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Chandigarh News: छूट खत्म, अब राजभवन समेत सभी सरकारी भवनों पर लगेगा 3% टैक्स
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चंडीगढ़। नगर निगम ने वित्तीय संकट दूर करने के लिए सरकारी भवनों के संपत्ति कर (सेवा कर) में दी गई छूट को खत्म कर दिया। यह फैसला मंगलवार को हुई सदन की बैठक में लिया गया। अब सरकारी भवनों को भी अन्य व्यावसायिक भवनों की तरह ही पूरा तीन फीसदी टैक्स देना होगा। अब तक सरकारी भवनों को तीन फीसदी के टैक्स में 25 फीसदी की छूट मिलती थी। इसे अब खत्म कर दिया गया है। निगम का मानना है कि इससे उसके राजस्व में वृदि्ध होगी।
मेयर कुलदीप कुमार की अध्यक्षता में हुई बैठक में निगम को वित्तीय संकट से बाहर निकालने पर विस्तार से चर्चा हुई। एक-एक कर सभी पार्षदों ने सुझाव दिए। कांग्रेस पार्षद गुरबख्श रावत ने सरकारी भवनों पर लगने वाले संपत्ति कर का मुद्दा उठाया और अधिकारियों से पूछा कि पंजाब राजभवन व प्रशासन के सभी भवनों से 2015-16 से अब तक कितना टैक्स वसूला गया है।
संयुक्त आयुक्त ने बताया कि नियमानुसार तय वैल्यू का तीन फीसदी टैक्स आम भवनों से संपत्ति कर के रूप में लिया जाता है। सरकारी भवनों को 25 फीसदी की छूट दी जाती है। बताया कि कई सरकारी भवनों का टैक्स आ रहा है, जो जमा नहीं करा रहे, उन्हें नोटिस भेजा जा रहा है। अब तक 37 करोड़ रुपये की वैल्यू का नोटिस भेजा जा चुका है। पार्षदों ने सरकारी भवनों को दी जा रही छूट पर आपत्ति जताई और एक सुर में इसे खत्म करने की मांग की।
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गुरबख्श रावत ने इसका प्रस्ताव रखा, जिस पर सभी पार्षदों ने सहमति दी और छूट खत्म करने का एजेंडा पास हो गया। पार्षदों की तरफ से सरकारी भवनों पर लगाए टैक्स को दो फीसदी बढ़ाने का भी प्रस्ताव भी लाया गया था लेकिन उस पर चर्चा नहीं हुई।
टैक्स वसूली के मुद्दे पर भी हुई पार्टीबाजी
बैठक की शुरुआत में ही सरकारी बिल्डिंगों के बकाया टैक्स का मुद्दा उठा और सभी ने कहा कि इसे जल्द वसूला जाना चाहिए। पार्षद गुरबख्श रावत ने कई बार पूछा कि प्रशासन के भवनों से कितना टैक्स आया है। इस पर सीनियर डिप्टी मेयर कुलजीत संधू खड़े हो गए और कहा कि प्रशासन को निशाना न बनाया जाए। चंडीगढ़ में पंजाब सरकार के भी कई भवन हैं, यह भी देखा जाए कि उन्होंने अब तक कितना टैक्स दिया है। इस पर आम आदमी पार्टी के पार्षद भी खड़े हो गए और कहा कि चंडीगढ़ में हरियाणा के भी कई भवन हैं, उनकी भी जांच की जाए कि वो टैक्स चुका रहे हैं या नहीं। हालांकि मेयर ने कहा कि सभी सरकारी भवनों के बकाये की जांच की जाएगी और कर न देने वाले को नोटिस भेजा जाएगा। पार्षद हरदीप और प्रेमलता ने नोटिस देकर पानी और सीवर का कनेक्शन काटने का सुझाव दिया।
