तीन राज्यों के किसान संगठनों का बड़ा फैसला, चुनाव लड़ने का किया एलान, यूपी-हरियाणा तय
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सभी सियासी पार्टियों से निराश होने के बाद अब किसान संगठनों ने खुद ही राजनीति में उतरने का फैसला किया है। किसान भवन में बैठक कर पंजाब, हरियाणा और राजस्थान के किसान संगठनों ने सर्वसम्मति से यह फैसला किया। भारतीय किसान यूनियन (हरियाणा) के अध्यक्ष गुरनाम सिंह चढूनी ने कहा कि एक मत से यह फैसला किया गया है कि राजनीति में हिस्सेदारी करनी है।
पंजाब और राजस्थान के संगठन अपनी औपचारिकता के तौर पर अपनी जनरल बॉडी मीटिंग में यह प्रस्ताव पास कराएंगे। हमारा संगठन इस पर फैसला ले चुका है। उत्तर प्रदेश के किसान नेता वीएम सिंह ने राष्ट्रीय किसान मजदूर पार्टी रजिस्टर्ड कराई थी। उसी पर किसान संगठन चुनाव लड़ेंगे, इस पर भी सभी तैयार हैं। लोकसभा चुनाव में समय कम है, फिर भी जहां मजबूत कैंडिडेट हैं वहां चुनाव लड़ाएंगे। यूपी से वीएम सिंह चुनाव लड़ेंगे।
अगर किसी पार्टी के साथ समझौता हुआ तो एक-दो सीटें मांग सकते हैं। लेकिन हरियाणा में विधानसभा चुनाव पक्का लड़ेंगे। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय स्तर पर कुछ लोग मानते हैं कि राजनीति में नहीं जाना चाहिए, कुछ कहते हैं कि जाना चाहिए। जो लोग जाना चाहते हैं, उन्हें एक प्लेटफार्म पर लाया जाएगा।
बैठक में यह भी सहमति बनी है कि राष्ट्रीय किसान मजदूर पार्टी से जो भी चुनाव लड़ेगा, बाकी सभी उसकी मदद को जाएंगे। बैठक में गंगानगर संघर्ष समिति के रणजीत राजू, किसान महासंघ के विनोद खीचड़, ग्रामीण किसान समित के प्रकाश चंद, पंजाब से बलबीर सिंह राजेवाल और बूटा सिंह शामिल हुए।
राजनीतिज्ञों को किसानों से कोई मतलब नहीं
बैठक में शामिल भारतीय किसान यूनियन (राजेवाल) के प्रधान बलबीर सिंह राजेवाल ने कहा कि किसी भी सियासी दल को किसानों से कोई मतलब नहीं है। इसलिए यह फैसला किया गया है कि अपनी राजनीतिक पार्टी बना कर अपने लोगों को लोकसभा, विधानसभा भेजा जाए। ताकि किसानों के मसले हल हों। यूपी, हरियाणा में चुनाव लड़ना फाइनल है। हमने भी सहमति जताई है। लेकिन पहले इसे जनरल बॉडी से पास करवाना होगा।