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Farmer Protest: शंभू बॉर्डर पर पक्के तंबू लगे... चार KM तक किसानों की ट्रॉलियों की लंबी कतार, ऐसा है माहौल
Mon, 19 Feb 2024 09:26 AM IST
शाहरुख खान
अमर उजाला नेटवर्क, अंबाला
अमर उजाला नेटवर्क, अंबाला
Published by: शाहरुख खान
Updated Mon, 19 Feb 2024 09:26 AM IST
सार
शूंभ बॉर्डर पर किसान डटे हैं। किसानों के पक्के तंबू लग गए हैं। चार किलोमीटर के एरिया में किसानों की ट्रॉलियां खड़ीं हैं। हालांकि माहौल शांतिपूर्ण है।
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Farmer Protest
- फोटो : PTI
विस्तार
आंदोलन के छठे दिन रविवार को भी किसान मोर्चे पर डटे रहे। 13 फरवरी से पंजाब-हरियाणा सीमा शंभू पर किसान दिल्ली कूच के लिए अड़े हैं। दूसरी तरफ हरियाणा की सीमा अंबाला में पुलिस फोर्स तैनात है। रविवार को दोनों ओर से शांति रही।
पंजाब की तरफ कई जगह लंगर चले। रविवार शाम को किसान नेताओं और सरकार के बीच चंडीगढ़ में बैठक होनी थी। इस बैठक पर सभी किसानों की निगाहें टिकी रहीं। किसान नेताओं का कहना था कि वे आंदोलन के लिए जत्थेबंदियों के निर्देश का इंतजार कर रहे हैं। उन्हें सरकार का टाल-मटोल मंजूर नहीं है।
सरकार जानबूझकर बैठकों से दिन आगे सरका रही है। किसानों ने कहा कि वे अपनी मांगें मनवाकर ही लौटेंगे, तब तक सड़क पर ही सोएंगे। रविवार को कई किसान अपने परिवार और बच्चों को लेकर भी शंभू-बॉर्डर पर पहुंचे।
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शंभू बॉर्डर से राजपुरा की ओर जाते हुए दोनों तरफ ट्रालियों की लंबी कतार लगी हैं। किसान ट्रालियों, सड़क पर गद्दे बिछाकर और पक्के तंबू लगाकर बैठे हैं। महिला किसान भी आंदोलन में शामिल हैं। कई बुजुर्ग महिलाएं भी आंदोलन में डटी हैं। पंजाब में अलग-अलग जगह से पहुंच किसान अपना लंगर भी तैयार कर रहे हैं। ज्यादातर लंगर गांवों से बनकर आ रहा है।
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पंजाब की तरफ कई जगह लंगर चले। रविवार शाम को किसान नेताओं और सरकार के बीच चंडीगढ़ में बैठक होनी थी। इस बैठक पर सभी किसानों की निगाहें टिकी रहीं। किसान नेताओं का कहना था कि वे आंदोलन के लिए जत्थेबंदियों के निर्देश का इंतजार कर रहे हैं। उन्हें सरकार का टाल-मटोल मंजूर नहीं है।
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सरकार जानबूझकर बैठकों से दिन आगे सरका रही है। किसानों ने कहा कि वे अपनी मांगें मनवाकर ही लौटेंगे, तब तक सड़क पर ही सोएंगे। रविवार को कई किसान अपने परिवार और बच्चों को लेकर भी शंभू-बॉर्डर पर पहुंचे।
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शंभू बॉर्डर से राजपुरा की ओर जाते हुए दोनों तरफ ट्रालियों की लंबी कतार लगी हैं। किसान ट्रालियों, सड़क पर गद्दे बिछाकर और पक्के तंबू लगाकर बैठे हैं। महिला किसान भी आंदोलन में शामिल हैं। कई बुजुर्ग महिलाएं भी आंदोलन में डटी हैं। पंजाब में अलग-अलग जगह से पहुंच किसान अपना लंगर भी तैयार कर रहे हैं। ज्यादातर लंगर गांवों से बनकर आ रहा है।