28 सरकारी संपत्तियों पर ही करीब 150 करोड़ बकाया
पार्षदों ने सदन में ही उन टॉप 10 सरकारी डिफॉल्टरों की सूची मंगवाई। आयुक्त ने लंच के बाद सूची मुहैया कराने की बात की। जब सदन में सरकारी डिफॉल्टरों की सूची पेश की गई तो सभी हैरान हो गए कि सिर्फ 28 सरकारी डिफॉल्टरों पर ही करीब 150 करोड़ रुपये का बकाया हैं। इस पर पार्षद गुरप्रीत गाबी ने कहा कि ये पैसे ही निगम वसूल ले तो गरीबी दूर हो जाएगी। आयुक्त अमित कुमार ने कहा कि गरीबी इस बार की ही दूर हो सकती है। अगली बार फिर संकट खड़ा हो जाएगा। आयुक्त ने कहा कि उन्होंने टॉप-3 सरकारी डिफॉल्टरों के साथ आगामी सोमवार को एक बैठक रखी है और उन्हें जल्द बकाया जमा कराने को कहा जाएगा।
प्रेमलता की टिप्पणी पर 50 मिनट तक हंगामा
सदन में चर्चा के दौरान आप पार्षद प्रेमलता और मनोनीत पार्षद गीता चौहान के बीच बहस हो गई। इस बीच प्रेमलता ने एक विवादित टिप्पणी कर दी, जिस पर हंगामा हो गया। भाजपा के सभी पार्षद अपनी सीट से उठकर वेल में आ गए और प्रेमलता से माफी की मांग करने लगे। भाजपा ने इसे एससी समाज के अपमान से जोड़ दिया और सदन के अंदर नारेबाजी की। दोपहर 12:45 बजे तक हंगामा इतना बढ़ गया कि मेयर अपनी कुर्सी से उठ गए और 15 मिनट के लिए सदन स्थगित कर दिया। दोपहर एक बजे दोबारा सदन की कार्रवाई शुरू हुई लेकिन भाजपा के पार्षद जमीन पर बैठकर आप के खिलाफ नारेबाजी करते रहे। भाजपा के पार्षद माफी की मांग पर अड़े रहे। कई पार्षदों ने प्रयास किया और अंत में प्रेमलता और गीता चौहान ने एक-दूसरे को गले लगाया जिसके बाद 1.35 बजे कार्रवाई शुरू हुई।
सरकारी डिफॉल्टर (व्यावसायिक)
नाम बकाया टैक्स
1. स्पोर्ट्स कांप्लेक्स - 43
6.13 करोड़
2. सेक्टर-23 इलेक्ट्रिसिटी विभाग
2.70 करोड़
3. जिला अदालत कांप्लेक्स-43
1.03 करोड़
4. सीआरपीएफ कैंप-43ए
89.06 लाख
5. सेक्टर-22 इलेक्ट्रिसिटी विभाग
88.58 लाख
6. सेक्टर-7 इलेक्ट्रिसिटी विभाग
60.79 लाख
7. जीएमएचएस-41
43.09 लाख
8. सेक्टर-37 हिम परिसर
42.69 लाख
9. जीएमएस-पॉकेट-8 मनीमाजरा
39.51 लाख
10. जीएमएचएस-मनीमाजरा
37.16 लाख
कुल
13.88 करोड़
सरकारी डिफॉल्टर्स (आवासीय)
नाम
बकाया
1. एयरफोर्स स्टेशन-28, 31 और 47 - 3.03 करोड़
2. पंजाब यूनिवर्सिटी रजिस्ट्रार - 2.95 करोड़
3. पंजाब यूनिवर्सिटी रजिस्ट्रार - 65.66 लाख
4. डायरेक्टर, पेक सेक्टर-12 - 46.01 लाख
5. डायरेक्टर, स्टेट इंटेलीजेंस ब्यूरो-32 - 17.86 लाख
6. मौलीजागरां रेलवे कालोनी - 17.41 लाख
7. पीजीआई सेक्टर-12 - 17.10 लाख
8. सीपीडब्ल्यूडी, सेक्टर-7 - 13.69 लाख
9. आईटीबीपी पुलिस सेक्टर-32 - 10.61 लाख
10. एक्सइन, सीपी डिवीजन नंबर-6 - 8.76 लाख
कुल - 7.95 करोड़
सरकारी डिफॉल्टर्स ऑटोनॉमस बॉडी (व्यावसायिक)
नाम - बकाया
1. पंजाब यूनिवर्सिटी - 67.53 करोड़
2. पीजीआई, सेक्टर-14 - 41.53 करोड़
