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Chandigarh News: पिता जी पाकिस्तान से सिखों और हिंदुओं को लेने गए थे, लेकिन बीच में ट्रेन रोककर कत्ले आम मचा दिया

Thu, 14 Aug 2025 08:57 PM IST
Chandigarh Bureau चंडीगढ़ ब्यूरो
Updated Thu, 14 Aug 2025 08:57 PM IST
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Father had taken Sikhs and tribals from Pakistan, but he stopped the train midway and created panic among the people
-हुसैनीवाला बॉर्डर से पाकिस्तान की ओर बिछी रेल पटरी दिलाती है कत्लेआम की याद
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-जिस ट्रेन में पाकिस्तान से आई थीं लाशें, उस ट्रेन के गार्ड के परिवार की अमर उजाला से विशेष बातचीत

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आशीष तिवारी
हुसैनीवाला बॉर्डर। हुसैनीवाला बॉर्डर (फिरोजपुर) से पाकिस्तान की तरफ बिछी रेल पटरी दोनों देशों के बीच हुए बंटवारे के समय के कत्लेआम की याद दिलाती है। पाकिस्तान से इसी रेल पटरी पर आई ट्रेन में हिंदुओं और सिखों की खून से लथपथ लाशें लदी थीं। उस समय मेरे पिता बाल कृष्ण ट्रेन के गार्ड और पंडित रतन लाल ट्रेन पायलट थे। उन दोनों ने ट्रेन को तेज रफ्तार से दौड़ा कर सैकड़ों लोगों की जानें बचाईं थीं। ये बातें रोते हुए ट्रेन के गार्ड के बेटे अशोक कुमार ने अमर उजाला से विशेष बातचीत में बताईं।
फिरोजपुर के रहने वाले अशोक कुमार ने बताया कि बंटवारे के दौरान रेल अधिकारियों ने उनके पिता को आदेश दिया था कि मक्खू रेलवे स्टेशन पर मुसलमान मौजूद हैं, उन्हें ट्रेन से पाकिस्तान छोड़कर आना है। उनके गार्ड पिता और ट्रेन पायलट रतन लाल 24 बोगी वाली ट्रेन लेकर मक्खू स्टेशन पहुंचे और वहां से मुसलमानों को ट्रेन में बैठाकर पाकिस्तान छोड़ने जा रहे थे कि फिरोजपुर के पास बस्ती निजामुद्दीन में कुछ दहशतगर्द ट्रेन में घुस आए और कई लोगों को जख्मी कर लूटपाट की।
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फिरोजपुर छावनी रेलवे स्टेशन पहुंचने के बाद उनके पिता ट्रेन लेकर पाकिस्तान के गंडा सिंह रेलवे स्टेशन को रवाना हुए। ट्रेन में सवार लोगों ने पाकिस्तानी रेल अधिकारियों से कहा कि गार्ड और ट्रेन पायलट ने उनके लोगों को मरवाया है। यह सुनकर दोनों को पकड़कर वहीं बैठा लिया था। अशोक कुमार ने बताया कि उनके पिता के मुताबिक कुछ देर बाद अनाउंसमेंट हुई कि उक्त रेलवे स्टेशन पर ट्रेन पहुंच रही है। लाइन पर फिरोजपुर से गई ट्रेन खड़ी थी। लाइन क्लियर करने के लिए वहां पर कोई गार्ड व ट्रेन पायलट नहीं था। उन्हें ही लाइन क्लियर करने को कहा गया। उनके पास बचने के लिए इससे अच्छा मौका नहीं था। उन्होंने ट्रेन की रफ्तार तेज कर सीधा फिरोजपुर शहर रेलवे स्टेशन आकर रोकी। यहां पहुंचने पर अधिकारियों ने पूछा ट्रेन में हिंदुस्तानियों और सिखों को आना था, वे कहां हैं तो उनके पिता ने आपबीती सुनाईं। इसके बाद फिरोजपुर के रेल अधिकारियों ने ट्रेन में सेना की एक टुकड़ी के साथ फिर उनके पिता और ट्रेन पायलट को कसूर रेलवे स्टेशन भेजा। वे वहां से हिंदू व सिखों को ट्रेन से फिरोजपुर ला रहे थे कि पाकिस्तान के गंडा सिंह के पास मुसलमानों ने हमला कर दिया। ट्रेन के ऊपर और अंदर खचाखच लोग भरे हुए थे। हमले में बहुत लोग मारे गए। किसी तरह ट्रेन की रफ्तार बढ़ा कर सैकड़ों लोगों की जान बचाई। ये बातें उनके पिता बाल कृष्ण उन्हें अक्सर बताया करते थे।
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1945 में गार्ड के पद पर हुई थी नियुक्ति
बाल कृष्ण की 25 अप्रैल 1945 में रेलवे में ट्रेन गार्ड के पद पर नियुक्ति हुई थी। 1947 में ट्रेन लेकर पाकिस्तान गए थे और वहां से लाशों से भरी ट्रेन लेकर फिरोजपुर आए थे। वर्ष 1965 तक गार्ड की नौकरी की। 31 मई 1984 को रेलवे से चीफ कंट्रोलर पद से सेवानिवृत्त हुए। आठ सितंबर 2019 को बाल कृष्ण का निधन हो गया।
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