शांतिपूर्ण माहौल में किसान नेताओं ने किया संबोधित
शंभू सीमा पर पंजाब की तरफ किसान नेताओं ने संबोधित किया। वहीं, दूसरी तरफ अंबाला प्रशासन भी मुस्तैद दिखाई दिया। बॉर्डर पर जवान डटे हैं। पंजाब की तरफ से अंबाला की ओर लगे बैरिकेड्स को देखने के लिए लोग वहां पहुंचे। कई महिलाएं भी इस बैरिकेड देखने के लिए जमा रही। रविवार को दोनों तरफ शांतिपूर्ण माहौल रहा। शाम को होने वाली बैठक के लिए सभी की निगाहें टिकी हैं।
शंभू सीमा पर पंजाब की तरफ किसान नेताओं ने संबोधित किया। वहीं, दूसरी तरफ अंबाला प्रशासन भी मुस्तैद दिखाई दिया। बॉर्डर पर जवान डटे हैं। पंजाब की तरफ से अंबाला की ओर लगे बैरिकेड्स को देखने के लिए लोग वहां पहुंचे। कई महिलाएं भी इस बैरिकेड देखने के लिए जमा रही। रविवार को दोनों तरफ शांतिपूर्ण माहौल रहा। शाम को होने वाली बैठक के लिए सभी की निगाहें टिकी हैं।
परिवार भी लेकर पहुंचे लोग
छुट्टी होने के कारण रविवार को कई लोग अपने परिवार के सदस्यों के लिए पहुंचे। अपने परिवार के साथ महिलाएं और बच्चे भी ट्रैक्टरों पर बैठकर शंभू सीमा पर पहुंचे। इससे सीमा पर ज्यादा भीड़ देखने को मिली। वहीं, चार किलोमीटर के क्षेत्र में थोड़ी दूरी पर ही लंगर लगे हैं। आसपास के ग्रामीणों ने भी लंगर लगाए हैं, जो सुबह से शाम तक चलते हैं।
छुट्टी होने के कारण रविवार को कई लोग अपने परिवार के सदस्यों के लिए पहुंचे। अपने परिवार के साथ महिलाएं और बच्चे भी ट्रैक्टरों पर बैठकर शंभू सीमा पर पहुंचे। इससे सीमा पर ज्यादा भीड़ देखने को मिली। वहीं, चार किलोमीटर के क्षेत्र में थोड़ी दूरी पर ही लंगर लगे हैं। आसपास के ग्रामीणों ने भी लंगर लगाए हैं, जो सुबह से शाम तक चलते हैं।
घग्गर पास खेतों में किसानों का जमावड़ा
घग्गर पुल के आसपास खेतों में किसान जमा रहे और धूप सेंकते नजर आए। काफी दूर तक किसान खेतों में दिनभर बैठे रहे। इसी तरह बनूड़ रोड पर भी वाहनों की लंबी कतार लगी रही। वहीं, अंबाला में शहर के अंदर के रास्तों को खोला है, जिससे कि लोगों को आवाजाही में परेशानी न हो।
घग्गर पुल के आसपास खेतों में किसान जमा रहे और धूप सेंकते नजर आए। काफी दूर तक किसान खेतों में दिनभर बैठे रहे। इसी तरह बनूड़ रोड पर भी वाहनों की लंबी कतार लगी रही। वहीं, अंबाला में शहर के अंदर के रास्तों को खोला है, जिससे कि लोगों को आवाजाही में परेशानी न हो।
आंदोलन में कई प्रदेशों से पहुंचे किसान, बाकी असमंजस में
दिल्ली कूच करने वाले किसान वार्ता का मन बना चुके हैं। मजदूर किसान मोर्चा ने सभी संगठनों के साथ यही फैसला लिया है कि इस मुद्दे पर सरकार जितना बात करना चाहेगी वे करेंगे। मगर यह भी सच्चाई है कि सरकार मामले को निपटाने में जितना समय लगाएगी उतना ही आंदोलन को मजबूती मिलेगी।
