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Punjab: किसानों ने नकार दी धान की सीधी बिजाई की तकनीक, लक्ष्य था 12 लाख हेक्टेयर... बुआई सिर्फ 82 हजार

Sat, 16 Jul 2022 11:09 AM IST
निवेदिता वर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: निवेदिता वर्मा Updated Sat, 16 Jul 2022 11:09 AM IST
सार

पंजाब के कृषि विभाग ने 29.7 लाख एकड़ (12.02 लाख हेक्टेयर) सीधी बुवाई योजना के तहत लाने का लक्ष्य रखा था। प्रत्येक जिले को इस तकनीक को अपनाने के लिए विभाग की ओर से एक न्यूनतम लक्ष्य दिया गया था।

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Farmers of Punjab rejected Direct Sowing Technique of paddy
धान

विस्तार

पंजाब के किसानों ने धान की सीधी बिजाई तकनीक (डीएसआर) को नकार दिया है। सूबे में इस तकनीक से धान की बुआई का 12 लाख हेक्टेयर लक्ष्य तय था, लेकिन सिर्फ 82500 हेक्टेयर में ही इस तकनीक का किसानों ने प्रयोग किया। कृषि विशेषज्ञ इसकी वजह योजना के पर्याप्त प्रचार-प्रचार को नहीं किए जाना बता रहे हैं। वहीं, पंजाब सरकार की ओर से इस तकनीक को अपनाने वाले प्रत्येक किसान के लिए 1500 रुपये प्रति एकड़ मुआवजा देने की घोषणा की गई थी।

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राज्य के कृषि विभाग ने मुख्यमंत्री की इस घोषणा के बाद 29.7 लाख एकड़ (12.02 लाख हेक्टेयर) सीधी बुवाई योजना के तहत लाने का लक्ष्य रखा। प्रत्येक जिले को इस तकनीक को अपनाने के लिए विभाग की ओर से एक न्यूनतम लक्ष्य दिया गया। साथ ही क्षेत्र के कृषि अधिकारियों को योजना का प्रचार करने के लिए कहा गया। यहां तक कि मुख्य कृषि अधिकारियों को सरकार की ओर से चेतावनी दी गई थी कि यदि योजना के क्रियान्वयन में कोई लापरवाही की गई तो उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। इसके बावजूद, जैसा कि आंकड़े बताते हैं, फील्ड कर्मचारी इस योजना को किसानों के बीच लोकप्रिय बनाने में विफल रहे। विभाग मात्र 2.06 लाख एकड़ (0.83 लाख हेक्टेयर) को धान की बुआई डीएसआर के तहत ला सका। यह तय लक्ष्य का महज 6.9 फीसदी है।

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इन जिलों का खराब रहा प्रदर्शन

कम प्रदर्शन करने वाले जिलों में पहले नंबर पर कपूरथला है। यहां तय लक्ष्य का सिर्फ 1.4 प्रतिशत धान डीएसआर तकनीक से लगाया गया। इसके बाद होशियारपुर (1.9 प्रतिशत), पठानकोट (2 प्रतिशत), रोपड़ (2.1 प्रतिशत) और फतेहगढ़ साहिब (2.2 प्रतिशत) शामिल हैं।

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इन जिलों ने किया बेहतर प्रदर्शन

डीएसआर तकनीक में कुछ जिलों ने अपेक्षाकृत बेहतर प्रदर्शन किया है। इनमें मुक्तसर शामिल हैं, जहां तय लक्ष्य का 18 प्रतिशत धान डीएसआर से लगाया गया। इसके बाद फाजिल्का (17 प्रतिशत), मोहाली (14 प्रतिशत), बठिंडा (10 प्रतिशत) और मानसा (9.4 प्रतिशत) शामिल हैं।

 

पंजाब के लिए डीएसआर तकनीक बेहद जरूरी है। सरकार की योजना कारगर थी, लेकिन पर्याप्त प्रचार-प्रसार के अभाव में अच्छे परिणाम नहीं मिल पाए। लापरवाही करने वाले अधिकारियों को जल्द तलब कर कारण पूछे जाएंगे। - कुलदीप धालीवाल, कृषि मंत्री, पंजाब सरकार


योजना के खराब प्रदर्शन के पीछे नहर टूटने के कारण मालवा के कुछ क्षेत्रों में पानी की अनुपलब्धता रही। साथ ही पिछले साल जिन किसानों ने डीएसआर तकनीक अपनाई थी उन्हें खरपतवार से नुकसान हुआ। किसान नुकसान से बचने के लिए डीएसआर का विकल्प चुनने से हिचक रहे थे। विभाग अपनी गलतियों से सीखेगा और अगले साल सुधार करेगा। - गुरविंदर सिंह, निदेशक (कृषि) पंजाब

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