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गुस्से में पंजाब के किसान, कहा-सरकार दे मुआवजा, नहीं तो जलाएंगे पराली

Mon, 15 Oct 2018 06:47 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मोगा (पंजाब)
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मोगा (पंजाब) Updated Mon, 15 Oct 2018 06:47 PM IST
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Farmers protest against stubble in Punjab
विरोध करते किसान

किरती किसान यूनियन के बैनर तले किसान पराली की ट्रालियां भरकर जिला सचिवालय पहुंच गए। किसानों ने मुख्य गेट के सामने पराली का ढेर लगाकर रोष धरना दिया और सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। इस मौके पर जत्थेबंदी जिला प्रधान छिंदर सिंह झंडेआना ने कहा कि पराली जलाना किसानों की मजबूरी है। उन्होंने कहा कि किसानों की आर्थिक हालत बहुत नाजुक है। 

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धान की कंबाइन से कटाई के बाद बचे अवशेष को खत्म करना आसान नहीं है। उन्होंने कहा कि या सरकार किसानों की पराली उठाने का प्रबंध करे या 300 रुपये प्रति क्विंटल बोनस या 6 हजार रुपये प्रति एकड़ पक्का मुआवजा दे। उन्होंने कहा कि चाहे यह बात सच है कि पराली को आग लगाने से प्रदूषण होता है लेकिन सारा आरोप किसानों को नहीं देना चाहिए। वातावरण गंदा होने के लिए फैक्टरियां आदि कई अन्य कारण भी जिम्मेदार हैं। 
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इस मौके पर प्रगट सिंह साफूवाला ने कहा कि एनजीटी ने साफ कहा है कि दो एकड़ से कम के मालिक किसान को हैपीसीडर और अन्य उपकरण सरकार मुफ्त में दे। सरकार कह रही है कि पराली को खेत में ही जोत दो, पर पराली वाले खेत में गेहूं की बिजाई करना मुश्किल है। जब तक सरकार पराली के निपटारे के लिए उनको प्रति एकड़ कोई अतिरिक्त रकम या बोनस देने का ऐलान नहीं करती, तब तक वह पराली इसी तरह जलाते रहेंगे। 
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नेचर पार्क में भारतीय किसान यूनियन (लक्खोवाल) की मीटिंग जसवंत सिंह जैमलवाला की अध्यक्षता में हुई। इस मौके पर जिला महासचिव जगतार सिंह चोटिया खुर्द और पंजाब उपाध्यक्ष सूरत सिंह कादरवाला, सूरत सिंह ब्राहमके, मोहन सिंह जींदड़ा ने मांग की कि किसानों को पराली जमीन में जुताई के लिए प्रति एकड़ पंजाब सरकार 5000 रुपये किसानों को तुरंत दे नहीं तो किसान मजबूर होकर पराली को आग लगाएंगे। 

 पराली जलाने का चालान काटने गई टीम का घेराव 

Farmers protest against stubble in Punjab
parali - फोटो : फाइल फोटो

तरनतारन के गांव शहबाजपुर में पराली जलाने की सूचना पाकर चालान काटने पहुंची कृषि विभाग की टीम को घेर कर किसानों ने नारेबाजी की। कृषि विभाग के एडीओ रमनदीप सिंह को सूचना मिली कि गांव शहाबपुरा के किसान ने धान की कटाई के बाद पराली को आग लगा दी है। इस पर एडीओ रमनदीप सिंह की अगुवाई में टीम जब गांव पहुंची तो किसान संघर्ष कमेटी के महासचिव फतेह सिंह पिद्दी, सुखदेव सिंह सहाबपुर की अगुवाई में किसानों ने टीम को घेर लिया और नारेबाजी की। 

माहौल तनावपूर्ण बन गया। इसके बाद कृषि विभाग के एडीओ रमनदीप सिंह बिना कार्रवाई किए लौट गए। किसान नेताओं ने कहा कि सरकार को चाहिए कि ग्रीन ट्रिब्यूनल के आदेश के तहत किसानों को सुविधाएं दी जाएं। बारिश के दिनों में फसलों के नुकसान हुए थे जिसका अभी तक मुआवजा नहीं दिया गया। उन्होंने कहा कि अपनी मांगों को पूरा करने के लिए किसान संघर्ष कमेटी द्वारा 18 अक्तूबर को ट्रेनें रोकी जाएंगी। इस मौके पर फतेह सिंह, निर्मल सिंह, सुप्रीम सिंह पिद्दी, संतोख सिंह, अमरजीत सिंह और बचित्र सिंह शेरों मौजूद थे।

 पराली संभाल के लिए किसानों को नहीं मिली मशीनें
जालंधर में भारतीय किसान यूनियन (राजेवाल) ने दावा किया है कि केंद्र और पंजाब सरकार ने सूबे में किसानों को पराली संभालने के लिए अभी तक कोई मशीन नहीं दी। यूनियन पदाधिकारियों ने डीसी को दिए ज्ञापन में कहा है कि ऐसी स्थिति में किसानों के पास पराली को आग लगाने के अलावा कोई विकल्प नहीं हैं। इसलिए किसानों की मजबूरी को समझा जाए।

यूनियन के जिला प्रधान मनदीप सिंह समरा का कहना है कि सरकार जब भी कोई सब्सिडी आधारित योजना लाती है तो कहती है कि किसान पहले मशीन खरीद लें, बाद में सब्सिडी आएगी। स्थिति यह है कि किसान पहले ही कर्ज के तले दबा है और मशीन कैसे खरीदे। यूनियन की मांग है कि पराली संभालने को लेकर किसानों को जल्द मशीनें उपलब्ध करवाई जाएं।

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