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आंदोलन में जोश-जज्बा न हो कम...किसान बना रहे ये रणनीति, बोले- सरकार हमारा सब्र देख रही, हम उसका

Sat, 19 Dec 2020 03:42 AM IST
ajay kumar अभिषेक वाजपेयी, अमर उजाला, चंडीगढ़
अभिषेक वाजपेयी, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: ajay kumar Updated Sat, 19 Dec 2020 03:42 AM IST
सार

  • चरणबद्ध तरीके से आंदोलन को अन्नदाता दे रहे हैं नई दिशा 
  • कर्ज के कारण आत्महत्या करने वाले किसानों के परिजन दे चुके हैं समर्थन
  • अब आंदोलन के दौरान मौत का शिकार होने वाले किसानों को दिया शहीद का दर्जा
  • पंजाब भर में शहीद किसानों के लिए संगठन करेंगे श्रद्धांजलि सभाओं का आयोजन

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Farmers Are Making Phased Manner Strategy For Kisan Andolan Against Farm Laws
किसान आंदोलन (फाइल फोटो) - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

कृषि कानूनों के खिलाफ चल रहे किसान आंदोलन की निरंतरता बनाए रखने के लिए अब किसान संगठन रणनीति बनाकर आंदोलन को चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ाने में जुट गए हैं। रणनीति की शुरुआत 26 नवंबर को किसान संगठनों ने धरनास्थल पर ही संविधान दिवस मनाकर की। इसके बाद लगातार कुशल रणनीतिकार के रूप में संगठन आंदोलन के दौरान मृत किसानों को शहीद का दर्जा देते हुए पूरे पंजाब में श्रद्धांजलि सभाएं आयोजित करने जा रहे हैं।

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केंद्र के तीनों कृषि कानूनों के खिलाफ दिल्ली बॉर्डर पर किसान आंदोलन अब 24 दिन का हो चुका है। आंदोलन में शुरुआत जैसी गर्मी बनी रहे, इसको लेकर किसान संगठन खेत-खलिहानों से बाहर आकर कुशल रणनीतिक की भूमिका में दिखाई दे रहे हैं। आंदोलन की निरंतरता को बनाए रखने के लिए किसान संगठनों ने टिकरी और सिंघु बॉर्डर पर ही 26 नवंबर को संविधान दिवस धरनास्थल पर ही मनाकर शुरुआत की थी।
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इसके बाद आंदोलन से सीधे आमजन को जोड़ने के लिए कर्ज से परेशान होकर आत्महत्या करने वाले 3000 से अधिक किसानों के परिजनों को धरने में शामिल कराया। अब किसान संगठनों ने अभी तक के आंदोलन के दौरान शहीद होने वाले 22 किसानों को शहीदों का दर्जा दे दिया है। जिनको श्रद्धांजलि देने के लिए अब पंजाब भर में उनके लिए श्रद्धांजलि सभाएं आयोजित किए जाने का निर्णय किया है। इसकी शुरुआत 20 दिसंबर को किसान संगठन करने जा रहे हैं।

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आगे भी करते रहेंगे बदलाव

भारतीय किसान यूनियन (एकता उगराहां) के राष्ट्रीय महासचिव सुखदेव सिंह (कोकरी कलां) ने बताया कि कृषि कानूनों को लेकर केंद्र के अड़ियल रुख को देखते हुए आगे भी बदलाव करते रहेंगे। आंदोलन अभी लंबा खींचना है, इसलिए आंदोलन की रणनीति भी उसी तरह से बनाई जा रही है। समय के साथ ही आंदोलन मजबूत हो रहा है, अभी टिकरी और सिंघु बॉर्डर पर आयोजित धरने में और भी किसानों के जत्थे रवाना हो गए हैं। जल्द ही आंदोलन और वृहद रूप ले लेगा।

फर्जी किसान संगठन सरकार के साथ
किसान संगठनों का कहना है कि आंदोलन को कमजोर करने के लिए केंद्र की सरकार फर्जी किसान संगठन खड़े कर रही है। जो कृषि कानूनों के पक्ष में बयान दे रहे हैं। जिनको सरकार अपने फायदे में प्रयोग कर आंदोलन को बांटने का प्रयास कर रही है लेकिन सरकार के ये मंसूबे कभी कामयाब नहीं होने दिए जाएंगे।

केंद्र सरकार आंदोलन को कमजोर करने में लगी है। हम आंदोलन को और मजबूत करने में लगे हैं। हम सरकार का सब्र देख रहे हैं और सरकार हमारा। केंद्र सरकार यह सोच रही है कि आंदोलन लंबा खींचने पर कमजोर होगा लेकिन यह सोच गलत है। हम आंदोलन को और मजबूत बनाने पर काम कर रहे हैं, जल्द ही इसके परिणाम सरकार को दिख जाएंगे। - जोगिंदर सिंह उगराहां, प्रधान, भारतीय किसान यूनियर (एकता उगराहां)

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