किसान आंदोलन : दबाव नहीं असरदार, अब नई रणनीति से अन्नदाता फिर करेगा आर-पार
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संयुक्त किसान मोर्चा के डॉ. दर्शनपाल सिंह ने बताया कि आंदोलन को तेज करने के लिए किसान पंचायत हो रही हैं। आने वाले दिनों फिर देशव्यापी आंदोलन का आह्वान किया जाएगा। इसकी योजना बनाई जा रही है। उत्तर प्रदेश, राजस्थान, मध्यप्रदेश व हरियाणा से और किसान जल्दी दिल्ली बॉर्डर पर चल रहे धरनों में शामिल होंगे। डॉ. दर्शन ने कहा कि सरकार बताए कि आंदोलन को किस मंशा से लंबा खींचा जा रहा है।
केंद्र सरकार किसानों के आंदोलन को लेकर अब ज्यादा दबाव में नहीं दिख रही। किसान संगठनों के बीच अंदरखाने चल रही सियासत का फायदा वह उठा रही है। इससे किसान संगठन चिंतित हैं। किसान नेता आंदोलन को आधार बनाकर अपनी राजनीति चमकाने में लगे हुए हैं, जिससे उनकी दबाव की रणनीति ज्यादा असरदार नहीं हो रही।
सरकार के खिलाफ आंदोलन को और मजबूत करने के लिए उत्तर प्रदेश के किसान नेता राकेश टिकैत हरियाणा में अपनी पैठ मजबूत करने में लग गए हैं। गाजीपुर बॉर्डर पर हुई घटना के बाद किसानों व खापों में उनका कद और बढ़ा है। उन्होंने जहां हरियाणा का रुख किया है तो भाकियू हरियाणा के अध्यक्ष गुरनाम सिंह चढूनी को राजस्थान का जिम्मा सौंपा है। चढूनी हरियाणा के साथ लगते राजस्थान के जिलों में किसानों को एकजुट करने में लगे हैं। उन पर हरियाणा, पंजाब के अलावा अन्य राज्यों के किसानों को आंदोलन से जोड़ने की जिम्मेदारी है।
गांवों के दौरों पर पहुंच रहे जत्थे
हरियाणा के विभिन्न गांवों में भाकियू व अन्य किसान संगठनों के जत्थों ने अपनी गतिविधियों को बढ़ा दिया है। अलग-अलग जत्थे रोजाना गांवों में पहुंचकर किसानों को लामबंद कर रहे हैं। खापों ने अलग से अपना अभियान चलाया हुआ है, जिसमें किसानों को आंदोलन के साथ खड़ा रहने के लिए प्रेरित किया जा रहा है।