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स्पोर्ट्स लिटरेचर फेस्टिवल शुरू, बबीता फोगाट बोलीं- पिता के दृढ़ संकल्प ने मुझे मंजिल तक पहुंचाया
Sun, 23 Feb 2020 01:09 PM IST
पंचकुला ब्यूरो
अमर उजाला नेटवर्क, चंडीगढ़
अमर उजाला नेटवर्क, चंडीगढ़
Published by: पंचकुला ब्यूरो
Updated Sun, 23 Feb 2020 01:09 PM IST
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बच्चों के साथ पोज देतीं बबीता फोगाट
- फोटो : अमर उजाला
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प्लेराइट.. भारत का एक प्रमुख स्पोर्ट्स लिटरेचर फेस्टिवल का चंडीगढ़ में आगाज हो गया। स्पोर्ट्स लिटफेस्ट के तीसरे संस्करण में वरिष्ठ खिलाड़ियों और युवा खिलाड़ियों ने अलग अलग सेशंस में चर्चा की। इस मौके पर हरियाणा सरकार के प्रिंसिपल सचिव ओपी सिंह मुख्यातिथि के तौर पर उपस्थित थे। यह कार्यक्रम होटल हयात में आयोजित किया गया।
ओलंपिक ड्रीम्स नाम के पहले सेशन को प्लेराइट के संस्थापकों में से एक पूर्व आईएएस विवेक अत्रे ने शुरू किया। इस सेशन में महिला पहलवान बबीता फोगाट प्रमुख तौर पर शामिल हुईं। उन्होंने अपने बचपन की कहानियों को सुनाते हुए कहा कि अगर उनके पिता उनके खेल को लेकर इतने सख्त नहीं होते तो, आज वह इस मुकाम पर नहीं होती। शायद वह एक शर्मीली लड़की के तौर पर घर की चारदीवारों तक ही सीमित रह जाती, लेकिन उनके पिता ने हमेशा उनको खेलने के लिए प्रोत्साहित किया।
फोगाट परिवार पर बनी दंगल फिल्म के बारे में चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि इस फिल्म में चीजों को बढ़ा चढ़ा कर नहीं दिखाया गया है। वास्तव में, मुझे और मेरी बहनों को मेरे सख्त पिता द्वारा पारिवारिक शादियों में शामिल होने की अनुमति नहीं थी। अगर वे हमारे प्रशिक्षण के बीच में आती तो। हमारे पास बचने का कोई रास्ता नहीं था। जब आपके पिता आपके कोच हो तो दाएं बाएं बच निकलने का कोई रास्ता नहीं होता है।’
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अपने अतीत पर बात करते हुए उन्होंने यह भी बताया कि कैसे वह अक्सर अपनी मां से पूछती थी कि उसके पिता के द्वारा उनकी जिंदगी इतनी सख्त और कठिन क्यों बनाई गई है। मेरी मां बस जवाब देती कि ‘बस 2 साल और’। यह तब तक जारी रहा जब तक मैं उस स्थान पर नहीं पहुंच गई, जहां मेरे पिता मुझे देखना चाहते थे।
हॉकी को समर्पित रहा तीसरा सेशन
तीसरे सेशन को ‘हॉकी द 70 शो’ नाम दिया गया। इसमें अजीत पाल सिंह और अशोक कुमार ने भाग लिया। अशोक कुमार और अजीत पाल सिंह दोनों ही उस भारतीय टीम का हिस्सा थे जिसने 1975 कुआलालंपुर विश्व कप जीता था।
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ओलंपिक ड्रीम्स नाम के पहले सेशन को प्लेराइट के संस्थापकों में से एक पूर्व आईएएस विवेक अत्रे ने शुरू किया। इस सेशन में महिला पहलवान बबीता फोगाट प्रमुख तौर पर शामिल हुईं। उन्होंने अपने बचपन की कहानियों को सुनाते हुए कहा कि अगर उनके पिता उनके खेल को लेकर इतने सख्त नहीं होते तो, आज वह इस मुकाम पर नहीं होती। शायद वह एक शर्मीली लड़की के तौर पर घर की चारदीवारों तक ही सीमित रह जाती, लेकिन उनके पिता ने हमेशा उनको खेलने के लिए प्रोत्साहित किया।
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फोगाट परिवार पर बनी दंगल फिल्म के बारे में चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि इस फिल्म में चीजों को बढ़ा चढ़ा कर नहीं दिखाया गया है। वास्तव में, मुझे और मेरी बहनों को मेरे सख्त पिता द्वारा पारिवारिक शादियों में शामिल होने की अनुमति नहीं थी। अगर वे हमारे प्रशिक्षण के बीच में आती तो। हमारे पास बचने का कोई रास्ता नहीं था। जब आपके पिता आपके कोच हो तो दाएं बाएं बच निकलने का कोई रास्ता नहीं होता है।’
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अपने अतीत पर बात करते हुए उन्होंने यह भी बताया कि कैसे वह अक्सर अपनी मां से पूछती थी कि उसके पिता के द्वारा उनकी जिंदगी इतनी सख्त और कठिन क्यों बनाई गई है। मेरी मां बस जवाब देती कि ‘बस 2 साल और’। यह तब तक जारी रहा जब तक मैं उस स्थान पर नहीं पहुंच गई, जहां मेरे पिता मुझे देखना चाहते थे।
हॉकी को समर्पित रहा तीसरा सेशन
तीसरे सेशन को ‘हॉकी द 70 शो’ नाम दिया गया। इसमें अजीत पाल सिंह और अशोक कुमार ने भाग लिया। अशोक कुमार और अजीत पाल सिंह दोनों ही उस भारतीय टीम का हिस्सा थे जिसने 1975 कुआलालंपुर विश्व कप जीता था।