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‘संपत्ति पर नियुक्त किया जाए एडमिनिस्ट्रेटर’
अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Sat, 07 Dec 2013 09:15 AM IST
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फरीदकोट के राजा हरिंदर सिंह बराड़ के छोटे भाई के बेटे भरत इंदर सिंह ने 22 हजार करोड़ की संपत्ति पर कानूनी तौर पर एडमिनिस्ट्रेटर नियुक्त करने की मांग की है।
उनके वकील विवेक भंडारी ने अतिरिक्त जिला एवं सेशन जज नाजर सिंह की अदालत में जवाब दायर करते हुए यह मांग की। वकील ने जयपुर की एक रॉयल फैमिली के प्रॉपर्टी विवाद में सुप्रीम कोर्ट द्वारा एडमिनिस्ट्रेटर नियुक्त करने का हवाला दिया। अदालत ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 13 दिसंबर तारीख तय की है।
वकील ने बताया कि 22 अगस्त को राजा की दोनों बेटियों के वकीलों ने ट्रस्ट के खर्चों के लिए 50 लाख रुपये निकालने का सर्वसम्मति से आदेश पास करवा लिया था। उ
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स समय भरत इंदर सिंह का प्रतिनिधि अदालत में पेश नहीं हुआ था। अदालत ने जो ऑर्डर पास किया था, उसमें यह नहीं लिखा था कि ट्रस्ट हर महीने रुपये निकालेगा। ट्रस्ट मर्जी से हर महीने खाते से रुपये निकलवा रहा है।
पहले मांगा था मेंटेनेंस अलाउंस
इससे पहले राजा के भतीजे भरत इंदर सिंह ने अर्जी दायर कर विवादित संपति में से प्रतिमाह मेंटेनेंस अलाउंस के तौर पर 15 लाख रुपये देने की मांग की थी।
उनके वकील ने अदालत से कहा था कि राजघरानों के वंशज भी तो उसी स्टेटस से जीवन बिताने का अधिकार रखते हैं। अदालत ने इस मामले में सुनवाई के लिए 24 जनवरी की तारीख तय की हुई है।
यह है मामला
22 जुलाई को सीजेएम की अदालत ने राजा की बेटी अमृत कौर और दीपिंदर कौर को संपत्ति का मालिकाना हक दिया था। निचली अदालत ने राजा हरिंदर सिंह की 1982 में बनाई गई वसीयत को अवैध ठहराया था।
अदालत के इस फैसले को महरावल ट्रस्ट ने चुनौती दी थी। राजा के भतीजे भरत इंदर सिंह ने निचली अदालत के फैसले के खिलाफ अपील दायर कर कहा था कि राजा के घर का बड़ा पुरुष सदस्य होने के नाते वे संपत्ति के हकदार हैं।
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उनके वकील विवेक भंडारी ने अतिरिक्त जिला एवं सेशन जज नाजर सिंह की अदालत में जवाब दायर करते हुए यह मांग की। वकील ने जयपुर की एक रॉयल फैमिली के प्रॉपर्टी विवाद में सुप्रीम कोर्ट द्वारा एडमिनिस्ट्रेटर नियुक्त करने का हवाला दिया। अदालत ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 13 दिसंबर तारीख तय की है।
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वकील ने बताया कि 22 अगस्त को राजा की दोनों बेटियों के वकीलों ने ट्रस्ट के खर्चों के लिए 50 लाख रुपये निकालने का सर्वसम्मति से आदेश पास करवा लिया था। उ
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स समय भरत इंदर सिंह का प्रतिनिधि अदालत में पेश नहीं हुआ था। अदालत ने जो ऑर्डर पास किया था, उसमें यह नहीं लिखा था कि ट्रस्ट हर महीने रुपये निकालेगा। ट्रस्ट मर्जी से हर महीने खाते से रुपये निकलवा रहा है।
पहले मांगा था मेंटेनेंस अलाउंस
इससे पहले राजा के भतीजे भरत इंदर सिंह ने अर्जी दायर कर विवादित संपति में से प्रतिमाह मेंटेनेंस अलाउंस के तौर पर 15 लाख रुपये देने की मांग की थी।
उनके वकील ने अदालत से कहा था कि राजघरानों के वंशज भी तो उसी स्टेटस से जीवन बिताने का अधिकार रखते हैं। अदालत ने इस मामले में सुनवाई के लिए 24 जनवरी की तारीख तय की हुई है।
यह है मामला
22 जुलाई को सीजेएम की अदालत ने राजा की बेटी अमृत कौर और दीपिंदर कौर को संपत्ति का मालिकाना हक दिया था। निचली अदालत ने राजा हरिंदर सिंह की 1982 में बनाई गई वसीयत को अवैध ठहराया था।
अदालत के इस फैसले को महरावल ट्रस्ट ने चुनौती दी थी। राजा के भतीजे भरत इंदर सिंह ने निचली अदालत के फैसले के खिलाफ अपील दायर कर कहा था कि राजा के घर का बड़ा पुरुष सदस्य होने के नाते वे संपत्ति के हकदार हैं।