्राकृतिक फाइबर से बने पर्दे भी खरीद सकते हैं। राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता आलोक कुमार ने बताया कि एक चटाई की बुनाई में एक दिन का समय लगता है। इस मेले में वह 50 से 2,000 रुपये तक चटाइयां लाए हैं। उनके पास 60,000 से अधिक मूल्य की भी चटाइयां हैं। इसमेें एक पतली चटाई भी है।
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इसमें पर्यावरणविद, कलाकार डॉ. आशा अर्पित ने लोगों को प्रेरित करने के लिए एक फोटो प्रदर्शनी स्किल इंडिया क्राफ्ट रखी है। कलाकार जागरूकता लाना चाहती हैं ताकि लोग शिल्प और हथकरघा उत्पादों को बनाने में लगने वाली मेहनत और लागत को पहचान सकें। वह कहती हैं कि खरीदारों को मोलभाव करने से बचना चाहिए।
ललित कला अकादमी ने जयपुर से विनय शर्मा के कार्यों को एक मंडप में लगाया है। शर्मा एक लाइव शो ‘रिदमिक पास्ट’ भी दिखाते हैं जो कि अतीत की चीजों पर जोर देता है। इस स्थल पर कागज से बनी मूर्तियां हैं जो लगभग 200 वर्ष पुरानी हैं। इस आयोजन में कश्मीर से लेकर तमिलनाडु और राजस्थान से लेकर मणिपुर तक के लोक नर्तक हैं। इस मौके पर दो नुक्कड़ नाटक पेश किए गए।
रंगीला पान भी है यहां
सहारनपुर, उत्तर प्रदेश से रंगीला पान प्वाइंट द्वारा परोसा गया पान एकदम खास है। यह पान चॉकलेट, आम, अमरूद, स्ट्रॉबेरी और अनानास के साथ कई प्रकार के स्वाद में है। रिहान ने कहा कि वह 32 प्रकार के माउथ फ्रेशनर्स के साथ 72 प्रकार के पान बनाते हैं।