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'भारत माता की जय' न बोलने वालों पर पूर्व सीएम ने उठाए सवाल

Mon, 04 Apr 2016 04:27 PM IST
राजेश शांडिल्य/अमर उजाला, चंडीगढ़
राजेश शांडिल्य/अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Mon, 04 Apr 2016 04:27 PM IST
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exclusive interview with former cm Ramesh Pokhriyal
पूर्व सीएम रमेश पोखरियाल निशंक - फोटो : amar ujala

पंचकूला। यह देश हर हिंदुस्तानी का है। अगर किसी को भारत माता की जय बोलने में मुश्किल आ रही है तो उसे समझ लेना चाहिए कि ऐसा नहीं चलेगा। क्योंकि यह भारत देश है, कोई धर्मशाला नहीं है। इस देश में रहने वाले हर नागरिक को वंदे मातरम् और भारत माता की जय बोलने में गर्व महसूस करना चाहिए।

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अगर कोई इसमें संकोच करता है तो देश के प्रति उसकी आस्था पर सवाल उठना लाजमी हैं। राष्ट्र प्रेम की कविताओं के लिए तत्कालीन राष्ट्रपति ज्ञान जैल सिंह और राष्ट्रपति डॉ. शंकर दयाल शर्मा से सम्मानित हो चुके उत्तराखंड के पूर्व सीएम और हरिद्वार से सांसद रमेश पोखरियाल निशंक ने यह प्रतिक्रिया अमर उजाला से विशेष बातचीत के दौरान दी।
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निशंक ने कहा कि भाजपा सबका साथ सबका विकास करने में विश्वास रखती है। लेकिन राष्ट्रप्रेम की भावना के साथ। दुनिया के किसी देश में ऐसा नहीं होता कि वहां के नागरिक अपने ही देश के राष्ट्रीय गीत, राष्ट्रीय गान और उसका जयघोष करने से कतराते हों। 
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अब आएगी साहित्यिक राजनेता की 51वीं पुस्तक
राजनीति और साहित्य रचना के लिए देश-दुनिया में विख्यात निशंक की अब तक 50 पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं। राष्ट्रप्रेम की कविताओं के लिए उन्हें देश के राष्ट्रपति ज्ञानी जैल सिंह और राष्ट्रपति डॉ. शंकर दयाल शर्मा सम्मानित कर चुके हैं।

उनके द्वारा लिखी पुस्तकें इंडोनेशिया, मॉरिशस सहित अन्य कई देशों में पढ़ाई जा रही हैं। बातचीत में निशंक ने बताया कि जल्द ही उनकी नई पुस्तक धरती का स्वर्ग उत्तराखंड प्रकाशित होगी। इस पुस्तक में प्राकृतिक सौंदर्य का वर्णन किया है। तीन महीने पहले निशंक की पुस्तक विश्व धरोहर गंगा प्रकाशित हुई थी। इस पुस्तक का एक पार्ट मॉरिशस के शिक्षण संस्थानों में पढ़ाया जा रहा है। 


निशंक बोले, यह हरियाणा के भाईचारे का योगदान है 
निशंक रविवार को पंचकूला के इंद्रधनुष ऑडिटोरियम में अमर उजाला के सहयोग से गढ़वाल सभा द्वारा आयोजित सांस्कृतिक कार्यक्रम शिरकत करने पहुंचे। उन्होंने कहा कि देवभूमि उत्तराखंड की संस्कृति सदियों पुरानी है। हरियाणा में उत्तराखंड की संस्कृति जो प्रचार प्रसार हो रहा है। उसमें सबसे बड़ा योगदान हरियाणा की मिट्टी में आपसी भाईचारे का है।

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