दिल्ली कूच करने वाले किसान वार्ता का मन बना चुके हैं। मजदूर किसान मोर्चा ने सभी संगठनों के साथ यही फैसला लिया है कि इस मुद्दे पर सरकार जितना बात करना चाहेगी वे करेंगे। मगर यह भी सच्चाई है कि सरकार मामले को निपटाने में जितना समय लगाएगी उतना ही आंदोलन को मजबूती मिलेगी।
किसान संगठनों की ये है मंशा
अभी तक कई राज्यों के किसान संगठनों ने आंदोलन का समर्थन किया है। इसमें राजस्थान, मध्यप्रदेश, बिहार, छत्तीसगढ़ और झारखंड शामिल हैं। यहां से किसान संगठनों के नेता शंभू सीमा पर पहुंच रहे हैं और आंदोलन के समर्थन दे रहे हैं। अब किसान संगठन की महाराष्ट्र, तेलंगाना, आंध्रप्रदेश के किसान संगठनों से बात चल रही है। मगर वे असमंजस में हैं। सभी राज्यों के किसानों को जोड़ने के पीछे मोर्चे की मंशा है कि इससे सरकार के उन आरोपों को खारिज किया जाए कि यह आंदाेलन सिर्फ पंजाब का है। अगर हर राज्य से किसान संगठन जुड़ेंगे तो पिछली बार हुए किसान आंदोलन की तर्ज पर इसे भी बड़ा किया जा सकेगा।
अभी तक कई राज्यों के किसान संगठनों ने आंदोलन का समर्थन किया है। इसमें राजस्थान, मध्यप्रदेश, बिहार, छत्तीसगढ़ और झारखंड शामिल हैं। यहां से किसान संगठनों के नेता शंभू सीमा पर पहुंच रहे हैं और आंदोलन के समर्थन दे रहे हैं। अब किसान संगठन की महाराष्ट्र, तेलंगाना, आंध्रप्रदेश के किसान संगठनों से बात चल रही है। मगर वे असमंजस में हैं। सभी राज्यों के किसानों को जोड़ने के पीछे मोर्चे की मंशा है कि इससे सरकार के उन आरोपों को खारिज किया जाए कि यह आंदाेलन सिर्फ पंजाब का है। अगर हर राज्य से किसान संगठन जुड़ेंगे तो पिछली बार हुए किसान आंदोलन की तर्ज पर इसे भी बड़ा किया जा सकेगा।
राजस्थान से समर्थन के लिए पहुंची चार ट्रालियां
किसान आंदोलन जैसे-जैसे आगे बढ़ रहा है। वैसे ही समर्थन देने वालों का आंकड़ा बढ़ता जा रहा है। राजस्थान की तरफ से पहले भी समर्थन दिया है और इस बार वे किसानों के साथ पक्के आंदोलन में हिस्सा लेने के लिए आगे आई है। राजस्थान के किसान नेता अपने साथ चार ट्रालियां लेकर पहुंचे हैं। राजस्थान के ग्रामीण किसान मजदूर समिति और आंदोलन के मीडिया प्रभारी रणजीत राजू ने बताया कि उनके साथ चार ट्रालियां आई हैं। हालांकि सरकार की तरफ से बॉर्डरों को सील कर रखा है, लेकिन वे लिंक से शंभू सीमा तक पहुंची।
किसान आंदोलन जैसे-जैसे आगे बढ़ रहा है। वैसे ही समर्थन देने वालों का आंकड़ा बढ़ता जा रहा है। राजस्थान की तरफ से पहले भी समर्थन दिया है और इस बार वे किसानों के साथ पक्के आंदोलन में हिस्सा लेने के लिए आगे आई है। राजस्थान के किसान नेता अपने साथ चार ट्रालियां लेकर पहुंचे हैं। राजस्थान के ग्रामीण किसान मजदूर समिति और आंदोलन के मीडिया प्रभारी रणजीत राजू ने बताया कि उनके साथ चार ट्रालियां आई हैं। हालांकि सरकार की तरफ से बॉर्डरों को सील कर रखा है, लेकिन वे लिंक से शंभू सीमा तक पहुंची।