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करनाल में किसानों का धरना: न छोड़ेंगे सब्र का दामन, ‘भटकाव’ से बचकर चलेंगे अन्नदाता
Fri, 10 Sep 2021 09:51 AM IST
ajay kumar
मोहित धुपड़, अमर उजाला, करनाल (हरियाणा)
मोहित धुपड़, अमर उजाला, करनाल (हरियाणा)
Published by: ajay kumar
Updated Fri, 10 Sep 2021 09:51 AM IST
सार
हरियाणा के करनाल में किसान लघु सचिवालय के बाहर तीन दिन से धरने पर बैठे हैं। किसान संगठनों का कहना है कि मांगें पूरी होने तक यह धरना जारी रहेगा। बता दें कि 28 अगस्त को बसताड़ा टोल प्लाजा पर किसानों पर हुए लाठीचार्ज के विरोध में किसान संगठनों ने करनाल में अपना डेरा जमा लिया है।
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किसानों को संबोधित करते गुरनाम सिंह चढूनी।
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
जब तक किसानों की मांगे पूरी नहीं होती, तब तक कर्णनगरी से किसानों का पड़ाव नहीं उठेगा। ये फैसला संयुक्त किसान मोर्चा के नेता कर चुके हैं। मगर इन नेताओं को इस बात की आशंका है कि करनाल में शुरू हुए इस आंदोलन को भटकाने की कोशिश भी की जा सकती है। इसलिए नेता धरने पर बैठे किसानों से सब्र का दामन थामते हुए ‘भटकाव’ की आशंकाओं से बचकर आंदोलन को जारी रखने की अपील कर रहे हैं।
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करनाल का यह नया मोर्चा स्थानीय मुद्दों और मांगों पर ज्यादा केंद्रित है, इसलिए इस बात का भी ख्याल रखा जाएगा कि इन मुद्दों के बीच किसान आंदोलन के प्राथमिक और महत्वपूर्ण मुद्दे व मांगें गौण न हो जाएं। इन्हीं आशंकाओं के मद्देनजर भाकियू के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत ने किसानों से अपील की है कि जिनसे हमारी लड़ाई है, वे हमारे सामने नहीं हैं और न ही हमें सीधे बातचीत के लिए बुलावा दे रहे हैं। सरकार और किसानों के बीच मध्यस्थता कर रहे अफसरों और सुरक्षा में तैनात जवानों की ओर इशारा करते हुए टिकैत ने कहा कि जो हमारे सामने हैं, वे हम किसानों और मजदूर भाइयों के ही बच्चे हैं। इसलिए अपनी मांगों और मुद्दों से परे किसी अन्य मसले पर भटकते हुए इनसे टकराना नहीं हैं।
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उधर, भाकियू के प्रदेशाध्यक्ष गुरनाम सिंह चढूनी भी किसानों से भावुक अपील करते हुए कह रहे हैं कि ‘खुद को इतनी तकलीफ दो कि दूसरों की आत्मा जाग जाए...यही है आंदोलन।’ उन्होंने कहा कि किसान अपना सब्र नहीं खोएंगे और शहर में किसी से न टकराएंगे और न ही जनता की तकलीफों का कारण बनेंगे।
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लंगर सेवा पर विवाद, बादल पर बरसे चढूनी
करनाल में चल रहे किसान आंदोलन में लंगर सेवा को लेकर एक नया विवाद खड़ा हो गया है। जिसके बाद भाकियू हरियाणा के प्रदेशाध्यक्ष गुरनाम सिंह चढूनी ने पंजाब के पूर्व उपमुख्यमंत्री व शिअद नेता सुखबीर सिंह बादल को आड़े हाथों लिया। दरअसल, सुखबीर सिंह बादल ने ट्वीट कर कहा कि करनाल में चल रहे किसानों के धरने में एसजीपीसी की ओर से पूरा सहयोग किया जा रहा है। हम गुरनाम सिंह चढूनी की कॉल पर वहां लंगर और धरना दे रहे किसानों के लिए अन्य सुविधाओं का भी इंतजाम करवा रहे हैं, ताकि किसानों को कोई दिक्कत न हो। इस ट्वीट से नाराज चढूनी ने सुखबीर बादल की तमाम बातों को सिरे से खारिज कर दिया है।
चढूनी ने कहा कि उन्होंने न तो सुखबीर बादल को लंगर या अन्य मदद के लिए फोन किया और न ही उनके पास सुखबीर बादल का फोन नंबर है। यदि सुखबीर के पास मेरी कॉल का कोई सुबूत है तो किसानों के समक्ष पेश करें या सार्वजनिक रूप से माफी मांगे। चढूनी ने कहा कि पंजाब में किसान अकाली नेताओं के खिलाफ हैं, इसलिए सुखबीर हरियाणा में किसानों के हमदर्द बनना चाहते हैं। चढ़ूनी ने कहा कि गुरुद्वारे सदियों से लंगर की सेवा करते आएं है और किसान आंदोलन में भी महीनों से यह सेवा चल रही है। सुखबीर का यह बयान बदनीयती से पूर्ण है। उनके अनुसार यह प्रयास भी आंदोलन को भटकाने जैसा है।