3. पेक, सेक्टर-12 - 14.07 करोड़
4. निट्टर - 3 करोड़
5. केंद्रीय विद्यालय-29 - 47.81 लाख
6. पीएफ ऑफिस, सेक्टर-17 - 31.05 लाख
7. प्रिंसिपल, केवी प्राइमरी स्कूल-47 - 29.42 लाख
8. केवी प्राइमरी स्कूल-47 - 21.70 लाख
कुल - 127.44 करोड़
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मेयर कुलदीप कुमार की अध्यक्षता में हुई बैठक में निगम को वित्तीय संकट से बाहर निकालने पर विस्तार से चर्चा हुई। एक-एक कर सभी पार्षदों ने सुझाव दिए। कांग्रेस पार्षद गुरबख्श रावत ने सरकारी भवनों पर लगने वाले संपत्ति कर का मुद्दा उठाया और अधिकारियों से पूछा कि पंजाब राजभवन व प्रशासन के सभी भवनों से 2015-16 से अब तक कितना टैक्स वसूला गया है।
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संयुक्त आयुक्त ने बताया कि नियमानुसार तय वैल्यू का तीन फीसदी टैक्स आम भवनों से संपत्ति कर के रूप में लिया जाता है। सरकारी भवनों को 25 फीसदी की छूट दी जाती है। बताया कि कई सरकारी भवनों का टैक्स आ रहा है, जो जमा नहीं करा रहे, उन्हें नोटिस भेजा जा रहा है। अब तक 37 करोड़ रुपये की वैल्यू का नोटिस भेजा जा चुका है। पार्षदों ने सरकारी भवनों को दी जा रही छूट पर आपत्ति जताई और एक सुर में इसे खत्म करने की मांग की।
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गुरबख्श रावत ने इसका प्रस्ताव रखा, जिस पर सभी पार्षदों ने सहमति दी और छूट खत्म करने का एजेंडा पास हो गया। पार्षदों की तरफ से सरकारी भवनों पर लगाए टैक्स को दो फीसदी बढ़ाने का भी प्रस्ताव भी लाया गया था लेकिन उस पर चर्चा नहीं हुई।
टैक्स वसूली के मुद्दे पर भी हुई पार्टीबाजी
बैठक की शुरुआत में ही सरकारी बिल्डिंगों के बकाया टैक्स का मुद्दा उठा और सभी ने कहा कि इसे जल्द वसूला जाना चाहिए। पार्षद गुरबख्श रावत ने कई बार पूछा कि प्रशासन के भवनों से कितना टैक्स आया है। इस पर सीनियर डिप्टी मेयर कुलजीत संधू खड़े हो गए और कहा कि प्रशासन को निशाना न बनाया जाए। चंडीगढ़ में पंजाब सरकार के भी कई भवन हैं, यह भी देखा जाए कि उन्होंने अब तक कितना टैक्स दिया है। इस पर आम आदमी पार्टी के पार्षद भी खड़े हो गए और कहा कि चंडीगढ़ में हरियाणा के भी कई भवन हैं, उनकी भी जांच की जाए कि वो टैक्स चुका रहे हैं या नहीं। हालांकि मेयर ने कहा कि सभी सरकारी भवनों के बकाये की जांच की जाएगी और कर न देने वाले को नोटिस भेजा जाएगा। पार्षद हरदीप और प्रेमलता ने नोटिस देकर पानी और सीवर का कनेक्शन काटने का सुझाव दिया।
28 सरकारी संपत्तियों पर ही करीब 150 करोड़ बकाया
