किसान ट्रैक पर, रेल यात्रियों को 2 दिन और होंगी दिक्कतें
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सफेद मक्खी के कारण तबाह हुई कपास की फसल के उचित मुआवजे की मांग को लेकर आंदोलन कर रहे किसान अब दस अक्तूबर तक ट्रेनें रोकेंगे। इससे पहले किसान संगठनों ने सात और आठ अक्तूबर को रेल पटरी पर धरना देने की बात कही थी।
वहीं आंदोलन के दूसरे दिन वीरवार को भी किसान रेल पटरियों पर डटे रहे। इसके चलते बठिंडा-अंबाला रेल मार्ग पूरी तरह ठप रहा। दिनभर कुल 61 ट्रेनें प्रभावित हुईं। इनमें 39 ट्रेनें रद्द की गईं जबकि 13 ट्रेनों के रूट बदले गए। इससे रेल यात्रियों को खासी परेशानी का सामना करना पड़ा।
वीरवार सुबह से ही किसान बठिंडा के पथराला, शेरगढ़ और कई जगह रेल पटरियों पर डटे रहे। यहां 12 से ज्यादा ट्रेेनें प्रभावित हुई। सरकार की ओर से किसानों से कोई बातचीत न होने के चलते किसान नेताओं ने आंदोलन को दो दिन और बढ़ाने का फैसला लिया। भाकियू उग्राहां के नेता शिंगारा सिंह मान ने कहा कि प्रदेश सरकार किसानों के प्रति गंभीर नहीं है।
अगर वह किसानों की हमदर्द होती तो नकली कीटनाशक दवा न बिकवाती। वहीं, भाकियू क्रांतिकारी के प्रादेशिक अध्यक्ष सुरजीत सिंह फूल, भाकियू डकौंदा के प्रादेशिक अध्यक्ष बूटा सिंह बुर्जगिल, जमहूरी किसान सभा के जिलाध्यक्ष सुखदेव सिंह नथाना ने आरोप लगाया है कि पुलिस ने उनके आंदोलन को विफल बनाने के लिए गांवों से आ रहे लंगर को रोकने की कोशिश की है लेकिन इससे आंदोलन और तेज होगा।
उन्होंने कहा कि जब तक किसानों को बर्बाद कपास का मुआवजा और बासमती का उचित मूल्य नहीं मिलता तब तक वह सरकार के खिलाफ संघर्ष जारी रखेंगे। दूसरी ओर डीएसपी गुरजीत सिंह रोमाणा ने रेल ट्रैक पर धरना दे रहे करीब 125 किसानों को गिरफ्तार करने की पुष्टि की है।
जब तक आंदोलन चलेगा, समझौता एक्सप्रेस रद्द रहेगी
किसान आंदोलन
के मद्देनजर दिल्ली से लाहौर और लाहौर से दिल्ली जाने वाली समझौता
एक्सप्रेस (अप-डाउन) रद्द कर दी गई है। एक अधिकारी के अनुसार जब तक किसानों
का आंदोलन चलेगा तब तक यह ट्रेन रद्द रहेगी।
वहीं वीरवार को अमृतसर स्टेशन
से दादर एक्सप्रेस को छोड़कर सभी ट्रेनों की आवाजाही रद्द कर दी गई। इनमें
शताब्दी एक्सप्रेस, अमृतसर से नई दिल्ली सुपरफास्ट, सच्चखंड एक्सप्रेस और
फ्लाइंग मेल शामिल हैं।
‘हर मुश्किल में किसानों के साथ’
केंद्रीय मंत्री हरसिमरत कौर बादल और पंजाब के कैबिनेट मंत्री बिक्रम सिंह मजीठिया ने कहा कि वह किसानों की हर मुश्किल में उनके साथ खडे़ हैं। उन्होंने कहा कि हरियाणा और राजस्थान में अभी तक गिरदावरी भी नही हुई, लेकिन पंजाब में विशेष गिरदावरी कर पीड़ित किसानों को मुआवजा बांटा जा रहा है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल ने स्वामीनाथन मूल्य निर्धारित करने के लिए केंद्र सरकार से बातचीत की है।
धरने-प्रदर्शन राजनीति का ही दूसरा रूप
सुखबीर बादल, उपमुख्यमंत्री, पंजाब ने बताया कि किसानों के लिए मुख्यमंत्री सबसे ज्यादा चिंतित हैं। उन्होंने बासमती का मुद्दा प्रधानमंत्री के सामने रखकर अपील की है कि वह उन देशों में बासमती का निर्यात करवाए जहां इस पर प्रतिबंध लगाया गया है।
सफेद मक्खी के कारण राजस्थान और हरियाणा में सबसे ज्यादा नुकसान हुआ है, लेकिन पंजाब में इससे राहत के लिए सब से ज्यादा प्रति एकड़ आठ हजार की राशि दी गई है। किसान संगठनों के पास कोई मुद्दा नहीं है और उनके धरने-प्रदर्शन राजनीति का ही दूसरा रूप है। अगर उनको कोई समस्या आ रही है तो वह सीधे सीएम से मिलें और अपनी दिक्कत बताएं।