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Farmer Protest: एसकेएम व किसान-मजदूर मोर्चा ने बनाई नई रणनीति, कानूनी टीम भी तैयार, इंटरनेट पर पाबंदी बढ़ी
Tue, 20 Feb 2024 11:15 PM IST
भूपेंद्र सिंह
अमर उजाला ब्यूरो, चंडीगढ़/पटियाला
अमर उजाला ब्यूरो, चंडीगढ़/पटियाला
Published by: भूपेंद्र सिंह
Updated Tue, 20 Feb 2024 11:15 PM IST
सार
किसान नेता पंधेर ने बैरिकेडिंग, आंसू गैस के गोलों व रबड़ की गोलियों के इस्तेमाल का मुद्दा न उठाने पर पंजाब सरकार को भी घेरा है।
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किसान आंदोलन
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
केंद्र के प्रस्ताव को खारिज करने के बाद किसान संगठन दिल्ली कूच के साथ-साथ नई रणनीति बनाने में जुट गए है। किसान नेता सरवण सिंह पंधेर ने शंभू बॉर्डर पर प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि एमएसपी की मांग को लेकर उन्होंने अपनी एक लीगल टीम भी गठित कर ली है। इस टीम में एडवोकेट अखिल चौधरी को को-ऑर्डिनेटर नियुक्त किया गया है।
उनके अलावा टीम में एडवोकेट पंकज श्योराण, अदिति श्योराण, वर्तिका त्रिपाठी, मोहित तोमर और कपिल कुहाड़ शामिल हैं। पंधेर ने रविवार को शंभू बॉर्डर पर मीडिया से बातचीत में कहा कि पंजाब सरकार ने प्रदेश की सरहद में किसानों पर आंसू गैस के गोले दागे जाने और रबड़ की गोलियां चलाने पर अपना पक्ष नहीं रखा है।
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पंजाब में 24 फरवरी तक सात जिलों में गृह मंत्रालय ने इंटरनेट सेवाएं बंद कर दी हैं, इस पर केवल पटियाला के डीसी की ओर से एक पत्र जारी किया गया, लेकिन पंजाब सरकार ने लिखित में गृह मंत्रालय से इस मामले में कोई ठोस कदम नहीं उठाया।
शंभू बॉर्डर पर जिस पुल पर हरियाणा पुलिस बैरिकेडिंग कर बैठी है, उसका हिस्सा अगर पंजाब की सरहद में आता है, तो अब तक उसका विरोध सरकार ने क्यों नहीं किया। इन सभी सवालों पर किसान नेताओं ने इस बार पंजाब सरकार पर सवाल उठाए हैं। किसान इसके लिए तैयार हैं।
केंद्र माफ करे 18 लाख करोड़ का कर्ज
पंधेर ने कहा कि किसानों पर साढ़े 18 लाख करोड़ का है कर्ज है। केंद्र सरकार तेल बीजों को बाहर से मंगवाने पर सालाना एक लाख 75 हजार करोड़ रुपये खर्च करती है, लेकिन अगर देश के किसानों को ही तेल बीजों पर अच्छी एमएसपी दे दी जाए, तो वह भी इन्हें पैदा कर सकते हैं। इससे फसल विविधता लाने की सरकार की मांग भी पूरी हो जाएगी। उन्होंने लखीमपुर खीरी कांड के आरोपियों को सजा दिलाने के साथ-साथ पीडितों को मुआवजा देने और खेती सेक्टर को डब्ल्यूटीओ से बाहर निकालने की भी मांग भी दोहराई। उन्होंने कहा कि किसान आंदोलन में शहीद हुए किसानों के पार्थिव शरीर अस्पतालों में पड़े हैं। पंजाब सरकार इनके परिवारों को सरकारी नौकरी व मुआवजा राशि देने संबंधी नीति जल्द स्पष्ट करे।
एक दिन और बढ़ी मोबाइल इंटरनेट पर पाबंदी
हरियाणा सरकार ने किसान आंदोलन को देखते हुए सात जिलों में मोबाइल इंटरनेट पर पाबंदी 21 फरवरी रात 12 बजे तक के लिए बढ़ा दी है। राज्य सरकार ने 11 फरवरी को अंबाला, कुरुक्षेत्र, कैथल, जींद, हिसार, फतेहाबाद, सिरसा और डबवाली में मोबाइल इंटरनेट और बल्क एसएमएस भेजने पर प्रतिबंध लगा दिया था।
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उनके अलावा टीम में एडवोकेट पंकज श्योराण, अदिति श्योराण, वर्तिका त्रिपाठी, मोहित तोमर और कपिल कुहाड़ शामिल हैं। पंधेर ने रविवार को शंभू बॉर्डर पर मीडिया से बातचीत में कहा कि पंजाब सरकार ने प्रदेश की सरहद में किसानों पर आंसू गैस के गोले दागे जाने और रबड़ की गोलियां चलाने पर अपना पक्ष नहीं रखा है।
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पंजाब में 24 फरवरी तक सात जिलों में गृह मंत्रालय ने इंटरनेट सेवाएं बंद कर दी हैं, इस पर केवल पटियाला के डीसी की ओर से एक पत्र जारी किया गया, लेकिन पंजाब सरकार ने लिखित में गृह मंत्रालय से इस मामले में कोई ठोस कदम नहीं उठाया।
शंभू बॉर्डर पर जिस पुल पर हरियाणा पुलिस बैरिकेडिंग कर बैठी है, उसका हिस्सा अगर पंजाब की सरहद में आता है, तो अब तक उसका विरोध सरकार ने क्यों नहीं किया। इन सभी सवालों पर किसान नेताओं ने इस बार पंजाब सरकार पर सवाल उठाए हैं। किसान इसके लिए तैयार हैं।
केंद्र माफ करे 18 लाख करोड़ का कर्ज
पंधेर ने कहा कि किसानों पर साढ़े 18 लाख करोड़ का है कर्ज है। केंद्र सरकार तेल बीजों को बाहर से मंगवाने पर सालाना एक लाख 75 हजार करोड़ रुपये खर्च करती है, लेकिन अगर देश के किसानों को ही तेल बीजों पर अच्छी एमएसपी दे दी जाए, तो वह भी इन्हें पैदा कर सकते हैं। इससे फसल विविधता लाने की सरकार की मांग भी पूरी हो जाएगी। उन्होंने लखीमपुर खीरी कांड के आरोपियों को सजा दिलाने के साथ-साथ पीडितों को मुआवजा देने और खेती सेक्टर को डब्ल्यूटीओ से बाहर निकालने की भी मांग भी दोहराई। उन्होंने कहा कि किसान आंदोलन में शहीद हुए किसानों के पार्थिव शरीर अस्पतालों में पड़े हैं। पंजाब सरकार इनके परिवारों को सरकारी नौकरी व मुआवजा राशि देने संबंधी नीति जल्द स्पष्ट करे।
एक दिन और बढ़ी मोबाइल इंटरनेट पर पाबंदी
हरियाणा सरकार ने किसान आंदोलन को देखते हुए सात जिलों में मोबाइल इंटरनेट पर पाबंदी 21 फरवरी रात 12 बजे तक के लिए बढ़ा दी है। राज्य सरकार ने 11 फरवरी को अंबाला, कुरुक्षेत्र, कैथल, जींद, हिसार, फतेहाबाद, सिरसा और डबवाली में मोबाइल इंटरनेट और बल्क एसएमएस भेजने पर प्रतिबंध लगा दिया था।