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बोरवेल में नहीं गिरता फतेहवीर सिंह, अगर लोगों ने मानी होती ये बात और की गई होती ठोस कार्रवाई

Tue, 11 Jun 2019 11:19 AM IST
खुशबू गोयल न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: खुशबू गोयल Updated Tue, 11 Jun 2019 11:19 AM IST
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Fatehveer Singh Borewell Rescue Operation, Public and Government Igonred Supreme Court Decision
बोरवेल से निकाला गया फतेहवीर सिंह - फोटो : अमर उजाला
दो साल का मासूम फतेहवीर सिंह बोरवेल में नहीं गिरता, अगर लोगों ने इस बात पर अमल किया होता और एक ठोस कार्रवाई करके पुख्ता सुरक्षा इंतजाम किए होते। पंजाब के संगरूर जिले के गांव भगवानपुरा में हुई घटना के बाद एक बार फिर खुले बोरवेल को लेकर सवाल खड़े हो गए है।
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खुले बोरवेल में बच्चे गिरने की घटना को देखते हुए साल 2010 में सुप्रीम कोर्ट ने चिंता जाहिर करते हुए संज्ञान लिया था। 2013 में सभी राज्यों को दिशा-निर्देश दिए थे। इस पर अमल करने के लिए खास ताकीद की थी, लेकिन इन सबके बावजूद राज्यों में इस पर अमल नहीं हो रहा है। सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों पर यदि ठोस तरीके से पालन होता तो शायद फतेहवीर 130 फुट नीचे गहरे गड्ढे में फंसा नहीं होता।
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पहली बार हरियाणा में कुरुक्षेत्र के हल्दीहेड़ा गांव में 21 जुलाई 2006 को प्रिंस नाम के बच्चे के बोरवेल में गिरने की घटना सामने आई थी। पांच वर्ष का प्रिंस 50 फुट गहरे बोरवेल में गिर गया था। उसे सेना ने रेस्क्यू कर तीन दिन बाद सकुशल बाहर निकाला था। उस समय पहली बार देश का ध्यान इस तरह की घटना की ओर गया था। सभी राज्य सरकारों ने खुले बोरवेल को बंद करने के निर्देश अधिकारियों को दिए थे। सर्वे कराकर भरने को कहा गया था।
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2013 में आए सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद ग्रामीण क्षेत्र में सरपंच और शहरी क्षेत्र में अलग-अलग अधिकारियों को बोरवेल कंक्रीट से भरने का जिम्मा दिया गया था, लेकिन फैसले के पांच वर्ष बीत जाने के बाद भी इस पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।

ये हैं सुप्रीम कोर्ट का निर्देश

- गांवों में बोरवेल की खुदाई सरपंच तथा कृषि विभाग के अधिकारियों की निगरानी में करानी अनिवार्य है।
- शहरों में यह कार्य ग्राउंड वाटर डिपार्टमेंट, स्वास्थ्य विभाग तथा नगर निगम के इंजीनियर की देखरेख में होना जरूरी है।
- बोरवेल खोदने वाली एजेंसी का रजिस्ट्रेशन होना भी अनिवार्य है।
- बोरवेल खोदवाने के कम से कम 15 दिन पहले उपायुक्त, ग्राउंड वाटर डिपार्टमेंट, स्वास्थ्य विभाग और नगर निगम को सूचना देना अनिवार्य
- बोरवेल की खोदाई से पहले खोदाई वाली जगह पर चेतावनी बोर्ड लगाया जाना
- ऐसी जगह को कंटीले तारों से घेरने और उसके आसपास कंक्रीट की दीवार खड़ी करने के अलावा गड्ढों के मुंह को लोहे के ढक्कन से ढंकना भी अनिवार्य
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