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सरकार से वार्ता प्रस्ताव न मिलने पर किसानों के तेवर तल्ख, आंदोलन बढ़ाने की तैयारी

Sun, 07 Feb 2021 05:03 AM IST
दुष्यंत शर्मा अंकित चौहान, सोनीपत
अंकित चौहान, सोनीपत Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Sun, 07 Feb 2021 05:03 AM IST
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Farmers angry on not getting a proposal from the government for talks
गुरनाम सिंह चढूनी - फोटो : अमर उजाला

सरकार से बातचीत का प्रस्ताव नहीं मिलने से किसानों के तेवर दोबारा से तल्ख होने शुरू हो गए है और अब आंदोलन को तेज करने की पूरी तैयारी हो गई है क्योंकि ट्रैक्टर परेड के बाद आंदोलन दोबारा खड़ा होने के साथ ही पीएम नरेंद्र मोदी के पुराना प्रस्ताव अभी निरस्त नहीं होने से किसान नेताओं को बातचीत की बड़ी उम्मीद जगी थी। 

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लेकिन अब वह उम्मीद टूटती देखकर किसान नेताओं ने आंदोलन तेज करने की रणनीति बनानी शुरू कर दी है। वहीं चक्का जाम को सफल मानते हुए आगे भी इस तरह की रणनीति बनाई जाएगी, जिससे किसी तरह के बवाल से बचा जा सके और सरकार पर दबाव भी बनाया जा सके। यह माना जा रहा है कि इस अगली रणनीति के लिए ही रविवार को संयुक्त किसान मोर्चा की बैठक हो सकती है। 
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कृषि कानून रद्द कराने के लिए पिछले 72 दिनों से किसान सड़कों पर डटे हुए है। इस बीच किसानों व सरकार के बीच 11 दौर की बातचीत हो चुकी है तो एक बार गृहमंत्री अमित शाह के साथ भी बातचीत हुई थी। किसानों व सरकार के बीच बातचीत में भले ही कोई हल नहीं निकला हो, लेकिन यह जरूर है कि इनके बीच बैठक का दौर लगातार जारी था। 
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किसानों व सरकार के बीच आखिरी बैठक 22 जनवरी को हुई थी और इस तरह से करीब 15 दिन बीतने के बाद भी सरकार व किसानों के बीच कोई बैठक नहीं हुई है। जहां पहले कई दिनों तक सरकार की ओर से इसलिए बातचीत की पहल नहीं की गई थी कि ट्रैक्टर परेड के दौरान दिल्ली में बवाल होने के बाद आंदोलन सिमटने लगा था। लेकिन सरकार की सख्ती व किसान नेताओं की भावनात्मक अपील के बाद आंदोलन दोबारा से खड़ा हुआ और इस बार आंदोलन पहले से ज्यादा मजबूत दिख रहा है। जिसके बाद किसान नेताओं को पूरी उम्मीद थी कि सरकार दोबारा से बातचीत के लिए प्रस्ताव होगी और सरकार के साथ बातचीत का बंद हुआ रास्ता फिर से खुल जाएगा। 

यह उम्मीद उस समय ज्यादा बढ़ गई थी, जब पीएम नरेंद्र मोदी ने सार्वजनिक तौर पर किसानों के लिए सरकार का आखिरी प्रस्ताव अभी खत्म नहीं होने की बात कही थी। उसके बाद यह साफ लग रहा था कि अब सरकार वय किसानों के बीच जल्द बातचीत होगी। लेकिन जिस तरह से समय बढ़ता जा रहा है, उसी तरह सरकार के साथ बातचीत का रास्ता खुलने की किसानों की उम्मीद भी टूटती जा रही है। इसलिए ही किसान नेताओं के तेवर तल्ख होने शुरू हो गए है। 

उनको लगने लगा है कि सरकार उनकी बात तक सुनने के लिए तैयार नहीं है और अब आंदोलन को बढ़ाने की रणनीति बनानी शुरू कर दी गई है। इसको लेकर रविवार को संयुक्त किसान मोर्चा की बैठक हो सकती है और उसमें आंदोलन तेज करने की अगली रणनीति तय हो सकती है। हालांकि यह जरूर है कि किसान नेता इस बार ऐसा कोई रणनीति तय नहीं करेंगे, जिससे किसी तरह का बवाल होने का डर रहे और उससे आंदोलन टूटने की कगार पर पहुंच सके। इस बार रणनीति ऐसी रहेगी कि उससे सरकार पर दबाव बढ़ाया जा सके।  

हम बातचीत करने के लिए तैयार है, क्योंकि किसी भी समस्या का समाधान बातचीत से निकलता है। लेकिन पीएम नरेंद्र मोदी ने केवल एक कॉल दूर होने की बात कही थी और हम लोगों को पीएम का वह नंबर ही नहीं मिल रहा है। उसे हम काफी समय से ढूंढ रहे है। सरकार बातचीत का प्रस्ताव भेजेगी तो हम बातचीत के लिए जरूर जाएंगे। अब जिस तरह से सरकार का रुख दिख रहा है, उसको देखते हुए आंदोलन को तेज किया जाएगा।

-युद्धवीर सिंह, सदस्य संयुक्त किसान मोर्चा 

सरकार लगातार इस प्रयास में लगी है कि यह आंदोलन कैसे तोड़ा जाए, इसे कैसे खत्म कराया जाए। सरकार ने यह कभी सोचा कि किसानों की समस्या का हल कैसे निकाला जाए। जिस दिन सरकार ऐसा सोचने लगेगी, उस दिन समस्या का समाधान हो जाएगा। सरकार अब बातचीत भी नहीं करना चाहती है। हमने साफ कहा है कि सरकार प्रस्ताव भेजती है तो बातचीत के लिए जरूर जाएंगे। वहां अपनी मांगों को रखेंगे और उनको पूरा करना या नहीं करना सरकार के हाथ में होगा। 
-गुरनाम सिंह चढूनी, अध्यक्ष भाकियू हरियाणा

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