पार्षदों ने सदन में ही उन टॉप 10 सरकारी डिफॉल्टरों की सूची मंगवाई। आयुक्त ने लंच के बाद सूची मुहैया कराने की बात की। जब सदन में सरकारी डिफॉल्टरों की सूची पेश की गई तो सभी हैरान हो गए कि सिर्फ 28 सरकारी डिफॉल्टरों पर ही करीब 150 करोड़ रुपये का बकाया हैं। इस पर पार्षद गुरप्रीत गाबी ने कहा कि ये पैसे ही निगम वसूल ले तो गरीबी दूर हो जाएगी। आयुक्त अमित कुमार ने कहा कि गरीबी इस बार की ही दूर हो सकती है। अगली बार फिर संकट खड़ा हो जाएगा। आयुक्त ने कहा कि उन्होंने टॉप-3 सरकारी डिफॉल्टरों के साथ आगामी सोमवार को एक बैठक रखी है और उन्हें जल्द बकाया जमा कराने को कहा जाएगा।
प्रेमलता की टिप्पणी पर 50 मिनट तक हंगामा
सदन में चर्चा के दौरान आप पार्षद प्रेमलता और मनोनीत पार्षद गीता चौहान के बीच बहस हो गई। इस बीच प्रेमलता ने एक विवादित टिप्पणी कर दी, जिस पर हंगामा हो गया। भाजपा के सभी पार्षद अपनी सीट से उठकर वेल में आ गए और प्रेमलता से माफी की मांग करने लगे। भाजपा ने इसे एससी समाज के अपमान से जोड़ दिया और सदन के अंदर नारेबाजी की। दोपहर 12:45 बजे तक हंगामा इतना बढ़ गया कि मेयर अपनी कुर्सी से उठ गए और 15 मिनट के लिए सदन स्थगित कर दिया। दोपहर एक बजे दोबारा सदन की कार्रवाई शुरू हुई लेकिन भाजपा के पार्षद जमीन पर बैठकर आप के खिलाफ नारेबाजी करते रहे। भाजपा के पार्षद माफी की मांग पर अड़े रहे। कई पार्षदों ने प्रयास किया और अंत में प्रेमलता और गीता चौहान ने एक-दूसरे को गले लगाया जिसके बाद 1.35 बजे कार्रवाई शुरू हुई।
सरकारी डिफॉल्टर (व्यावसायिक)
नाम बकाया टैक्स
1. स्पोर्ट्स कांप्लेक्स - 43
6.13 करोड़
2. सेक्टर-23 इलेक्ट्रिसिटी विभाग
2.70 करोड़
3. जिला अदालत कांप्लेक्स-43
1.03 करोड़
4. सीआरपीएफ कैंप-43ए
89.06 लाख
5. सेक्टर-22 इलेक्ट्रिसिटी विभाग
88.58 लाख
6. सेक्टर-7 इलेक्ट्रिसिटी विभाग
60.79 लाख
7. जीएमएचएस-41
43.09 लाख
8. सेक्टर-37 हिम परिसर
42.69 लाख
9. जीएमएस-पॉकेट-8 मनीमाजरा
39.51 लाख
10. जीएमएचएस-मनीमाजरा
37.16 लाख
कुल
13.88 करोड़
सरकारी डिफॉल्टर्स (आवासीय)
नाम
बकाया
1. एयरफोर्स स्टेशन-28, 31 और 47 - 3.03 करोड़
2. पंजाब यूनिवर्सिटी रजिस्ट्रार - 2.95 करोड़
3. पंजाब यूनिवर्सिटी रजिस्ट्रार - 65.66 लाख
4. डायरेक्टर, पेक सेक्टर-12 - 46.01 लाख
5. डायरेक्टर, स्टेट इंटेलीजेंस ब्यूरो-32 - 17.86 लाख
6. मौलीजागरां रेलवे कालोनी - 17.41 लाख
7. पीजीआई सेक्टर-12 - 17.10 लाख
8. सीपीडब्ल्यूडी, सेक्टर-7 - 13.69 लाख
9. आईटीबीपी पुलिस सेक्टर-32 - 10.61 लाख
10. एक्सइन, सीपी डिवीजन नंबर-6 - 8.76 लाख
कुल - 7.95 करोड़
सरकारी डिफॉल्टर्स ऑटोनॉमस बॉडी (व्यावसायिक)
नाम - बकाया
1. पंजाब यूनिवर्सिटी - 67.53 करोड़
2. पीजीआई, सेक्टर-14 - 41.53 करोड़
3. पेक, सेक्टर-12 - 14.07 करोड़
4. निट्टर - 3 करोड़
5. केंद्रीय विद्यालय-29 - 47.81 लाख
6. पीएफ ऑफिस, सेक्टर-17 - 31.05 लाख
7. प्रिंसिपल, केवी प्राइमरी स्कूल-47 - 29.42 लाख
8. केवी प्राइमरी स्कूल-47 - 21.70 लाख
कुल - 127.44 करोड़